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सैफई परिवार ने समाज को जड़बुद्धि बना दिया।

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सैफई परिवार ने समाज को जड़बुद्धि बना दिया।

 

उत्तर प्रदेश का एक गाँव जिसमे एक बहुत नामी उत्तर प्रदेश केसरी पहलवान रहते हैं … उनका अखाड़ा भी बहुत नामी था, इस अखाड़े से निकल के स्पोर्ट्स कोटा से अनेकों ने नौकरी पाई रेलवे, बिजली विभाग, ट्रासंपोर्ट, पुलिस, फौज और न जाने कहाँ कहाँ … मैंने देखा था बचपन में कि केवल अपने ही नहीं बल्कि बगल गाँवों से लोग आते थे इस अखाड़े पर रियाज करने … ब्राह्मण, कोइरी, धोबी, नाइ, तेली व अन्य जात के लोग और आधा जनता यादव हुआ करती थी .. सब गुरु जी के पैर छूते रियाज करते, लड़ते और दूध, ठंडाई, बादाम मुनक्के खाते … कुछ भी गलत करने पर गुरु जी बोरा भर गरियाते थे … पास के एक गाँव के एक ही घर के 2 – 3 आते थे, यादव परिवार था और उनको खूब गाली पड़ती थी, पहलवान भी जबरदस्त थे … हमने पुछा कि ऐसी छोटी गलती करके काहे गाली खाते हैं … वो बोले कि जिस दिन गुरु जी का गाली नहीं मिलता, लगता है आशीर्वाद नहीं मिला और अगर किसी को दो हाथ दे दें तो उसको लगता था आज तर गया …. सब कुछ सही चल रहा था … घर में कोई काम काज हो तो यादव लोगों के यहाँ से दूध दही का अम्बर लग जाता था, अन्य सभी सारा काम संभाल लेते थे और सब कैसे निबट गया पता ही नहीं चलता था … ऐसा नहीं है कि ये केवल गुरु जी के यहाँ ही होता था … अखाड़े से सम्बंधित किसी के घर का हो, सब आपस में ऐसे ही सहयोग करते थे .. एक बार एक बहुत बड़ा बन्दर गाँव में आया और उत्पात ऐसा कि घर की खपड़े वाली छतें तोड़ देता, फसल, फल सब बर्बाद … उसको लोग लाठी डण्डा पटक के और भाला दिखा के भगाया करते थे, भाला देख के भाग जाता था …. एक दिन पेंड़ पर से वो एक पहलवान के ऊपर कूद गया जिसके हाथ में भाला था और ठीक भाले के ऊपर आकर गिरा और मर गया …. सबने मिलकर उसका अंतिम संस्कार किया, पूजा आदि हुआ और एक बजरंग बलि का मन्दिर बना और उसमे इस बन्दर की फोटो भी लगी ….
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कुल मिलाकर सम्पूर्ण सौहार्दयपूर्वक और धार्मिक वातावरण था गाँव और अखाड़े का …
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फिर आ गए V P Singh और मुलायम … वीपी ने सबको उसका जात बताया और काफी को आरक्षण के अंदर लाए, जनरल भी एक तरफ हो गए … मुलायम मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने MY चला दिया … सारा दुराव गाँव और अखाड़े में भी दिखाई देता था … अखाड़े में लोग कम हो गए … बगल के यादव बहुल गाँव में एक अखाड़ा बना, अन्य गावों में अन्य जात के या फिर बहुतों ने छोड़ दिया पहलवानी ….
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एक बार एक दंगल में गुरु जी के पहलवान को यादव पहलवान ने हरा दिया … जोश में आकर उस पहलवान ने गालियों के बौछार के साथ सीधे गुरु जी को अखाड़े में आने की चुनौती दे डाली … उस पहलवान के ट्रेनर जो कभी गुरु जी के चेले थे और गालियों को प्रसाद समझते थे उन्होंने अपने पहलवान को कुछ नहीं बोला … इधर और उधर के ग्रुप में इस पर धक्का मुक्की चालू हो गयी .. गुरु जी ने अपने पहलवानों को डाँटा और लेकर आ वापस गए … उसके दो चार दिन के अंदर अखाड़ा पाट दिया गया और पहलवानी बंद कर दिया गया ..
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एक रात गाँव में tubewell के पानी से खेत सींचने को लेकर भोर भोर में बवाल हो गया .. नंबर था एक पण्डित जी का लेकिन यादव जी लोग अड़ गए कि पानी तो उनके यहाँ जाएगा … पण्डित जी के जो दो लड़के सिंचाई के लिए गए थे, दोनों छुट्टी पर आए फौजी थे, एक BSF से और एक थल सेना में मेडिकल से … यादव जी के यहाँ UPP के सिपाही थे … भोर भोर में पूरा यादव घराना मिलकर दोनों को घेर लिया और बहुत मारा … इतना मारा कि गोरखपुर सदर हस्पताल से BHU के ICU होते हुए हुए कमाण्ड हॉस्पिटल जाना पड़ा … महीनों के उपचार के बाद जान बची और ६ माह या उसके बाद ही सर्विस पर लौट सके …
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पिटाई का मामला थाना पहुँचा था जहाँ पहले तो रिपोर्ट ही नहीं लिखी गई, लोकल विधायक यादव और कैबिनेट मंत्री , थाना यादव, मुख्यम्नत्री यादव … जब मामला फौजी से सम्बंधित निकला तो थाने पर मार पीट का FIR हो गया .. कोई arrest तक नहीं हुआ … इस मामले के पहले यादव जी लोग कुछ कोइरी अन्य को भी पीट चुके थे .. इसके बाद पूरा पण्डितों का नंबर लगाया था …. 70 – 80 पण्डित का घर और 10 – 12 यादव का घर होने से जो वातावरण बन चुका था उससे भूतों का गाँव लगता था … इसके देखते हुए यादव जी लोगों ने गाँव के अंदर के मकान छोड़कर खेतों में मड़ई डाल के रहना चालू किया … अब सबके गाँव बाहर पक्के घर बन गए हैं …. इस बार गाँव के बीच घूमने गए तो देखा कि यादव जी लोगों का पुराना घर उजाड़ बियाबान बना हुआ है, और वर्षों से वहाँ कोई नहीं रहता …
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चूँकि गाँव है तो आमने सामने आते जाते मिलने पर साफ साफ दिखने वाला नकली हेलो हाय हो जाता है लेकिन 1990 के पहले वाली बात पूरी तरह समाप्त है … गाँव के अन्दर किसी शादी विवाह आदि जैसे कार्यक्रम होने पर आते जाते हैं लेकिन दिखावे के 5 – 10 मिनट …
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अभी गुरु जी ने एक भव्य भागवत कथा कराई .. एक दो बार 5 मिनट के लिए यादव लोगों में से कोई आया लेकिन अधिकतर नहीं आए … भोज वाले दिन मैंने किसी को नहीं देखा … आस पास के गाँव से लोग आए लेकिन गुरु जी के पूरे यादव चेलहटी में से कोई नहीं आया … केवल एक जो हमारे साथ विद्यालय में पढ़ा था वो आया और आधा घण्टा रहकर भोजन करके चला गया …
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तो ये है सैफई परिवार की कमाई …. पहलवान यादव लड़के अब लठैत बन चुके हैं … पढ़ाई लिखाई के जगह गुण्डई का महत्त्व अधिक है … बोली में आवारापन और व्यवहार में मूर्खपना .. ये सब सैफई परिवार ने अच्छे से बाँट दिया है ….
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ऐसी सच्ची कहानियाँ उप्र के अनेकों गाँव में मिल जाएगी जहाँ सैफई परिवार ने पीढ़ियों को बर्बाद कर दिया है, उसका परिणाम ये आगे देखेंगे … जब पढ़ाई-लिखाई व्यवसाय में पिछड़ते जाएँगे … जिसे एकमुश्त वोट के दम पर सैफई परिवार कूद रहा है वो एन समय रहते इनको छोड़ के भाग जाएगा … सैफई परिवार ने पूरे एक वर्ग को दिमागी रूप से जड़ बुद्धि बना दिया है …
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note: जो सैफई परिवार के चक्कर में न पड़कर अपने काम से काम रखते हैं और सामजिक रूप से जागृत हैं उनको छोड़कर जो केवल इस परिवार के भलाई को समर्पित हैं वो पोस्ट के पात्र हैं …

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