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भारत में आर्थिक सर्वेक्षण एवं बजट से भरपूर

by अमित सिंघल
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भारत में आर्थिक सर्वेक्षण एवं बजट से भरपूर समाचारो से दूर विश्व में अलग ही गेम चल रहा है। अफ्रीका के कई राष्ट्रों में आर्मी ने चुनी हुई सरकार का सिंहासन पलट दिया।
कुछ माह में माली, चाड, गिनी, सूडान, एवं पिछले सप्ताह बुर्कीना फासो में मिलेटरी ने बंदूक की नोक पर सरकार को सत्ता से हटा दिया। पहली फ़रवरी को गिनी बिसाऊ में भी आर्मी ने सरकार को हटाने का प्रयास किया; लेकिन कुछ समय बाद राष्ट्रपति एमबालो ने कंट्रोल वापस ले लिया।
इनमे से कई देशो में आर्मी ने सिंहासन इसलिए पलट दिया क्योकि सरकार इस्लामिस्ट (न्यू यॉर्क टाइम्स तथा अन्य समाचारपत्रों ने इसी शब्द का प्रयोग किया है) आतंकवाद एवं हिंसा से निपटने में विफल रही थी।
बुर्कीना फासो में पिछले नवंबर में अल क़ाएदा एवं इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने 49 सैनिको को मार दिया था। इनसे निपटने में सरकार की विफलता के कारण आम नागरिको एवं सेना में घोर असंतोष था जिसका उपसंहार राष्ट्रपति कबोरे को सत्ता से हटा कर हुआ।
यही स्थिति माली की है जहाँ चुनी हुई सरकार अल क़ाएदा एवं इस्लामिक स्टेट के आतंक को नहीं रोक पायी और आर्मी ने सत्ता की डोर अपने हाथ में ले ली।
चाड के राष्ट्रपति एक ऐसे ही आक्रमण में मारे गए।
न्यू यॉर्क टाइम्स लिखता है कि हाल के महीनो में सेना द्वारा सत्ता का अधिग्रहण इसलिए हुआ क्योकि अफ्रीका के विशाल क्षेत्र में इस्लामिस्ट और अन्य सशस्त्र समूहों द्वारा बढ़ती हिंसा को रोकने में निर्वाचित सरकारों की विफलता पर आम जनता क्रोधित थी। अतः गिनी-बिसाऊ में सरकार को सत्ता से हटाने की संभावना के प्रयासों को लेकर आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
अगर चुनी हुई सरकार आतंकवाद कंट्रोल नहीं कर सकती तो जनता के भारी असंतोष के कारण आर्मी सरकार का सिंहासन पलट देगी।
सत्ता परिवर्तन का यह भय ही सरकारों को आतंकवाद से कड़ाई से निपटने के लिए विवश करेगा।
कदाचित जनता ने आतंवाद को समाप्त करने के लिए स्वयं कदम उठा लिया है।
मैं ऐसे सभी असंवैधानिक सत्ता परिवर्तन की कड़ी निंदा करता हूँ।
आर्थिक सर्वेक्षण एवं बजट पर लेख अभी प्रतीक्षा कर सकता है।

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