बदलता साल, गुजरता वक्त काफी कुछ सिखाता हैं। कभी कभी लगता हैं कि जीवन के सुनापन को भरने में यादों का बहुत बड़ा हाथ हैं।हर साल हम प्रयास करते हैं कि कुछ नया करेंगे,कुछ बदलाव अपने में लाएंगे और गुजरते…
Jalaj Kumar Mishra
Jalaj Kumar Mishra
Managing editor at राष्ट्रवाक् मासिक पत्रिका and works at मंत्री at संस्कार भारती बिहार and Convener at Bhojpuri Literature Festival
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अपराधचलचित्रजलज कुमार मिश्रामीडिया
शाहरुख का लड़का बनाम ड्रग्स बनाम सच्चाई
by Jalaj Kumar Mishra 434 viewsशाहरुख खान का लड़का ड्रग्स के मामले में गिरफ्तार हुआ है! ऐसी खबर सुबह से बाजार में फैली हुई है। गिरफ्तार करने वाले उसके साथ बेशर्म की तरह तस्वीरें खिचवा रहे हैं। आखिर उनको शर्म आये भी तो क्यों पिछले…
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इस देश में जब जब चुनाव आता है तब तब कुछ राजनीतिक गिद्ध लाशों की राजनीति करने पहुँच जाते हैं। चुनावी हार के बाद ये भेड़िए फिर जंगल में जा कर छुप जाते हैं। इनको तब सरोकार से कोई मतलब…
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जलज कुमार मिश्राभारत निर्माणमुद्दा
मैं भारत हूँ : सर्वेश तिवारी श्रीमुख
by Jalaj Kumar Mishra 560 viewsसर्वेश तिवारी ‘श्रीमुख’ लिखतें हैं कि मैं भारत हूँ। मैं वह भारत हूँ जिसने पिछले पाँच हजार वर्ष में कभी अपने किसी बेटे का नाम दुशासन नहीं रखा, क्योंकि उसने एक स्त्री का अपमान किया था। मैं वह भारत हूँ…
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जलज कुमार मिश्राराजनीति
उत्तर प्रदेश का यह आगामी चुनाव और योगी जी की जीत
by Jalaj Kumar Mishra 550 viewsउतरप्रदेश में विपक्ष मुद्दा विहीन है और वह मैदान में लड़ने से पहले हार मान चुका है। वहाँ पर विपक्ष में अब इस बात की लड़ाई चल रही है कि बयानबाजी में सबसे घटिया प्रदर्शन कौन करेगा। नमाजवादी राजकुमार अभी…
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आज दो अलग अलग विचारधारा के महत्वपूर्ण लोग इस दुनिया को छोड़ कर गये। एक थे छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को लोक तक पहुंचाने में अपना जीवन खपाने वाले,पद्मविभूषण और महाराष्ट्रभूषण पुरस्कार से सम्मानित माता सरस्वती के वरद पुत्र…
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छठ में पंडे-पुरोहित की जरुरत नहीं होती है। बहुत सही बात है। अब ये बताइये कि कुछ ही दिन पहले जो भाई दूज (भातृ-द्वितीय या भरदुतिया) किया था, या करते आ रहे हैं, उसमें कौन से पुरोहित बुलाये जाते हैं?…
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जलज कुमार मिश्रामुद्दालेखक के विचार
मोबाइल वाली जनरेशन और पुरानी मान्यताये
by Jalaj Kumar Mishra 456 viewsमोबाइल वाली जनरेशन ना तो कौवे का उचरना जानती है और नाही वह चिट्ठी में लिपटी हुई चिंता और वेदना को समझ सकती है। इसके साथ ही अभी तक वह, यह समझने में असमर्थ है कि पुरानी पीढ़ी जब नयी…
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इतिहासऐतिहासिककहानियाजलज कुमार मिश्राजाति धर्ममुद्दा
विजयादशमी अधर्मी पर धर्म के विजय का दिन
by Jalaj Kumar Mishra 341 viewsविजयादशमी अधर्मी पर धर्म के विजय का दिन है। मानवतावाद ही नही कोई भी वाद सिर्फ मवाद होता है और कोई भी इज्म सिर्फ षड्यंत्र होता है। धार्मिक होना मानव होने की पहली शर्त है और इस दुनिया में सिर्फ…
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जलज कुमार मिश्राजाति धर्ममुद्दाराजनीति
इस देश में जब जब चुनाव आता है
by Jalaj Kumar Mishra 712 viewsइस देश में जब जब चुनाव आता है तब तब कुछ राजनीतिक गिद्ध लाशों की राजनीति करने पहुँच जाते हैं। चुनावी हार के बाद ये भेड़िए फिर जंगल में जा कर छुप जाते हैं। इनको तब सरोकार से कोई मतलब…
