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दोगले, दगाबाज और सिक्कों पर बिकने वाले ग़द्दार कम्युनिस्ट

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दोगले, दगाबाज और सिक्कों पर बिकने वाले ग़द्दार कम्युनिस्ट

रूस जो कभी USSR हुआ करता था तब भारत के कम्युनिस्ट हर बात के लिए उनके तरफ मुँह उठा के चल देते थे … सारी इनकी स्ट्रेटेजी, पाठ्यक्रम, छपाई, हलन्त, पूर्णविराम, वोडका, अय्याशी सब वहीं से संचालित होती थी …. USSR इनको बोटी देता था ये दुम हिलाते थे ….
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ये चलता था USSR के टूट के बाद भी … फिर Putin ने एक दिन बोला कि हमने कुत्तों को बोटी डालना बंद कर दिया है …
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2018 में इनको उम्मीद थी कि कम्युनिस्ट रूस मार्क्स के दो सौवें जन्मदिन पर बहुत मजे कराएगा और ये जम के दारू, माँस उड़ाएँगे, अय्याशी करेंगे और कुछ माल मुद्रा भी बनेगा ….. बड़ी उम्मीद से रूस जाने का कार्यक्रम बनाए और पहुँच हुए लाए लेनिनग्राद, St Petersberg, मास्को, स्टालिनग्राद आदि का सपना पाले … वहाँ जाकर देखा कि यहाँ मॉर्क्स को कद्दू के भाव न कोई पूछ रहा … वहाँ से इनका रूस के विरोध में पगलाना चालू हुआ …
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आज हालत ये है कि ये पुतिन को गालियाँ दे रहे हैं …. पश्चिमी देशों और नाटो के गोद में खेलने वाले जेलेंस्की के लिए घड़ियाली आँसू निकाल रहे हैं …. वो जेलेंस्की जो पूँजीवादियों की पूँछ पकड़ के पश्चिमी देशों के आगे पीछे घूम रहा है …. वो जो पूँजीवादियों के साथ रहकर कम्युनिस्ट रूस को मिटाना चाहता है, वो जो कम्युनिस्ट विचारधारा के विरोधी के पैसे और हथियार के दम पर अड़ा हुआ उसके लिए लेख, editorial, प्रदर्शन और न जाने क्या क्या कर रहे है। ….
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जिसका नामक खाए दशकों उसको छोड़कर पश्चिम देशों के हथियार लॉबी, सोरोस जैसे ग्लोबल टेरर फंडिंग करने वाले, पूरे विश्व में हर समय कोई न कोई लड़ाई लगाने वालों का पिल्ला बने घूम रहे हैं ………. ऐसे समय उसका साथ छोड़कर भाग गए जिसने वर्षों इनको पाला था और इनकी पीढ़ियाँ उस कमाए पैसे के दम पर जी खा रही हैं …
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इससे आपको भारत के और दुनिया के कम्युनिस्ट मजहब के ललची, पैसे पर बिकने वाले, धोखेबाज और मक्कार कम्युनिस्ट माफिया के मानसिकता का पता चलता है ….

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