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मानव-शरीर बेहद व्यवस्थित, कल्पना से परे

विवेक उमराव

by Umrao Vivek Samajik Yayavar
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कुछ लोग कहते है की उनका वजन कम है, एक्सरसाइज करते हैं, जिम जाते हैं, बाजार का ऊटपटांग नहीं खाते हैं, इंटरमिट्टेंट फास्टिंग करते हैं; लेकिन डायबिटीज खतम नहीं होती है, तोंद गायब नहीं होती है। मानव-शरीर बेहद व्यवस्थित, कल्पना से परे अत्यधिक स्मार्ट मशीन है, इसकी कोशिकाएं तक भी अपने आप में बहुत ही अधिक चतुर मनीषी प्रज्ञ मशीनें हैं। गहराई पर जाने पर तकनीकी शब्दावली का प्रयोग करना पड़ेगा, जिसका कोई खास मतलब नहीं

हमको यह लगता है कि एक्सरसाइज करने से फैट बर्न होता है, कम खाने से चर्बी घटती है। जबकि यह बिलकुल जरूरी नहीं कि एक्सरसाइज करने में प्रयोग की जाने वाली ऊर्जा चर्बी से ही ली जाए, मतलब शरीर फैट ही बर्न करे, सुगर को बर्न कर सकता है। शरीर ऊर्जा के लिए चर्बी या सुगर का प्रयोग करेगा यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है। हममें से अधिकतर लोग केवल कैलोरी पर ध्यान देते हैं, मानो शरीर का सब-कुछ विशेषकर शरीर का वजन घटना इत्यादि कैलोरी पर ही निर्भर करता हो। जबकि कैलोरी ऊर्जा को मापने की महज एक ईकाई होती है।
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शरीर ऊर्जा के लिए चर्बी बर्न करेगा या सुगर, यह निर्भर करता है कि आपका हृदय कोई कार्य करते समय या एक्सरसाइज करते समय कितना पंप कर रहा है, मतलब हृदय गति कितनी है। सुगर के बारे में भी हम मिथकों में जीते हैं, हम शक्कर/चीनी को सुगर मानते हैं लेकिन गुड़ राब खांड या कृत्रिम-स्वीटनर इत्यादि को नहीं। जबकि सुगर का मतलब केवल शक्कर/चीनी नहीं होता है, सुगर बहुत सारे प्रकारों में पाई जाती है, सब्जियों फलो व अनाजों में जो कार्बोहाईड्रेट होता है स्टार्च होता है, को सुगर का ही प्रकार माना जाए। यहां तक कि प्रोटीन को भी मानव-शरीर सुगर में कन्वर्ट कर लेता है।
मुख्यतः तीन प्रकार से एक्सरसाइज होती है।
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एक — जिसको करते हुए हृदय गति संतुलित रहती है कि आपकी सांस धौकनी की तरह नहीं चलती है, आपको मुंह से सांस लेने की जरूरत नहीं पड़ती है, आप हाफंते नहीं हैं, बिना हांफे पूरे वाक्य को बोल सकते हैं। इस प्रकार की एक्सरसाइज को करने में शरीर फैट को बर्न करके ऊर्जा प्राप्त करने को प्राथमिकता देता है, या यूं कहें कि फैट को ही बर्न करके ऊर्जा लेता है। ऐसी एक्सरसाइज को आप एक दिन में या एक बार में ही कई-कई घंटे तक करते रह सकते हैं।
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दूसरा — जिसको करते हुए हृदय की गति अधिक रहती है, सांस फूलती है, तेज-तेज से सांस लेनी पड़ती है। इसमें शरीर मुख्यतः सुगर को बर्न करके ऊर्जा लेता है, छोटा-अंश फैट-बर्न का होता है। ऐसी एक्सरसाइज को दिन में 40-50 मिनट से अधिक नहीं करना चाहिए।
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तीसरा — जिसको करते हुए अचानक हृदय गति को हृदय की अधिकतम क्षमता तक बढ़ाया जाता है। इसमें शरीर लगभग पूरी ऊर्जा सुगर को बर्न करते हुए लेता है। ऐसी एक्सरसाइज को दिन में कुछ मिनट से अधिक नहीं करना चाहिए।
यदि शरीर फैट बर्न करके ऊर्जा लेता है तो यह अच्छी बात है, शरीर की चर्बी कम होती है, यदि भोजन को पर्याप्त मात्रा में लिया जाता रहे और फैट-बर्न करने वाली एक्सरसाइज की जाएं तो यह शरीर के लिए सबसे बेहतर होता है। इस तरह की दिनचर्या करने में इंटरमिट्टेंट-फास्टिंग भी करने से बहुत ही अधिक लाभ होता है, इंटरमिट्टेंट-फास्टिंग का असल मजा व लाभ भी तभी ही है।
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यदि शरीर सुगर बर्न करके ऊर्जा लेता है तो भूख अधिक लगती है यदि व्यक्ति जिद करके फास्ट रखता है या इंटरमिट्टेंट-फास्टिंग करता है, तो उसका शरीर प्रोटीन को भी सुगर में कन्वर्ट करता है।
ज्यों ही शरीर सुगर का निर्माण करता है सुगर का प्रयोग करता है, त्यों ही इंसुलिन एक्टिवेट हो जाता है। इंसुलिन वह हारमोन है जो फैट को संग्रहीत करने का काम करता है। शरीर जितनी बार या जितना अधिक इंसुलिन को एक्टिवेट करता है, शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन-रेसिस्टेंस की ओर बढ़ने लगती हैं। इंसुलिन-रेसिस्टेंस के कारण ही शरीर को अनेक गंभीर बीमारियां होती चली जाती हैं। शरीर चाहे ऐडेड-सुगर से सुगर ले या फल सब्जी अनाज से ले या प्रोटीन को सुगर में कन्वर्ट करके ले, सुगर के किसी भी प्रकार या फार्म में आते ही इंसुलिन-एक्टिवेट हो जाता है।

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