वह रास्ते में अचानक रुक गया। नजारा ही कुछ ऐसा था। एक बीस-बाइस साल की गोरी चिट्टी लड़की तेज-तेज चलती जा रही थी और उस के पीछे-पीछे एक पचास-पचपन साल का आदमी लगभग दौड़ता हुआ, ‘सुनो तो! मेरी बात तो…
कहानिया
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कथा-लखनऊ की जब बात चली तो अपने घर गोरखपुर की भी याद आई। साथ ही कथा-गोरखपुर की भी योजना जब प्रलेक प्रकाशन के जितेंद्र पात्रो को बताई तो वह सहर्ष तैयार हो गए। बिना किसी ना-नुकुर के। तो कथा-लखनऊ और…
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कहते हैं जादू सरसो पे पढ़े जाते हैं, तरबूज पर नहीं। तो लखनऊ वही सरसो है , जहां कहानियों का जादू सिर चढ़ कर बोलता है। कहानी मन में भी लिखी जाती है। सिर्फ़ काग़ज़ पर कलम से ही नहीं।…
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चनाजोर गरम वाले चतुर्वेदी जी चतुर्वेदी जी अपने बेटे की शादी के पंडाल में गेंदे के फूल की माला पहने ऐसे घूम रहे थे गोया बच्चे हों। लेकिन उनके चेहरे पर बच्चों का-सा उल्लास नहीं, एक फीकी-सी मुसकुराहट थी। फिर…
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यह उस के लिए कोई नया अनुभव नहीं था। पर अनुभव तो था ही। प्रेम उस ने कई बार किया था। जो लोग कहते हैं कि प्रेम सिर्फ एक बार होता है, उसे उन लोगों पर तरस आता है। उस…
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उन के अंतर्विरोध उन्हें इस तरह डंसे हुए थे कि उन्हें समझना किसी एक के लिए क्या पूरे शहर के लिए मुश्किल था। शायद वह खुद भी अपने को समझ नहीं पाती थीं। संभवतः इसी लिए लगभग हर किसी पर…
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बरसों बाद वह इस अपने पुराने शहर आया था। पुरानी यादों में डूबता उतराता। साथ में अपने एक ख़ास दोस्त को भी लाया था। लाया क्या था वह खुद नत्थी हो कर आ गया था। नत्थी हो कर आया था…
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बस अभी हिचकोले ही खा रही थी कि अन्नू ने मुझे अपनी सीट पर बुलाया। मैं अभी अपनी सीट से उठी ही थी कि बस एक स्पीड ब्रेकर पर भड़भड़ कर गुजरने लगी। मैं गिरते-गिरते बची। अन्नू की सीट पर…
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कहानियादयानंद पांडेयलेखक के विचार
जब एक लड़की से करुण रस के बारे में पूछा तो
by दयानंद पांडेय 564 viewsउन दिनों बी ए में पढता था। पर क्लास की पढाई-लिखाई से कहीं ज़्यादा कविता लिखने की धुन सवार थी। धुन क्या जुनून ही सवार था। कवि गोष्ठियों में जाने की लत भी लग गई थी। फिर कवि सम्मेलनों में…
