बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है, मैं अपने बच्चे आदि का उदाहरण दे रहा हूं, आदि की उम्र लगभग सवा-पांच वर्ष है। आप आदि के पैदा होने के दिन से परिचित हैं। आदि के प्रसव से लेकर उसके विकास…
हमारे लेखक
-
-
उमराओ विवेक सामाजिक यायावरकहानियालेखक के विचारशिक्षा
स्वाध्याय पाश्चात्य समाज के लोग
by Umrao Vivek Samajik Yayavar 593 viewsमेरी शादी में मेरे माता-पिता भाई बहन इत्यादि, मेरी पत्नी के माता-पिता भाई बहन इत्यादि नहीं सम्मिलित हुए थे। हमारी शादी सुबह एक-आध घंटे में ही अग्नि-हवन के फेरे इत्यादि लेकर निपट गई थी। शादी के तुरंत बाद हम लोग…
-
उमराओ विवेक सामाजिक यायावरराजनीतिविदेश
ऑस्ट्रेलिया व भारत के प्रशासनिक ढांचे
by Umrao Vivek Samajik Yayavar 428 viewsबहुत लोगों की इच्छा रहती है ऑस्ट्रेलिया की प्रशासन व्यवस्था के संदर्भ में कुछ जानकारी रखने की। ऑस्ट्रेलिया व भारत के प्रशासनिक ढांचो में बहुत अधिक अंतर है। उदाहरण स्वरूप ——— भारत की ओर से अमूमन विदेशों में जो राजदूत…
-
उमराओ विवेक सामाजिक यायावरचिकित्सा जगतमुद्दा
ओमिक्रान : हमारी जिम्मेदारी व जवाबदेही
by Umrao Vivek Samajik Yayavar 332 viewsजिन देशों में वैक्सीन लगाने के नाम पर धोखाधड़ी व फर्जीवाड़ा नहीं किया गया है तथा नहीं किया जा रहा है। उन देशों में जिन लोगों को वैक्सीन लग चुकी है, ऐसे लोगों को ओमिक्रान होने पर अस्पताल पहुंचने की…
-
उमराओ विवेक सामाजिक यायावरचिकित्सा जगतमुद्दा
खतरनाक कोविड-लहर
by Umrao Vivek Samajik Yayavar 361 views2020 के शुरुआती महीनों से हम भारतीय लोग स्कूल की साधारण स्तर की किताबों में कोरोना के बारे में लिखी लाइनों की फोटो वायरल करके यह दावा कर रहे थे कि जिस वायरस के बारे में दुनिया अब जान रही…
-
उमराओ विवेक सामाजिक यायावरजाति धर्मभारत निर्माणराजनीतिसुरक्षा
देशप्रेम : चलते-चलते
by Umrao Vivek Samajik Yayavar 751 viewsदेशप्रेम का अर्थ है कि देश के लोगों के सकून, आराम, विकास, उन्नति व अभय इत्यादि लिए ईमानदार व प्रतिबद्ध होना। देश का मतलब देश के लोग होते हैं। देश कोई वस्तु नहीं होता है, देश लोगों से होता है,…
-
उमराओ विवेक सामाजिक यायावरकहानियामुद्दालेखक के विचारविदेश
फ्रांसीसी युवा वैज्ञानिक की दृष्टि, प्रतिबद्धता, सक्रियता, दर्द और भारतीय समाज
by Umrao Vivek Samajik Yayavar 356 viewsफ्रांस का एक युवा, स्नातक का छात्र, बचत करके भारत आकर अत्यधिक पिछड़े बंजर क्षेत्र में पहुंचता है। वहां वह किसी को नहीं जानता, खानपान व भाषा से परिचित नहीं, उसका शरीर वहां के मौसम व वातावरण को झेलने का…
-
भीड़ में एक सज्जन एक्टिवा से जा रहे थे। उनके ठीक पीछे मेरी मोटरसाइकिल तथा मेरे दाहिनी तरफ एक टैम्पो। तभी राइट साइड की उप सड़क से एक युवती, मेरे और टैम्पों के बीच, धनुष से निकले बाण की तरह…
-
एक सुदर्शन नववुवक विगत पांच वर्षों से गांव की रामलीला में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम का पात्र निभा रहे थे। इस पात्र में लीला करने के कारण गांव में उनका खूब सम्मान भी था। यहां तक गांव के तमाम लोग…
-
पहले की शादियों में विदाई के वक्त, छोटे-बड़े बक्स, खूब मिला करते थे…. हांलांकि उसमें दुल्हन की रोजमर्रा जरूरतों का कोई सामान न के बराबर होता था। लेकिन उन बक्स में ताले! पूछिए मत!! जनाब अलीगढ़ वाले। दुल्हन अपने साथ…
