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त्रिलोचन नाथ तिवारी
त्रिलोचन नाथ तिवारी
मैं भी एक खुशरंग अरमानों की चादर था मगर, मुझको मेरी ज़िंदगी ने ओढ़ कर मैला किया... प्रारब्ध मेरी सूचनाएं संगृहीत कर ही नहीं रहा...! तो फिर यहीं सही... स्कूल : ज़िंदगी की पाठशाला में पढ़े कुछ पाठ हमने, पर मुसीबत है कि अब तक सीख मैं कुछ भी न पाया....!! शहर : ठिकाना एक बंजारे का क्यूं हैं पूछते साहिब? जिस शहर में रात गुजरे, बस वही है शहर मेरा...!!
