Home हमारे लेखकनितिन त्रिपाठी दुनिया अब मोदी मय हो गई है

दुनिया अब मोदी मय हो गई है

by Nitin Tripathi
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भारत के विपक्ष और वामियों की समस्या यह है कि उनकी दुनिया अब मोदी मय हो गई है। जितना भक्त मोदी को नहीं याद करते उससे ज्यादा विपक्षी याद करते हैं।
कल लता जी की मृत्यु पर शाहरुख खान आए और उन्होंने दुवा की। उनके साथ उनकी मैनेजर पूजा ने प्रार्थना की। प्रथम तो यह भी है कि शाहरुख खान इतने बड़े स्टार हैं तो यदि लता जी के अंतिम संस्कार मे गए हैं, वहाँ हाथ जोड़ प्रार्थना कर देते तो भी उनका कुछ बिगड़ता नहीं। ऐसी जगहों पर अपना धर्म दिखाने की जरूरत नहीं होती। यदि मैं किसी ईसाई परिचित के कार्यक्रम मे चर्च जाऊँ तो वहाँ मुझे मोमबत्ती जलानी चाहिए, हनुमान चालीसा नहीं पढ़नी चाहिए – यही सामान्य सभ्यता का तकाजा है, यही असल सभी धर्मों का आदर करो की नीति है। प्रायः सभी समझदार लोग ऐसा ही करते हैं।
खैर यह लता जी के परिवार और शाहरुख खान का मैटर।
पर सबसे मजेदार भारत के सेकुलर खेमे का ऐटिटूड रहा। सभी को जबरदस्त ऑर्गैज़म। कोई बात रहा है नफरत के दौर मे शांति फैलाने वाली तशवीर। अरे भाई कोई पीस कीपिंग मिशन पर गए थे क्या? परिचित के अंतिम संस्कार मे गए और वहाँ भी मृतक की धार्मिक संवेदना का आदर करने के बजाय अपना ऐटिटूड ही दिखाया। इसमे ऐसी क्या शांति फैली? कोई बता रहा है मोदी राज मे दिल इतने दूर हो गए कि ऐसी खूबसूरत तशवीर दिखती नहीं। कोई इसे असल सेकुलर भारत बता रहा है। जबकि हकीकत मे secularism यह होती कि मृतक की धार्मिक आस्था का सम्मान किया जाता। आफ्टर आल हिन्दू मृत्यु पश्चात आत्मा के प्रारूप, कर्म, पुनर्जन्म आदि पर यकीन करते हैं तो मुस्लिम मृत्यु पश्चात सीधे जन्नत और दोजख के सिद्धांत पर यकीन करते हैं। यदि शाहरुख अपनी धार्मिक कट्टरता छोड़ मृतक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते तो यह वाकई एक खूबसूरत सेकुलर तशवीर होती।
लता जी के अंतिम संस्कार मे शाहरुख का फातिहा पढ़ना वैसे ही है जैसे कुछ हिन्दू ताज महल मे हनुमान चालीसा पढ़ने लगते हैं। यह है उनका इन्टर्नल मैटर, उनकी अपनी आस्था। पर ऐसे लोगों को सेकुलर नहीं बल्कि कट्टर वादी कहा जाता है।

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