Home नया 1438 करोड़ कहां गए? चुनाव से पहले निकला गोमती रिवर फ्रंट ‘घोटाले’ का जिन्न

1438 करोड़ कहां गए? चुनाव से पहले निकला गोमती रिवर फ्रंट ‘घोटाले’ का जिन्न

by Praarabdh Desk
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सपा सरकार ने इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताया था जिसमें करीब 1438 करोड़ खर्च हुए थे, हालांकि इस पर काम शुरू होने के बाद से ही कई बार घोटाले के आरोप लगते रहे हैं। सीबीआई ने गोमती रिवर फ्रंट घोटाला मामले में सोमवार को 40 जगहों पर छापेमारी की। इनमें बीजेपी विधायक के भाई अखिलेश सिंह के गोरखपुर और लखनऊ स्थित ठिकाने भी शामिल हैं।

सीबीआई की कार्रवाई परियोजना के 407 करोड़ रुपये कथित घोटाले में हुई। सिंचाई विभाग के करीब 407 करोड़ रुपये लागत के गोमती रिवर चैनलाइजेशन प्रोजेक्ट और गोमती रिवर फ्रंट डिवलेपमेंट प्रोजेक्ट में अनियमितताएं और अवैध गतिविधियां सामने आई थीं। लखनऊ के गोमती नगर पुलिस थाने में भी इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है।

सीबीआई ने यूपी के 13 जिलों में की कार्रवाई
सीबीआई लखनऊ की ऐंटी करप्शन ब्रांच ने सोमवार को नोएडा और गाजियाबाद समेत यूपी के 13 जिलों के अलावा राजस्थान के अलवर और पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी छापेमारी की। इससे पहले सीबीआई ने सिंचाई विभाग के 16 इंजीनियर्स समेत 189 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की। ये मामले अधिकारियों, प्राइवेट लोगों, फर्मों, कंपनियों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं। छापेमारी के दौरान दो लोगों के यहां से पांच-पांच लाख से अधिक कैश मिले। इसके अलावा सभी जगहों से बड़ी संख्या में दस्तावेज, कीमती सामान, प्रॉपर्टी और निवेश से जुड़े कागजात भी बरामद हुए हैं।

दो चरणों में सीबीआई की पड़ताल
अभी तक इस मामले में 6 लोगों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। सीबीआई पूरे मामले की दो चरणों में पड़ताल कर रही है। एक जांच 1031 करोड़ के 12 कामों से जुड़ी हुई है। दूसरी जांच 407 करोड़ के 661 कामों से जुड़ी है। दूसरे मामले की पड़ताल में सामने आया है कि टेंडर देने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया गया। आरोप है कि इंजीनियरों ने निजी व्यक्तियों, फर्मों और उनकी कंपनियों से मिलीभगत कर फर्मों के फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। ठेकों के लिए विज्ञापन या सूचनाएं नहीं दीं, ताकि अपनों को ठेके दिए जा सकें।

लखनऊ में 25 जगह छापेमारी
यूपी के गोरखपुर के बीजेपी विधायक राकेश सिंह बघेल के छोटे भाई अखिलेश सिंह बघेल के लखनऊ के स्थित घर और दफ्तर पर भी छापेमारी की गई है। इसके अलावा, लखनऊ में कुल 25 जगहों पर सीबीआई ने छापे मारे। वहीं, मामले में एक आरोपी की कोरोना से मौत हो चुकी है। सिंचाई विभाग के तत्कालीन प्रिंसिपल असिस्टेंट लखनऊ डिविजन, शारदा नहर नारायण दास यादव की आरोपी बनाया गया था। उनकी कोरोना से मौत हो गई। इसलिए उन्हें एफआईआर में नामजद नहीं किया गया है। हालांकि अनियमितताओं की जांच में उनकी भूमिका सामने आई थी।

रूप सिंह यादव समेत दो हो चुके हैं गिरफ्तार
गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में सीबीआई ने केस दर्ज करने के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर 20 नवंबर 2020 को सिंचाई विभाग के पूर्व अधीक्षण अभियंता रूप सिंह यादव और क्लर्क राजकुमार यादव को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 17 फरवरी 2021 को सीबीआई ने रूप सिंह यादव समेत छह लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें जूनियर क्लर्क राजकुमार यादव, केके स्पन पाइप प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशक हिमांशु गुप्ता, निदेशक कविश गुप्ता और मेसर्स ब्रांड ईगल्स लांगजियान जेवी कंपनी के सीनियर एडवाइजर बद्री श्रेष्ठ भी आरोपी बनाए गए थे।

अधिकारियों पर क्या हैं आरोप?
इन पर आरोप है कि इन सभी ने मिलीभगत कर अयोग्य निजी फर्म को ट्रंक ड्रेन को इंटरसेप्ट करने का काम दिया था। सभी छह आरोपियों ने ही ट्रंक ड्रेन इंटरसेप्ट का कार्य हासिल करने के लिए साजिश रची थी। रूप सिंह यादव ने अयोग्य फर्म केके स्पन प्राइवेट लिमिटेड को यह काम देने के लिए निविदा की तारीख को दो बार बढ़ाया। निविदा में तीन प्रतिभागियों का कोरम पूरा करने के लिए आरोपियों की ओर से एक अन्य निजी फर्म के जाली दस्तावेज तैयार किए गए। काम के लिए हुए एग्रीमेंट को आरोपितों द्वारा अनुमोदन किया गया और उनको बजट के बिना यह काम सौंप दिया गया इसके अलावा एल-2 फर्म की बैंक गारंटी को भी एल-1 कंपनी के बैंक खाते से तैयार करके जमा कराया गया।

ईडी भी कर चुकी है कार्रवाई

ईडी भी इस मामले की जांच कर रही है। ईडी रूप सिंह यादव समेत कई आरोपियों की संपत्तियों को अटैच भी कर चुकी है। जुलाई 2019 में ईडी ने तीन अभियुक्त इंजीनियर रूप सिंह यादव, अनिल यादव और एसएन शर्मा की लगभग एक करोड़ की मूल्य की अचल संपत्तियों को मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत अटैच किया था। इन संपत्तियों में नोएडा में एक भूखंड, लखनऊ में तीन भूखंड और गाजियाबाद में एक फ्लैट शामिल है।

फ्रांस से बिना अनुमति के मंगवा लिया महंगा फव्वारा
सिंचाई विभाग के इंजिनियरों ने ठेकों में खूब मनमानी की। सीबीआई की जांच में सामने आया है कि अधीक्षण अभियंता रूप सिंह यादव और एसएन शर्मा ने मिलीभगत कर खुद ही फ्रांस की कंपनी को म्यूजिकल फव्वारा लगाने का काम दे दिया। चीफ इंजिनियर अखिल रमन, अधीक्षण अभियंता एसएन शर्मा और रूप सिंह यादव ने बिना किसी अधिकार के अपने पद का दुरुपयोग किया। रूप सिंह ने सीधे फ्रांस की कंपनी मेसर्स एक्वॉटिक शो को पत्र लिख दिया और उन्हें टेंडर में हिस्सा लेने के लिए लखनऊ बुलाया।

इस टेंडर में भी लोएस्ट-वन वगैरह को लेकर कोई निविदा प्रकाशित नहीं की गई। उन्हें महज कोटेशन के आधार पर काम दे दिया गया। नियमत: इसे शासन स्तर पर टेंडर निकाल कर खरीद की जानी चाहिए थी, ताकि अन्य अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी टेंडर में हिस्सा ले पातीं। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सीबीआई ने अपनी एफआईआर में फ्रांस की कंपनी एक्वॉटिक शो को भी नामजद किया है।

कहां खर्च हुए 1438 करोड़ रुपये?
गोमती रिवर फ्रंट के लिए करीब 1438 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं हालांकि बावजूद इसके गोमती के किनारों और नदी की सफाई का काम अधूरा ही रह गया। सिंचाई विभाग ने यह परियोजना गोमती नदी को केंद्रित कर तैयार की थी। सबसे बड़ा काम गोमती में गिरने वाले गंदे पानी को रोकना था। इसके लिए नदी के दोनों किनारों पर ट्रंक सीवर लाइन डालने का काम शुरू हुआ था। शुरुआती बजट 270 करोड़ रुपये स्वीकृत हुआ लेकिन बाद में इंजीनियरों और अधिकारियों ने इस परियोजना ने अपना ध्यान हटा लिया। आज भी 37 नालों का गंदा पानी गोमती नदी में गिर रहा है।

गोमती रिवर फ्रंट घोटाला एक नजर में…
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कुर्सी संभालने के बाद 27 मार्च को गोमती रिवर फ्रंट का दौरा किया।
एक अप्रैल को रिवर फ्रंट घोटाले की जांच के लिए रिटायर जस्टिस आलोक सिंह की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया।
समिति ने 45 दिन के बाद 16 मई को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
इसके बाद समिति की रिपोर्ट में दोषी पाए गए लोगों पर क्या कार्रवाई की जाए इसके लिए नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को जिम्मेदारी सौंपी गई।
सुरेश खन्ना की रिपोर्ट आने के बाद सिंचाई विभाग की तरफ से 19 जून को गोमती नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। इसमें रिटायर मुख्य अभियंता गुलेश चंद्र, तत्कालीन मुख्य अभियंता एसएन शर्मा, काजिम अली, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता शिव मंगल यादव, कमलेश्वर सिंह, रूप सिंह यादव और अधिशाषी अभियंता सुरेन्द्र यादव को नामजद किया गया।
20 जुलाई 2017 को मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश केंद्र को भेजी गई।
30 नवंबर 2017 को सीबीआई लखनऊ ने इस मामले में पीई दर्ज कर जांच शुरू की।
इस मामले में ईडी भी आरोपियों के खिलाफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच कर रही है।
24 जनवरी 2019 को ईडी ने इस मामले में लखनऊ, नोएडा व गाजियाबाद के नौ ठिकानों पर छापेमारी की थी ये मिली थी गड़बड़ियां।

बजट बढ़ाया।
पर्यावरण की एनओसी नहीं ली।
नियम व मानक के विरुद्ध टेंडर। गोमती की सफाई से ज्यादा सौंदर्यीकरण पर जोर।
डायाफ्राम वॉल से पर्यावरण को नुकसान।
प्रोजेक्ट के नाम पर विदेश यात्राएं।

 

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