हिंदी कहानी को समकालीन दुनिया से जोड़ने वाले कमलेश्वर का इस तरह बिछड़ के जाना बहुत सालता है। उन के निधन के कुछ दिन पहले ही जब उन से फ़ोन पर बात हुई तो वह अपनी कई योजनाओं के बारे…
कहानिया
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उमराओ विवेक सामाजिक यायावरकहानियामुद्दालेखक के विचार
स्त्री के प्रति हमारा नजरिया और शुचिता का आडंबर बनाम संस्कार संस्कृति
by Umrao Vivek Samajik Yayavar 468 viewsस्त्री को माहवारी झेलना पड़ता है, स्त्री गर्भवती होती है, स्त्री अपने गर्भ में बच्चे को नौ महीने पालती है और एक दिन स्त्री बच्चे को अपने यौनांग से धरती पर अवतरित कराती है। जीवन देने की क्षमता के कारण…
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कहानियानयाप्रांजय कुमारसामाजिक
जीवन एक यात्रा है : रोहित सरदाना की प्यारी सी बेटी नंदिका की कलम से
by Pranjay Kumar 676 viewsस्वर्गीय रोहित सरदाना की प्यारी सी बेटी नंदिका ने अपने 8 महीने के अनुभवों को एक कविता के माध्यम से बताने की कोशिश की है। सुनिये और महसूस कीजिये… क्योंकि “जीवन एक यात्रा है”। नंदिका ने जो कहा है, उसका…
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अजीत सिंहकहानियाजाति धर्ममुद्दाराजनीतिविदेश
एक हिरन की कहानी : राजनितिक देशो की व्यथा
by Ajit Singhby Ajit Singh 400 viewsहिरण पूरे दिन घास खाने मे लगा रहता है, और घास को प्रोटीन में बदलने में ही लगा रहता है। ब्रह्मांड में प्रोटीन का प्राइमरी सोर्स पौधों से ही मिलता है दूसरी तरफ माँसाहारी जानवरों को जब तक भूख नहीं…
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बात 2001 के आसपास की है , यानी 21 साल पहले । हम दोनों पति पत्नी श्रीनगर – काश्मीर गए हुए थे और Tyndale Biscoe School के प्रिंसिपल श्रीमान परवेज़ कौल साहब के मेहमान थे । लाल चौक स्थित Tyndale…
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अजीत सिंहकहानियालेखक के विचारसच्ची कहानियां
30 साल पुराना किस्सा : फैक्ट्री का फोरमैन
by Ajit Singhby Ajit Singh 397 views30 साल पुराना किस्सा है । दिल्ली पटना श्रमजीवी Express का । मैं बनारस से दिल्ली आ रहा था । मेरे सहयात्री एक सेठ जी थे , दिल्ली के । उनके साथ एक मैला कुचैला , श्रमजीवी किस्म का आदमी…
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उमराओ विवेक सामाजिक यायावरकहानियालेखक के विचारशिक्षा
स्वाध्याय पाश्चात्य समाज के लोग
by Umrao Vivek Samajik Yayavar 532 viewsमेरी शादी में मेरे माता-पिता भाई बहन इत्यादि, मेरी पत्नी के माता-पिता भाई बहन इत्यादि नहीं सम्मिलित हुए थे। हमारी शादी सुबह एक-आध घंटे में ही अग्नि-हवन के फेरे इत्यादि लेकर निपट गई थी। शादी के तुरंत बाद हम लोग…
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उमराओ विवेक सामाजिक यायावरकहानियामुद्दालेखक के विचारविदेश
फ्रांसीसी युवा वैज्ञानिक की दृष्टि, प्रतिबद्धता, सक्रियता, दर्द और भारतीय समाज
by Umrao Vivek Samajik Yayavar 327 viewsफ्रांस का एक युवा, स्नातक का छात्र, बचत करके भारत आकर अत्यधिक पिछड़े बंजर क्षेत्र में पहुंचता है। वहां वह किसी को नहीं जानता, खानपान व भाषा से परिचित नहीं, उसका शरीर वहां के मौसम व वातावरण को झेलने का…
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हमारे गांवों ने भी खूब प्रगति की। यहां मोबाइल से लेकर मोमो तक सब-कुछ मिलता है लेकिन रियायती दर पर!! आपको हर चौराहे पर चाऊमीन-बर्गर जैसे चाइनीज़ खाद्य पदार्थों की एक श्रृंखला मिलेगी। मेरा अनुमान है कि यदि चाइना वाले…
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एक गांव में एक पोस्टमास्टर साहब रहते थे। बच्चे, उनके तीन थे लेकिन उनका मझला लड़का बचपन से शरारती तबियत का था। हांलांकि शरारत करते-करते कुछ शरारती, लपककर…अपराध की दुनिया का चखना, चखने लगते हैं। ऐसे ही चखने की जद…
