तब प्रिंट का समय था। पर जल्दी ही नेट का समय आ गया। उस में भी यशवंत सिंह भड़ास4मीडिया ले कर उपस्थित हुए। 2001 में अपने-अपने युद्ध छपा था। 9 साल बाद 2010 में भड़ास पर अपने-अपने युद्ध का धारावाहिक…
इतिहास
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1920 में भारत के तमाम महजिदों में 2 पुस्तक वितरित की जाने लगीं एक का नाम था “कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी” और दूसरी का नाम था “उन्नीस्वी सदी का लम्पट महर्षि ” … दोनों पुस्तकें अनाम थीं, किसी प्रकाशक…
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ये है हमारे सुपारी मीडिया का असली चेहरा । इसके विपरीत मुझे Vikram Singh Kaneri जी की वो एक लाइन की पोस्ट भी याद है , जिसमे उन्होंने लिखा था कि इस बार अगर 325 से एक भी seat कम…
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बनारस में संकट मोचन मन्दिर का स्थापना एवं निर्माण गोस्वामी तुलसीदास जी ने किया था … उस समय के मुग़ल बादशाह अकबर ने गोस्वामी जी को पकड़ के फतहपुर सिकरी के कारागार में डाल दिया था … गोस्वामी जी ने…
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टेलीविज़न आज भी खरीदे जा रहें हैं लेकिन वो दौर दूसरा था जब बहुत से घरों में टेलीविजन का आगमन ‘धार्मिक धारावाहिक’ की धारा में डूबने, तैरने एवं गोते लगाने की उत्सुकता एवं ललक में हुआ। टेलिविज़न से पूर्व रामायण…
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अमेरिका में 9/11 हमला हुआ था, उस वक्त मैं अमेरिका में ही था. अमेरिकन मीडिया की चौबीस घंटा लाइव रिपोर्टिंग थी लेकिन कोई इस बात का ज़िक्र तक न कर रहा था कि कितने लोगों की मृत्यु हुई. पूरा फ़ोकस…
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एतिहासिक प्रमाण हैं भारत की हड़प्पा क़ालीन सभ्यता के समय जो शहर होते थे उनकी प्लानिंग बहुत शानदार होती थी. पूर शहर ब्लॉक्स पर आधारित होता था. ख़ूब चौड़ी मुख्य सड़कें जो नब्बे डिग्री के ऐंगल पर काटती थी. उनसे…
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इतिहासऐतिहासिककहानियाजलज कुमार मिश्राजाति धर्ममुद्दा
विजयादशमी अधर्मी पर धर्म के विजय का दिन
by Jalaj Kumar Mishra 312 viewsविजयादशमी अधर्मी पर धर्म के विजय का दिन है। मानवतावाद ही नही कोई भी वाद सिर्फ मवाद होता है और कोई भी इज्म सिर्फ षड्यंत्र होता है। धार्मिक होना मानव होने की पहली शर्त है और इस दुनिया में सिर्फ…
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इतिहासजलज कुमार मिश्राराजनीतिसामाजिक
भारत रत्न पं.अटल बिहारी वाजपेयी
by Jalaj Kumar Mishra 389 viewsपं.अटल बिहारी वाजपेयी जब भारत रत्न को मिले तब भारत रत्न भी उनको पाकर धन्य हुआ। एक बार पंडित जी से किसी ने आकर कहा कि आपके पास ओजस्वी भाषण की जो अद्भुत कला है उसका मैं कायल हूँ। इस…
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इतिहासऐतिहासिकप्रांजय कुमारभारत वीरमुद्दा
सोए हुए पौरुष और स्वाभिमान को जागृत-झंकृत करने वाली वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई
by Pranjay Kumar 666 viewsविरला ही कोई ऐसा होगा जो महारानी लक्ष्मीबाई के साहस, शौर्य एवं पराक्रम को पढ़-सुन विस्मित-चमत्कृत न होता हो! वे वीरता एवं संघर्ष की प्रतिमूर्त्ति थीं। उनका जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी में हुआ था। मात्र 29 वर्ष की…
