Home अमित सिंघल भाजपा समर्थको की कुछ पोस्ट और उस पर आये कमेंट पढ़ रहा था

भाजपा समर्थको की कुछ पोस्ट और उस पर आये कमेंट पढ़ रहा था

by अमित सिंघल
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फेसबुक पर भाजपा समर्थको की कुछ पोस्ट और उस पर आये कमेंट पढ़ रहा था।
कुछ बाते कॉमन है।
प्रथम, सरकारी कर्मी दुखी है क्योकि “योगी जी ने सरकारी अधिकारियों को इतनी पॉवर दे दी थी कि वो खुद को शहंशाह समझते थे”।
आश्चर्य, स्वयं सरकारी कर्मी भी है और सरकारी अधिकारियों की पावर से दुखी भी है? क्या अखिलेश के समय में माफिया के द्वारा अपमानित किए जाने से यह सरकारी कर्मी प्रसन्न थे?
द्वितीय, शिक्षामित्रों का मानदेय नहीं बढ़ाया; OPS नहीं मिली (वही स्कीम जिसे मुलायम ने समाप्त कर दिया था)। यहाँ तक कि सरकारी नियुक्तियों में घूस ना लेने को एक नेगेटिव पॉइंट बताया जा रहा है – कारण यह है कि घूस देकर नौकरी पाया व्यक्ति जिस पार्टी की सरकार है उसके प्रति कृतज्ञ रहता है।
अर्थात, पूरी बात घूम-फिरकर सरकारी कर्मियों की सुविधा पर आ जाती है। घूस देकर नौकरी, ट्रांसफर-पोस्टिंग इत्यादि की व्यवस्था चाहिए। ईमानदारी की बात पड़ोसी के लिए है, मेरे लिए नहीं।
फिर आप उन लोगो की शिकायत हर समय क्यों करते रहते है जो किसी किताब के नाम पर वोट दे देते है। आखिरकार आप की “किताब” तो भ्रष्टाचार है जिसके नाम पर आप वोट देते है।
तृतीय, कार्यकर्ताओ का “ध्यान” नहीं रखा। पुलिस ने मोटरसाइकिल पकड़ ली; घूस देकर छुड़ाना पड़ा। क्यों; पुलिस ने आप ही की मोटरसाइकिल क्यों पकड़ी? इस बात को गोल कर जाते है।
मैंने कई बार पूछा कि ऐसा कौन सा कार्य है जो योगी सरकार नहीं करती। उस पर चुप्पी साध जाते है। जब पुनः पूछता हूँ कि क्या आपको अनुचित रूप से ठेका चाहिए, तो एक ने बेशर्मी से लिखा कि “काम” से उनका तात्पर्य “ठेका” मिलना ही है।
दूसरे शब्दों में, अनुचित तरीके से ठेका दे दीजिये, प्लाट दे दीजिये, सरकारी अनुदान दे दीजिये; नौकरी दे दीजिये; ट्रांसफर-पोस्टिंग कर दीजिये! भले ही इस “अनुकम्पा” या “कार्यकर्ताओ के कार्य” के लिए बदले में कुछ घूस ले लीजिये।
आप सरकार से अपेक्षा करते है कि भ्रष्टाचार कम हो, मेरिट के आधार पर कार्य हो; दैनिक आर्थिक गतिविधियों में सरकार का हस्तक्षेप कम से कम हो।
लेकिन आप स्वयं के लाभ के लिए चाहते है कि सरकार भ्रष्टाचार करे।
मेरा प्रश्न है कि फिर योगी जी एवं अखिलेश में क्या अंतर हुआ? फिर आप सनातन संस्कृति की हुंकार क्यों भरते है?
अंत में, यह सभी लिखते है कि समाज के निर्धन वर्ग, दलित एवं अन्य पिछड़े वर्ग को सरकारी योजनाओ का लाभ पंहुचा है। मानते है कि महिलाओ को सीधे धन पंहुचा, घर-टॉयलेट-बिजली-गैस मिली। यह भी लिखते है कि यह वर्ग बड़ी संख्या में योगी जी के लिए वोट डाल रहा है।
क्या इसका अर्थ यह नहीं हुआ कि सरकार जनता के लिए कार्य कर रही है? सभी को बिना किसी भेद-भाव के एकसमान अवसर उपलब्ध करा रही है। पिछली सरकारों ने इसी निर्धन एवं पिछड़े वर्ग की भलाई के लिए नारे लगाए; लेकिन वास्तव में इस वर्ग की अनदेखी की।
पहले सरकार द्वारा लाभार्थियों को भेजे जाने वाले एक रुपये में से 85 पैसे “व्यवस्था” खा जाती थी। उस 85 पैसे में से कुछ सिक्के लाभार्थियों के नाम पर भिखारियों की तरह आप भी लपक लेते थे। आप को इसी “भीख” की ललक है; सीधे-सीधे बोलते क्यों नहीं? शर्माते क्यों है?
आखिरकार आप कैसा राष्ट्र, कैसा प्रदेश चाहते है? आप सरकार से क्या चाहते है? आप कैसी सरकार चाहते है?
मुझे हर्ष है कि मोदी-योगी सरकार ने इसी भ्रष्ट अभिजात वर्ग – जिसमे आप जैसे “कार्यकर्त्ता” एवं सरकारी कर्मी भी सम्मिलित है – का रचनात्मक विनाश कर दिया है।
इस रचनात्मक विनाश के बिना भारत नहीं बदल सकता था। यह विनाश 10 मार्च के बाद पुनः स्पीड पकड़ लेगा।
आप उसी “किताब” वाले वर्ग की तरह राजनीतिक रूप से अनाथ हो जाएंगे क्योकि आपके कुछ दस-बीस लाख वोट की कोई वैल्यू नहीं रहेगी।
क्योकि यह निर्धन एवं पिछड़ा वर्ग का वोट आपसे कई गुना विशाल है।
क्योकि भारत हम से – एवं आप से – भी विशाल है, वृहद है।

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