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जीत की असल और निहस्वार्थ ख़ुशी समर्थकों को होती है

by Nitin Tripathi
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जीत की असल और निहस्वार्थ ख़ुशी समर्थकों को होती है और उनका पार्टी पर विश्वास भी अडिग होता है.

कल

प्रातः निज निवास पर पंडित विनय त्रिवेदी बिनोद शरण जी जैसे भगवा धारियों ने सुबह से ही माहौल भगवा मय कर रखा था. तत्पश्चात् गोमती नगर के एक होटेल में में दद्दा Ajit Singh Awanish P. N. Sharma Pushker Awasthi Pramath जैसे राष्ट्रवादी मित्रों ने विजयोत्सव आयोजित कर रखा था. जहां Anand Sharma जैसे राष्ट्र्वादी ख़ेमे के मित्र, Rudra Pratap Dubey जैसे धुरंधर पत्रकार, Govind Tiwari, Rohit Kumar, Pawan Tripathi,अरुणेश मिश्रा बाजीराव Sanjay Trivedi Sahil Singh Suryavanshi Gaurav Bansal जैसे बहुत सारे सोसल मीडिया धुरंधर पहले से ही विराज मान थे. मुझे इस सभा में थोड़ी देर ही रहने का सौभाग्य मिला, Dayanand Pandey जी, Ranjay Tripathi मालिनी अवस्थी दी जैसी हस्तियाँ भी इस विजयोत्सव में पधारीं.
और फ़िर भाजपा प्रदेश कार्यालय में तो होली आई हुई थी. समर्थकों का यह निश्च्ल प्रेम वाक़ई किसी भी दल के लिए सम्पत्ति है.
इसके पश्चात अपने कार्यालय और क्षेत्र में टहलना हुआ. चारों ओर कहीं पटाखे दग रहे हैं तो कोई लड्डू बाँट रहा है.
लम्बे समय पश्चात हमने भी गाड़ी के दोनो ओर बड़े बड़े भाजपा के झंडे फहरा शहर में और क्षेत्र में टहलाया – पक्ष विपक्ष सबके दरवाज़े फ़ुल वाल्यूम में जो राम को लाए हैं बजाया. अधिकतर जनता अति प्रशंन थी. पुलिस वाले हों या ट्रैफ़िक वाले सबके चेहरे पर मुस्कान थी, सबको पता था यह बस जीत की थोड़ी ख़ुशी है, सपा होती तो आतंक होता. सबको पता था भाजपाई इतने संयमित होते हैं कि शाम होते ही राज धर्म निभाने लगेंगे. चौराहों पर जनता हो या पुलिस वाले सबने मुस्कुराते हुवे स्वागत किया, कुछेक लोग तो झूमने भी लगते थे, गुलाल लगाने की ज़िद करते. और यह आम जनता का उत्साह था.
आज UP में चौतरफ़ा जश्न का माहौल है. रावण एक बार फ़िर पराजित हुआ. धर्म की जीत हुई, अधर्म की हार हुई.

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