Home चलचित्र #नैरेटिव_वारफेयर के कुछ रूल्स…

#नैरेटिव_वारफेयर के कुछ रूल्स…

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कुछ बने बनाये नैरेटिव होते हैं जो हर हाल में हमारे विरुद्ध होते हैं. उन्हें बदलने की आवश्यकता है.
वहीं कुछ नैरेटिव हैं जिनका प्रयोग सामान्यतः हमारे विरुद्ध होता है, पर हम उनका प्रयोग अपने पक्ष में भी कर सकते हैं… करते नहीं हैं.
जिसे क्रिकेट की भाषा में कहते हैं, प्लेइंग अगेंस्ट द स्पिन या प्लेइंग विद द स्पिन.
नए नैरेटिव बनाने का एक कॉस्ट होता है, पर बने बनाये नैरेटिव बदलने का कॉस्ट उससे अधिक होता है. इसलिए जहाँ जिन नैरेटिव्स का प्रयोग अपने पक्ष में करना सम्भव हो, उनका प्रयोग किया जाये. कल उस नैरेटिव का विरोध किया था, यह आज उसका अपने पक्ष में उपयोग करने में बाधक नहीं होना चाहिए.
उदाहरण के लिए गाँधीजी का आभामंडल… उसे तोड़ने में हम जितनी ऊर्जा लगाते हैं, उससे कम ऊर्जा में हम उनकी कही हुई अनेक बातों को अपने पक्ष में प्रयोग कर सकते हैं. जहाँ उनका अहिंसा का सिद्धांत हमारी आत्मरक्षा में बाधक बनता है वहाँ उन्हें ख़ारिज कर दें, पर जो बातें उन्होंने सामाजिक समरसता के लिए कही हैं, जहाँ हिन्दू धर्म का महिमामंडन किया है, जहाँ ईसाई मिशनरियों की या धर्मान्तरण की आलोचना की है, उसका प्रयोग करने से परहेज ना करें. वैसे ही हिटलर बनाम यहूदियों का बना बनाया नैरेटिव है जिसे बदलने में अपार ऊर्जा लगेगी और लाभ भी हमें नहीं होगा…वहीं उसके प्रयोग से अपना पक्ष रखने की अनंत संभावनाएँ हैं.
वहीं कुछ नैरेटिव हैं जो एकतरफा हमारे शत्रु हैं. उन्हें ध्वस्त करने के अलावा कोई उपाय नहीं है…जैसे इस्लामोफोबिया का नैरेटिव, रिलिजन ऑफ पीेस का नैरेटिव, सभी धर्म समान हैं का नैरेटिव…
तो किसी नैरेटिव को टैकल करने से पहले यह गणना कीजिये, इसे अपने पक्ष में इस्तेमाल करने की गुंजाइश है क्या? इसे बदलने या ध्वस्त करने का कॉस्ट क्या होगा बनाम अपने फायदे में इस्तेमाल करने का लाभ कितना होगा. आज के दिन में जब हमारी नए नैरेटिव बनाने की मशीनरी कमजोर है और क्षमता सीमित है, उपलब्ध नैरेटिव को अपने पक्ष में इस्तेमाल करने का स्किल एक उपयोगी स्किल हो सकता है.
#TheKashmirFiles फ़िल्म की सफलता का राज यह भी है कि इसने विक्टिम आइडेंटिटी के स्थापित नैरेटिव का प्रभावी उपयोग किया है. दिस शॉट वॉज प्लेड विद द स्पिन…

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