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केजरीवाल और टीम खंड खंड के मुखिया

by ज़ोया मंसूरी
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टीम खंड खंड के मुखिया पंडित धनंजय को जब गुजरात में उनकी कम्पनी ने पिछवाड़ा पर लात मारकर भगा दिया तो ये देवरिया में अपने घर महेन आ गए।
टीम खंड खंड में आपसी मनमुटाव के कारण चंदा आना बंद हो गया था तो शाम के दारू की बेवस्था कठिन हो गया था तो फिर ये तय हुआ कि टीम खंड खंड नाम से यूट्यूब चैनल बनाया जाए और ऐसे मुद्दों को उठाया जाए जिसमे लोगों को फंसाकर ब्लैकमेल करके पैसा बनाया जाए।
आने वाले सम्भावित धन में कम हिस्सेदार रहे इसलिए टीम के मुख्य निर्माता को समूह के निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन उसमे ये सफल नहीं हुए। उल्टा मुख्य निर्माता ने ही इनके पिछवाड़े में लात मार कर गुर्गों सहित मुख्य टीम से बाहर कर दिया। इसके बाद इन्होंने अपने खास गुर्गों के साथ मिलर चार झंडों वाली एक नई टीम बना ली।
संयोग से उसी समय टीम से जुड़े एक लडके जो कि पंडित जी पर बहोत भरोसा करता था, के भाई की वाइफ की डिलीवरी देवरिया सदर अस्पताल में हुई।
खुशी में उसने पंडित जी को फोन करके बताया।
पंडित जी रात 11 बजे दारू के फुल नशे में देवरिया सदर अस्पताल पहुंचे और जूते पहनकर ही बच्चों वाले आईसीयू वार्ड में जबरदस्ती घुस गए। वहां एक नर्स सोई हुई थी। पंडित जी को लगा पत्रकारिता चमकाने और पैसा बनाने का ये बढ़िया मौका है तो तुरन्त ही सोई हुई नर्स का वीडियो बनाने लगे ओर वो भी फेसबुक लाइव।
टीम से जुड़े लोगों ने वो वीडियो देखा भी होगा जो कि थोड़ी देर बार इनकी गांव पर लठ्ठ बजा कर डिलीट करवा दिया गया था। खैर जब उस नर्स ने विरोध किया तो ये उससे बदतमीजी करने लगे। शोर सुनकर पूरा हॉस्पिटल का स्टाफ आ गया और पुलिस को बुला लिया गया।
पुलिस ने जब इनसे बात की तो दारू के नशे में ये खुद को पत्रकार बताते हुए पुलिस से भी उलझने लगे। पुलिस इनको वही गिरा गिरा कर बल भर पेला।
इतना पेला के ये वहीं जमीन पर छितरा गए।
टीम खंड खंड का वो लड़का जिसकी वाइफ की डिलीवरी हुई थी वो हाथ पांव जोड़कर किसी तरह से इनको बचाया। पुलिस ने फेसबुक से तुरन्त ही इनका वो लाईव वीडियो डिलिट करवाकर इनको उठवाकर अपने जिप्सी में फेक दिया और उस लड़के को भी बैठाकर थाने लेकर चली गई।
रात भर ये हवालात में रहे, लोगों को फोन करते रहे। सुबह कोई आया तो माफी मांगकर और ले देकर छूट कर गए।
और तो और इस व्यक्ति का स्वार्थीपन देखिये की…
वो लडका जो इनके साथ था, निर्दोष था, जिसकी भाई की वाईफ की डिलीवरी हुई थी, उसे वही हवालात में अकेले छोड़ दिया और खुद सिर्फ अपनी सिफारिश लगवा के अकेले निकल लिए।
बाद में किसी तरह वो भी छूट कर हास्पिटल गया और हास्पिटल में माफीनामा लिखकर हाथ पैर जोड़कर किसी तरह अपने पेशेंट को बाहर करने से बचाया।
अब जनता खुद डिसाइड करे जो मतलबी आदमी अपनी पत्रकारिता चमकाने के चक्कर मे अपने टीम के खास सदस्य को ओर उसके परिवार को ही मुश्किलों में डाल के अकेला छोड़ के पतली गली से कट जाए वो किसी का क्या घण्टा साथ देगा।
स्त्रोत – सदर हॉस्पिटल देवरिया स्टाफ के एक भरोसेमंद मित्र। केजरीवाल लोग चाहें तो सदर हॉस्पिटल जाकर घटना सत्यता परख सकते हैं।

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