शाहरुख खान का लड़का ड्रग्स के मामले में गिरफ्तार हुआ है! ऐसी खबर सुबह से बाजार में फैली हुई है। गिरफ्तार करने वाले उसके साथ बेशर्म की तरह तस्वीरें खिचवा रहे हैं। आखिर उनको शर्म आये भी तो क्यों पिछले…
मीडिया
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कहानियानितिन त्रिपाठीमीडियाराजनीति
किस्सा लोकसभा चुनावों का वोट कमल को वोट अटल को
by Nitin Tripathi 590 viewsयह 1998 लोकसभा चुनावों का क़िस्सा है. उस समय वोट बैलट पेपर पर होते थे. एक भाजपा का कार्यकर्ता स्थानीय सांसद से बहुत नाराज़ था. सबको शक था कि यह भाजपा को वोट तो बिल्कुल न देगा. लाइन में जब…
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एक कड़वा सच यह है कि किसान बिल वापस ही होना था, बस मौके का इंतजार था कि ऐसा न लगे सरकार डर कर / धमकी से वापस ले रही है। जैसे ही थोड़ी शांति आई, कोई भारत बंद आदि…
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रवीश कुमार दानिश सिद्दीक़ी की क्रूर हत्या पर तालीबान के ख़िलाफ़ एक शब्द ना लिख पाए उलटे उस गोली को ज़िम्मेदार बताया जिसने दानिश की जान ली. गलती रवीश की नहीं है. यक़ीन मानिए आज से दस वर्ष पूर्व के…
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पेड बुद्धिजीवियों, लालची लिब्रलों और मक्कार विधर्मीयों को सोचना चाहिए कि हिन्दू कितना भी उग्र हो जाये किन्तु वह क्रूर नही हो सकता है। अत्याचार करोगे तब उसका दण्ड तो भोगना ही होगा!तुम जैसे लोगों का सबसे भयानक दण्ड है…
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#जयपुर_डायलॉग हिंदू-विमर्श को न केवल देश के भीतर, बल्कि विदेशों में भी गति दे रहा है। जब मैं कहता हूँ #हिंदू_विमर्श तो उसका अभिप्राय #विश्व विमर्श से है। चूँकि कुछ लोगों को हिंदू शब्द से आपत्ति है, इसलिए मुझे यह…
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महंत नरेंद्र गिरी जी का शव फंदे से लटकता मिला है, पहली नजर में ये आत्महत्या लग रही है। सबको ‘सामंजस्य’ सिखाने वाले लोग खुद परिस्थितियों से सामंजस्य क्यों नहीं बैठा पाते ! ‘अपनी स्थिति से राजी हो जाओ’ कह…
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अपराधअवनीश पी ऍन शर्माइतिहासजाति धर्ममीडियाराजनीतिविदेशसच्ची कहानियां
मुट्ठीभर “कुछ” लोग – 2
by Awanish P. N. Sharma 410 viewsइतनी जल्दी कैसे भूल जाने को तैयार मुट्ठीभर “कुछ” लोग : पाकिस्तान के कब्जे वाले एक अभागे शहर मीरपुर की कहानी भारत विभाजन की वह कहानी है जिस पर मानवता भी शर्म खा जाय लेकिन कथित आजाद भारत की तात्कालिक…
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चलचित्रपुष्कर अवस्थीमीडिया
आरती मल्होत्रा से बनी आरती मोहम्मद बनाम आरती कपूर
by पुष्कर अवस्थी 575 viewsआहिस्ता आहिस्ता जैसे जैसे 2019 आता जारहा है वैसे वैसे सेकुलरिज्म का रोड शो टीवी मीडिया, अखबार, सोशल मीडिया, सेमिनार और फिल्मों में छाता जारहा है। जहां एक से बौद्धिकों के खाते सूखते जारहे है वही ऐसा लग रहा की…
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विस्तृत विश्लेषण से पूर्व ही एक पंक्ति में भविष्य की एक चेतावनी अवश्य लिख देना चाहूँगा- देवेन्द्र सिकरवार भारत सरकार ने किसी भी स्थिति में यहाँ तक कि अमेरिका सहित पूरे विश्व द्वारा मान्यता देने की स्थिति में भी अगर…
