संविधान के मुख्य निर्माता डॉ. अंबेडकर ने ही दो बार, वह भी संसद में, पूरी जिम्मेदारी से कहा था कि वे “इस संविधान को जला देना चाहते” हैं। प्रथम अवसर पर (2 सितंबर 1953) उन्होंने कहा कि, ‘‘मैं इस संविधान…
Pranjay Kumar
Pranjay Kumar
A hardcore nationalist & founder of the social organization, "Shiksha Sopan". Passionate about reading & writing
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मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि 2014 में सत्ता बदलने के बाद जो सबसे उपेक्षित क्षेत्र रहा, वह शिक्षा है। सत्ता बदलने के बाद भी शिक्षा-मंत्रालय की रीति-नीति, दिशा-दशा पूर्ववत रही। अधिकांश संस्थाओं-समितियों में वे लोग बने रहे…
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#जयपुर_डायलॉग हिंदू-विमर्श को न केवल देश के भीतर, बल्कि विदेशों में भी गति दे रहा है। जब मैं कहता हूँ #हिंदू_विमर्श तो उसका अभिप्राय #विश्व विमर्श से है। चूँकि कुछ लोगों को हिंदू शब्द से आपत्ति है, इसलिए मुझे यह…
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संकट काल में ही किसी राष्ट्र के चरित्र की वास्तविक परीक्षा होती है। धैर्य और विवेक के साथ घटनाओं के विश्लेषण की आवश्यकता है। मैंने देखा कि बहुत-से राष्ट्रीय सोच वाले मित्र-बंधु-भगिनी भी तरह-तरह के अनुमानों या थ्योरीज़ को आगे…
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भारत को भारत की दृष्टि से देखने-समझने और समझाने वाले अनूठे प्रधानमंत्री थे- भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी। उन्होंने भारत और भारतीयता पर गर्व करना सिखाया। एक ऐसे दौर में जबकि निष्ठा चंद नोटों के बदले बिकती हो,…
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नम आँखों एवं विह्वल भावों को समय के बाँधों में रोक पाना कितना कठिन होता है, आज अनुभव हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और उनकी यह मुद्रा, ओह, सदियों की साधना पूँजीभूत होकर इस एक व्यक्ति के रूप में आज…
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एक अभिभावक एवं प्रबुद्ध व्यक्ति के रूप में मैं बहुविकल्पी परीक्षा-पद्धत्ति को विद्यालय-स्तर पर लागू किए जाने के विरुद्ध हूँ। पता नहीं किनके सुझावों पर सीबीएसई ने यह प्रयोग किया? यह प्रयोग विद्यालयों में बच्चों के समग्र एवं सर्वांगीण विकास…
