Home चलचित्र हां , अगर इस फ़ोटो सीक्वेंस को किसी स्त्री की निजता पर हमला मान लिया जाए तो ?

हां , अगर इस फ़ोटो सीक्वेंस को किसी स्त्री की निजता पर हमला मान लिया जाए तो ?

दयानंद पांडेय

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एक्ज़िट पोल पर तो मुझे भी यक़ीन नहीं है। ओपिनियन पोल , एक्ज़िट पोल और रिजल्ट में अकसर विरोधाभास देखा गया है। लेकिन एक्ज़िट पोल के बरक्स देश और उत्तर प्रदेश की जनता पर पक्का यक़ीन है। और बड़ी विनम्रता से कहना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश की जनता एम वाई फैक्टर के बलबूते जंगल राज को अब किसी सूरत नहीं आने देगी। न आने दे रही है अभी। बस एक मुश्किल यह है कि जंगल राज के आशिक़ लोग जनादेश का सम्मान करना नहीं जानते , अपमानित करते रहते हैं , जनता का। उस के जनादेश का।
जनादेश का सम्मान पूरे दिल से करना चाहिए , यह बात भी बहुत प्यार के साथ कहना चाहता हूं। पूरे आदर से करना चाहिए। जनादेश जैसा भी हो , सम्मान करना सीखना होगा , जंगल राज के आशिक़ों को। बाक़ी मनमाफ़िक जनादेश न मिलने से संविधान बचाने और लोकतंत्र बचाने की दुकानदारी भी बंद होनी चाहिए। सेना को बलात्कारी , सुप्रीम कोर्ट को भाजपाई-संघी , चुनाव आयोग को भाजपा आयोग आदि भी जनादेश को बौना बनाना होता है। ऐसी नौटंकी करने के बजाए जनता की नब्ज़ और पसंद समझने की ज़रुरत है। उन्हें जागरुक करने के लिए उन के बीच काम करने की ज़रुरत है।
इस के लिए पेड न्यूज़ के खेतिहर यथा यू ट्यूबर , सोशल मीडिया के मीडियाकरों आदि-इत्यादि की महफ़िल मुफ़ीद नहीं है। नफ़रत और घृणा का माहौल बना कर असहमत लोगों पर घृणा और नफ़रत की ज़हर खुरानी नहीं होनी चाहिए। किसान की बात करना ठीक बात है। पर किसान आंदोलन की दुकानदारी और बात है। लालक़िले और आई टी ओ पर उपद्रव करने , शहर-शहर , शाहीन बाग़ बसा कर , बिरयानी खा कर आज़ादी-आज़ादी का तराना गा कर देश को गृह युद्ध में झोंकने की तरक़ीब से जनता कुढ़ती बहुत है।
बीच कोरोना संकट में तब्लीग़ियों की बदशऊरी के ताबेदारी से भी जनता ख़ुश नहीं होती। सरकार का विरोध लोकतंत्र की ताक़त है पर शकुनि चाल चल कर आप सरकार नहीं बदल सकते। अरुंधती रॉय का यह कहना कि एक आदमी पांच साल में एक बार ही प्रधान मंत्री बने। दुबारा न बने। ऐसी फ़ासिस्ट बात कर सरकार बदलने का ख़्वाब पूरा नहीं होता। नहीं हो सकता। बाक़ी यह फ़ोटो एक्ज़िट पोल की पोल-पट्टी खोलने के लिए रवीश कुमार के प्राइम टाइम के आज एक्ज़िट खोल से तो बहुत बेहतर है। हां , अगर इस फ़ोटो सीक्वेंस को किसी स्त्री की निजता पर हमला मान लिया जाए तो ?

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