भीड़ में एक सज्जन एक्टिवा से जा रहे थे। उनके ठीक पीछे मेरी मोटरसाइकिल तथा मेरे दाहिनी तरफ एक टैम्पो। तभी राइट साइड की उप सड़क से एक युवती, मेरे और टैम्पों के बीच, धनुष से निकले बाण की तरह…
रिवेश प्रताप सिंह
-
-
एक सुदर्शन नववुवक विगत पांच वर्षों से गांव की रामलीला में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम का पात्र निभा रहे थे। इस पात्र में लीला करने के कारण गांव में उनका खूब सम्मान भी था। यहां तक गांव के तमाम लोग…
-
पहले की शादियों में विदाई के वक्त, छोटे-बड़े बक्स, खूब मिला करते थे…. हांलांकि उसमें दुल्हन की रोजमर्रा जरूरतों का कोई सामान न के बराबर होता था। लेकिन उन बक्स में ताले! पूछिए मत!! जनाब अलीगढ़ वाले। दुल्हन अपने साथ…
-
हमारे गांवों ने भी खूब प्रगति की। यहां मोबाइल से लेकर मोमो तक सब-कुछ मिलता है लेकिन रियायती दर पर!! आपको हर चौराहे पर चाऊमीन-बर्गर जैसे चाइनीज़ खाद्य पदार्थों की एक श्रृंखला मिलेगी। मेरा अनुमान है कि यदि चाइना वाले…
-
एक गांव में एक पोस्टमास्टर साहब रहते थे। बच्चे, उनके तीन थे लेकिन उनका मझला लड़का बचपन से शरारती तबियत का था। हांलांकि शरारत करते-करते कुछ शरारती, लपककर…अपराध की दुनिया का चखना, चखने लगते हैं। ऐसे ही चखने की जद…
-
कहानियारिवेश प्रताप सिंहलेखक के विचार
घर के पास व्यस्त चौराहे और कार मकैनिक
by रिवेश प्रताप सिंह 492 viewsघर के पास व्यस्त चौराहे पर, पिछले एक सप्ताह से मुनादी की जा रही है- सावधान! सावधान!! सावधान!!! यदि कोई व्यक्ति सादे वर्दी में आकर, अपने को पुलिस वाला या पुलिस का अधिकारी बताकर आपको लूटना चाहता हों… तो आप…
-
मेरे शहर में एक टेलर है। कटिंग, फिटिंग के मामले में मशहूर है। हांलांकि अब रेडिमेड कपड़ों के दौर में दर्जी के यहां जाना कम ही हो पाता है। दरअसल सिलाई इतनी मंहगी हो चली है कि कपड़ा खरीदने, सिलवाने…
-
कहानियारिवेश प्रताप सिंहलेखक के विचारहास्य व्यंग
मेरा मित्र और जाड़े का यह मौसम
by रिवेश प्रताप सिंह 503 viewsमेरे एक मित्र की माता जी, मुझसे अपने पुत्र, मतलब मेरे मित्र की उलाहना दे रहीं थीं कि “यह नबाब साहब सुबह बिस्तर से उठते नहीं। यहां तक कि इनके लिए बिस्तर तक मुझे पानी लेकर आना पड़ता है।” मैंने…
-
कहानियारिवेश प्रताप सिंहलेखक के विचार
डॉक्टर साहब का अस्पताल और यह चुनावी रैली
by रिवेश प्रताप सिंह 538 viewsमेरे एक जानने वाले, जिनका छोटा सा अस्पताल चलता था। मरीजों की तादाद इतनी कम थी कि डाक्टर साहब मरीज देखने के बाद उसके साथ बैठकर घंटों बात कर लेते। साथ में मूंगफली चटका लेते। मरीज का मर्ज जानने के…
-
मोबाइल, इन्टरनेट के युग में मनोरंजन के तमाम प्लेटफार्म उपलब्ध है। इसलिए आज के युवा दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले फिल्मी संगीत कार्यक्रम ‘चित्रहार’ तथा ‘रंगोली’ की कीमत क्या समझेंगे भला!! रविवार की सुबह रंगोली तथा बुधवार-शुक्रवार की रात में…
