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विश्व में मुख्यतः चार प्रकार के वनस्पति तेलों का उपयोग होता है

सुमंत विद्वांस

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विश्व में मुख्यतः चार प्रकार के वनस्पति तेलों का उपयोग होता है: पाम ऑइल, सूरजमुखी, सोयाबीन और कनोला तेल।
इन चारों में से पाम ऑइल की खपत विश्व में सबसे अधिक है और इसकी 90% आपूर्ति केवल दो देशों के भरोसे है – इंडोनेशिया 60% और मलेशिया 30%। ये पाम ऑइल का निर्यात करने वाले सबसे बड़े देश हैं।
आप शायद सोचेंगे कि इससे हमें क्या? हम तो पाम ऑइल का उपयोग करते नहीं!
तो जान लीजिए कि पूरी दुनिया में भारत ही पाम ऑइल खरीदने वाला सबसे बड़ा देश है।
हम जितना वनस्पति तेल अन्य देशों से खरीदते हैं, उसमें से 60% हिस्सा केवल पाम ऑइल का ही है। उसके बाद सोयाबीन का हिस्सा 25 प्रतिशत और फिर सूरजमुखी का 12 प्रतिशत है।
लेकिन भारत में अधिकांश लोगों की रसोई में तो पाम ऑइल से भोजन नहीं पकाया जाता। तो फिर इतने सारे पाम ऑइल की भारत को जरूरत क्या है?
आप अपने दैनिक जीवन में जिन वस्तुओं का उपयोग करते होंगे, उनमें से अधिकतर वस्तुओं में पाम ऑइल का उपयोग होता है। बिस्किट, चॉकलेट, केक, साबुन, शैंपू, प्रोसेस्ड फूड, नूडल्स जैसी ढेरों चीजों में पाम ऑइल है।
अब तक इस पूरी कहानी में रूस या यूक्रेन का मैंने कोई उल्लेख नहीं किया है। लेकिन अगर मैं कहूं कि रूस और यूक्रेन के युद्ध के कारण इंडोनेशिया ने पाम ऑइल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था, तो क्या आपको यह बात तार्किक लगेगी?
रूस और यूक्रेन की लड़ाई का इंडोनेशिया से क्या संबंध है? इसे समझने के लिए हमें अन्य तीन वनस्पति तेलों के बाजार को भी समझना पड़ेगा।
सूरजमुखी के तेल का सबसे बड़ा निर्यातक देश यूक्रेन है और दूसरा बड़ा निर्यातक रूस है। विश्व में सूरजमुखी के तेल का लगभग 70% हिस्सा इन दो देशों से ही आता है।
जब रूस ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया, तो यूक्रेन की सरकार ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी और वहां से होने वाला तेल का निर्यात भी बंद हो गया। दूसरी ओर अमरीका व कुछ अन्य देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए, इसलिए वहां से होने वाली बिक्री में भी कमी आई।
अगला तेल है सोयाबीन, जिसका सबसे बड़ा उत्पादक अर्जेंटीना है। वहां खराब मौसम के कारण सोयाबीन की फसल बिगड़ गई, जिससे उत्पादन में गिरावट आई। उसी प्रकार कनोला ऑइल के सबसे बड़े उत्पादक देश कनाडा में पिछले वर्ष सूखा पड़ा, जिससे इसका उत्पादन भी प्रभावित हुआ।
इसका सीधा अर्थ यह था कि पूरी दुनिया में पाम ऑइल की मांग बढ़ गई और उतनी आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। मलेशिया में इसका उत्पादन भी कम हो गया था क्योंकि वहां जिन श्रमिकों के भरोसे यह काम चलता है, उनमें बहुत बड़ी संख्या भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश से गए मजदूरों की थी, जो कोविड काल में अपने देश वापस चले गए थे और 2022 तक भी मलेशिया वापस नहीं लौटे थे।
इन सब बातों के कारण पूरे विश्व में पाम ऑइल की आपूर्ति करने का सारा बोझ इंडोनेशिया पर आ गया। वहां से निर्यात में भारी वृद्धि हुई और वहां का लगभग पूरा पाम ऑइल विदेश जाने लगा।
इसका परिणाम यह हुआ कि इंडोनेशिया के लोगों को अपने उपयोग के लिए ही पाम ऑइल मिलना कठिन होने लगा और उसकी कीमत बढ़ने लगी। इंडोनेशिया में पाम ऑइल घर-घर में उपयोग किया जाता है, इसलिए वहां के करोड़ों लोगों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा। इस स्थिति से निपटने के लिए अप्रैल 2022 में इंडोनेशिया सरकार ने पाम ऑइल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया।
इसका सबसे ज्यादा झटका भारत को लगा क्योंकि वनस्पति तेलों की हमारी कुल खपत का 60% हिस्सा पाम ऑइल ही है। इंडोनेशिया से निर्यात बंद होने की खबर आते ही भारत में ब्रिटानिया, हिंदुस्तान लीवर जैसी कई बड़ी कंपनियों के शेयर तेजी से गिरे क्योंकि इन कंपनियों के अधिकांश उत्पादों में पाम ऑइल का उपयोग होता है। अब स्वाभाविक है कि अगर कंपनी को कच्चा माल महंगी कीमत पर मिलेगा, तो आपके लिए भी तेल, साबुन, शैंपू, बिस्किट, चॉकलेट जैसी चीजों की महंगाई भी बढ़ेगी।
फिर लगभग एक माह बाद घरेलू आपूर्ति ठीक हो जाने पर इंडोनेशिया ने निर्यात का प्रतिबंध हटा दिया। यद्यपि यह भी सच है कि वहां के किसानों और निर्यातकों ने भी इसके लिए सरकार पर दबाव बनाया था क्योंकि इससे उनका नुकसान हो रहा था।
यह पूरा उदाहरण मैंने इतने विस्तार में इसलिए बताया क्योंकि आज भी भारत में कई लोग गर्व से बताते हैं कि उन्हें राजनीति से या दुनिया भर की घटनाओं से कोई सरोकार नहीं है और वे ऐसी बेकार बातों से बिलकुल दूर रहते हैं। बहुत पढ़े लिखे या धनवान लोग केवल अपने परिवार और आमोद प्रमोद तक सीमित रहते हैं और गरीबी में जीने वाले लोग केवल अपनी दाल रोटी के बारे में सोचते हैं या महंगाई के लिए किसी न किसी को कोसते हैं। यह भी संभव है कि आप भी उनमें से एक हों!
लेकिन ऐसे लोग इस बात को नहीं समझते कि अब पूरी दुनिया हर प्रकार से एक दूसरे से पूरी तरह जुड़ चुकी है। इसलिए दुनिया के सुदूर कोने में होने वाली एक छोटी सी घटना भी आपके घर में आने वाले बिस्किट, चॉकलेट, तेल, साबुन, शैंपू जैसी ढेरों वस्तुओं की महंगाई बढ़ा सकती है।
यह ठीक है कि आप इस प्रकार की वैश्विक घटनाओं को रोक नहीं सकते,पर आपको ऐसी घटनाओं की जानकारी तो रखनी ही चाहिए, ताकि आप इनसे बचाव के लिए कुछ तैयारी कर सकें या कम से कम ऐसी घटनाओं का सही कारण ही समझ सकें।
आज इंटरनेट और मोबाइल फोन के युग में विश्व के किसी भी विषय की कोई भी जानकारी पलक झपकते ही घर बैठे बैठे प्राप्त की जा सकती है। इसके बावजूद भी यदि कोई कुएं का मेंढक बनकर बैठा रहे और बिना कुछ जाने सिर्फ दूसरों को दोष देता रहे, तो यह केवल उस व्यक्ति की मूर्खता है। आपको वैसी गलती नहीं करनी चाहिए। देश दुनिया में जो भी होता है, उसके बारे में जागरूक रहिए और हर मुद्दे की सही जानकारी रखिए ताकि अपने फायदे के लिए कोई आपको भटकाकर नुकसान में न धकेल सके। सादर!

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