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NDTV का अडानी द्वारा Takeover – पश्चिमी मीडिया और वामपंथी ecosystem का शोर

by Praarabdh Desk
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दुनिया के चौथे अमीर इंसान गौतम अडानी का ग्रुप NDTV को खरीदने जा रहा है. जब से यह ख़बर आयी है… वामपंथी Ecosystem अवाक है.. हतप्रभ है, परेशान है. उन्हें समझ नहीं आ रहा कि यह कैसे हो रहा है….. उनका Free Speech का सबसे बड़ा Idol हुआ करता है NDTV… वो कैसे बिक सकता है… वो भी अडानी को???

जैसे ही ख़बर आयी, वामपंथी ecosystem active हो गया, और दुनिया भर के जानेमने अखबारों और online portals में इस विषय पर, भ्रमित करने वाली खबरें छपने लगी.

पश्चिम के कुछ बड़े मीडिया groups जैसे The Washington Post, BBC, Times Magazine, Bloomberg, Reuters, The Guardian, The Fortune आदि ने इसे Free Speech पर आक्रमण बताया है. इस ecosystem के हिसाब से किसी व्यवसायी को मीडिया house चलाने का अधिकार नहीं है…. अगर कोई ऐसा प्रयत्न भी करता है तो वह गलत है.

लेकिन अगर हम इन्हे के देशों के बड़े बड़े मीडिया ग्रुप को देखें, तो उनमे से अधिकांश बड़े corporates द्वारा खरीदे जा चुके हैं, या control होते हैं.

उदाहरण के लिए…

The Washington Post – यह online अखबार दुनिया के तीसरे सबसे अमीर इंसान और amazon के founder और CEO जेफ बेज़ॉस द्वारा खरीदा जा चुका है.

Los Angeles Times – यह भी अमेरिका का एक बड़ा मीडिया संस्थान है, जिसे चीन-दक्षिण अफ्रीका मूल के सर्जन, बायोसाइंटिस्ट और अरबपति Patrick Soon-Shiong खरीद चुके हैं.

Time Magazine – यह दुनिया की सबसे जानी मानी मैगज़ीन है, और इसका प्रभाव दुनियाभर में देखा जा सकता है. यह बड़े बड़े narrative बनाती है, Times Most Influential people नाम से दुनिया के शक्तिशाली लोगों की लिस्ट भी जारी करती है. इसे Salesforce कंपनी के founder Marc ने खरीद लिया है

Fortune – यह भी दुनिया की सबसे प्रसिद्ध मीडिया house में से एक है. यह दुनिया भर के देशों, अर्थव्यवस्थाओं, शक्तिशाली देशों की list भी बनाते हैं. इसके अलावा आर्थिक मामलो में fortune का नाम बहुत ऊंचा है. लेकिन आपको जानकार झटका लगा सकता है कि Fortune के मालिक एक थाई अरबपति Chatchaval जिरावानों हैं.

The Atlantic – यह भी अमेरिका का बड़ा मीडिया ग्रुप है, जिसके मालिक Apple के भूतपूर्व CEO Steve Jobs और उनका परिवार है

The Economist – यह ब्रिटेन का बहुत बड़ा मीडिया house है.. इनके अखबार मैगज़ीन और online अखबार काफी मशहूर हैं. लेकिन यह मीडिया house भी Rothschild, Agnelli, Cadbury, Schroeder, and Layton परिवारों द्वारा controlled है.

कुलमिलाकर बात यह है, कि पश्चिम देशों के अधिकांश बड़े मीडिया house किसी न किसी Corporate के control में हैं…… लेकिन यह कभी स्वयं पर सवाल नहीं उठाते…

Washington Post को दुःख हो रहा है कि NDTV के साथ अब क्या होगा, उनकी free speech दबा दी जायेगी…… WAPO वाले कभी नहीं बताते हैं कि जेफ बेज़ॉस द्वारा खरीदे जाने के बाद क्या उनकी आवाज़ दबा दी गयी है???

क्या Times के मुख्यप्रष्ठ पर छपने वाले, और उनकी rating में आने वाले लोग या देश किसी भी प्रकार के Corporate Influence से दूर हैं??

क्या Fortune जैसी मैगज़ीन, जो किसी ख़ास कंपनी के द्वारा controlled है…. क्या उसके Views और Analysis स्वतंत्र होते होंगे??

सवाल तो हमें भी उठाने चाहिए ना…. ऐसा तो है नहीं कि सारे अधिकार उन्ही के हैं??

पश्चिमी मीडिया और वामपंथी ecosystem का एक ही उद्देश्य है…. भारत की सरकार, भारत के Corporate को बदनाम करना.

पहले यह Tata को कोसते थे…. फिर अम्बानी को उल्टा पुल्टा बोलते थे… पिछले 2-3 सालों में अडानी ने दुनिया के Top-5 अमीर लोगों की list में जगह बना ली है… वहीं एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में अडानी ग्रुप ही है जो चीन की विस्तारवादी नीतियों के सामने पूरी ताकत से खड़ा है….. यही कारण है कि अब अडानी इनके निशाने पर है… और आगे हमले और तेज होंगे.

आप कह सकते हैं कि मुझे अडानी से क्या लगाव है….. मुझे तो भारत के हर corporate से लगाव है…… अम्बानी, अडानी, टाटा, बिरला, मोदी, गोदरेज…. List बहुत लम्बी है. मैं इनका सम्मान करता हूँ, क्यूंकि यह सब मिलकर करोड़ों भारतीयों को नौकरी देते हैं… देश की अर्थव्यवस्था को आगे ले जाते हैं.

कुछ लोग कह सकते हैं कि अम्बानी अडानी के तौर तरीके सही नहीं है… इनकी नीतियाँ सही नहीं…. उनसे यही कहना है कि पूरी दुनिया में एक कंपनी बता दो जो एकदम साफ सुथरी हो.

Apple, microsoft, amazon, google, lockheed martin, boeing, Citibank…. कोई भी कंपनी उठा लो…. काले पन्ने सभी के इतिहास में हैं… ऐसे में इन पश्चिमी experts और वामपंथी ecosystem को सिर्फ भारतीय corporates पर हमला करने का कोई अधिकार नहीं…. और अगर ये करेंगे तो हम भी प्रतिकार करेंगे.

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