Home लेखक और लेखपुष्कर अवस्थी नरेंद्र मोदी जी की सरकार

नरेंद्र मोदी जी की सरकार

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भारत में 2014 को जबसे नरेंद्र मोदी जी की सरकार आई है, तब से जहां भारतीय समाज बहुत बदल गया है वहीं पर, भारत का कथानक भी बदल गया है। आज अंतराष्ट्रीय परिदृश्य में भारत को पिछले 8 वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वहिताय पर आधारित सुलझी हुई आक्रामक कूटनीति ने भारत को भू राजनीति का ध्रुव वा सामरिक समीकरणों का केंद्र बना दिया है।
हमे भारत के बढ़ते सोपान और समाधिकार का नवीनतम उदाहरण रूस और यूक्रेन के बीच हो रहे युद्ध से बनी नई परिस्थितियों में देखा जासकता है। एक तरफ भारत, अपने निवासियों को यूक्रेन से प्राथमिकता के आधार पर, युद्धग्रस्त इलाकों में रूस से अल्पकालीन युद्ध विराम करा, निकलवाने में सफल होता है तो दूसरी तरफ अमेरिका के तमाम दबाव के बाद भी संयुक्तराष्ट्र संघ की सुरक्षा समिति की बैठक में रूस के विरुद्ध वोट नही करता है।
इसके बाद अमेरिका ने रूस पर दबाव डालने के लिए रूस से तेल वा गैस लेने पर जब अंतराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाया और भारत से अपेक्षा की कि वह, रूस से किसी भी तरीके का तेल वा गैस को लेकर समझौता न करे तो, भारत ने उसकी उपेक्षा कर, रूस से 3 मिलियन बैरल तेल वह भी 20 से 25 प्रतिशत डिस्काउंट में खरीद डाला, जिसका भुगतान भी डॉलर ने कर के बल्कि रुपए में, तेल के निर्गम होने पर करना है।
आज अमेरिका द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाने की नीति का अप्रभावी होता देख आज अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडेन अपने ही देश में आलोचना के शिकार हो रहे है। रूस यूक्रेन युद्ध के कारण रूसी तेल वा गैस के अंतराष्ट्रीय बाजार में न पहुंचने से जो तेल की अंतराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आई है उससे खुद अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ रहा है। अमेरिका का बाइडेन शासन, तेल की कीमतों को कम करने के लिए जहां एक तरफ सऊदी अरब और यूएई पर तेल उत्पादन को बढ़ाने के लिए मानने में लगा है वहीं दक्षिण अमेरिका स्थित अपने धुर विरोधी वेंजुएला की मिन्नते कर रहा है की वह अपने तेल के उत्पाद को बढ़ाए। समाचार तो यह भी आए है की अमेरिका ईरान के तेल को खुले अंतराष्ट्रीय बाजार में लाने के लिए, अपनी ईरान के प्रति नाभिकीय नीति में भी परिवर्तन करने के संकेत दे चुका है।
अमेरिका यह सब इस लिए कर रहा है ताकि अंतराष्ट्रीय बाजार में तेल का भाव, बिना रूस के तेल के स्थिर रह सके और शेष विश्व, रूस के तेल को न खरीदे। लेकिन भारत की मोदी सरकार ने, अमेरिका की रूस को दंड देने की आकांक्षा और अंतराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों वा उसके श्रोतों पर प्रभाव बनाए रखने अभिलाषा को, भारतीय हित के लिए तलांजलि दे दी हैं। आज, भारत द्वारा रूस से तेल को खरीदने के निर्णय की चर्चा, अमेरिका के मीडिया पर भी हो रही है।

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