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भारत में IIT जैसे शिक्षण संस्थान विश्व स्तरीय बच्चे देते हैं

by Nitin Tripathi
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भारत में IIT जैसे शिक्षण संस्थान विश्व स्तरीय बच्चे देते हैं – इस लिए नहीं कि उनकी पढ़ाई बहुत अच्छी है. बल्कि इस लिए कि उनमें जो बच्चे जाते हैं वो इतने टैलेंटेड होते हैं – लाखों में एक वाले कि वह अगर बारहवीं के बाद एक जंगल में भी छोड़ दिए जाएँ तो उसे चमन कर देंगे. हक़ीक़त में देखा जाए तो IIT की सुबिधाएँ, इंफ़्रा स्ट्रक्चर, रिसर्च का लेवेल, बजट रेस्ट ओफ़ the developed वर्ल्ड की सी लेवेल यूनिवर्सिटी से भी कम है. IIT को IIT केवल उसके छात्र बनाते हैं, उन्हें विश्व स्तरीय सुविधाएँ मिल जाएँ तो वो क्या से क्या कर दें.
यह हाल IIT का है तो बाक़ी सामान्य कालेजों का स्तर स्वयं समझा जा सकता है. भारत के ठीक ठीक इंजीनियरिंग कालेज का स्तर बाहर के ITI से भी कम होता है, बस इधर बच्चे बेहतर होते हैं, चार साल में जिन्हें दबा कुचल कर विश्व का कुली बना दिया जाता है.
मेडिकल में भी कितनी शर्मनाक बात है कि भारत की पढ़ाई शेष विश्व यहाँ तक कि यूरोप के देशों से भी महँगी है. उस पर भी सीटें इतनी कम हैं कि डोनेशन देना पड़ता है. भारत की डॉक्टर की पढ़ाई के लिए कहा जाता है प्रैक्टिकल इक्स्पोज़र काफ़ी है. हिंदी में इसका अर्थ यह होता है कि शेष विश्व में जितनी पढ़ाई पर बुख़ार नापने की परमीशन होती है उतने में इधर ऑपरेशन थिएटर में भेज दिया जाता है, चूहों बंदर पर इक्स्पेरिमेंट क्यों करना सीधे मनुष्यों पर करो. वजह भी यही है कि डाक्टरों और संसाधनों की कमी. आज भी देश के दो तिहाई डॉक्टर झोला छाप हैं क्योंकि डाक्टरी की पढ़ाई एलीट पीपल जो करोड़ों खर्च कर सकें उनके लिए है या इतने समझदार / दंद फ़ंदी हों कि पचास लाख खर्च कर विदेश से पढ़ा लें.
यूक्रेन में हुई क्राइसिस मौक़ा है सोंचने का कि आख़िर हर साल दसियों हज़ार करोड़ खर्च कर भारत के बच्चे ऐसे देशों में जहां न भाषा अपनी है न पढ़ाई का कोई स्तर – फ़िर भी वहाँ जाते हैं, देश का हज़ारों करोड़ रुपया भी बाहर जाता है.
समय है, नए चश्मे से शिक्षा को देखने का. जैसे नब्बे के दसक में उदारी करण हुआ, बैंक / इंस्योरेंस क्षेत्रों में नियम परिवर्तित हुवे और इन क्षेत्रों में क्रांति हुई, ग्राहकों को बेहतर सुविधा मिली तो यह सेक्टर आकाश छूने लगे, अब समय है ऐसी ही नीति शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनाने की. भाव Amitabh Satyam जी के शब्द और निष्कर्ष हमारे.

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