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मार्कण्डेय ऋषि द्वारा कही गई रामोपाख्यान

मधुलिका शची

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महाभारत में मार्कण्डेय ऋषि द्वारा कही गई राम कथा जो “रामोपाख्यान” कही जाती है वह बाल्मीकि रामायण से कई जगहों पर भिन्न है।
यहां तक कि कुछ पात्रों के नाम भी भिन्न हैं, घटनाएं भी भिन्नता से मिलती हैं।
अब प्रश्न उनसे है जो कहते हैं कि जो बाल्मीकि रामायण में लिखा गया है मात्र वही सच है ….कमाल की बात तो ये है बड़ा जोर देकर कहते हैं……फिर कहते हैं जो महाभारत भागवत में लिखा है मात्र वही सच है….
पर यहां तो दोनों ग्रंथों में परस्पर भिन्न भिन्न तथ्य हैं…..अब किसकी बात मानेंगे..?
अब यहां तो तुलसी बाबा की ही बात सत्य होती है : हरि अनंत हरि कथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता॥
मैंने अध्ययन किया है लोक में उपस्थित इतिहास का फिर ग्रंथों में उपस्थित इतिहास का तो पता चलता है ग्रंथों में 1000वां अंश भी नहीं लिखा गया । बहुत कुछ छूटा है जो किसी दूसरे ग्रंथ में मिलता है या मिलता ही नही….फिर वह लोक स्थान पर मिलता है ।
किसी भी धर्मिक ग्रंथ में आप यह कहें कि जो ग्रंथ में नहीं है यह कहीं नहीं है तब आप यथार्थ का गला घोंट रहे हैं।
बाद में , महाभारत में पता नहीं किस नंबर के कौन से व्यास ने लिख दिया कि जो महाभारत में नहीं है वह कहीं नहीं है। यह अतिश्योक्ति शायद अंतिम व्यास ने लिखा होगा ….
अतः यदि गहराई से इतिहास या संस्कृति को जानना चाहते हैं तो उनसे जुड़े लोक स्थानों को महत्व दीजिये बहुत कुछ मिलेगा।
इसलिए घुमक्कड़ बनिये, घुमक्कड़ी करिये एक डायरी के साथ।

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