वैसे तो साहित्य चोरी कि परम्परा बहुत पुरानी है और इससे कोई भी भाषा अछूती नही है। भिखारी ठाकुर भोजपुरीआ इलाके का एक ऐसा नाम जिनकी नाच पार्टी अपने दौर की सबसे महँगी नाच पार्टी थी। कलकत्ता के पृष्ठभूमि से…
सच्ची कहानियां
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मुट्ठीभर “कुछ” लोग – 2
by Awanish P. N. Sharma 376 viewsइतनी जल्दी कैसे भूल जाने को तैयार मुट्ठीभर “कुछ” लोग : पाकिस्तान के कब्जे वाले एक अभागे शहर मीरपुर की कहानी भारत विभाजन की वह कहानी है जिस पर मानवता भी शर्म खा जाय लेकिन कथित आजाद भारत की तात्कालिक…
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महाबलीपुरम जाइए … वहाँ महाभारत के नायकों और श्री कृष्ण लीला को चालुक्य और पल्लव साम्राज्य के शासकों ने कलाकारों से कहानियाँ उकेरी हुई हैं …. ये सब लगभग सन 682 की बनी हुई पत्थरों को तराश के बनाई हुई…
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राम अवतार बाबू बिलकुल निराले किसिम के आदमी थे। वह जब पढ़ते थे तब भी बहुत अलग-अलग से रहते थे। उनका ज्यादातर समय तालाब के किनारे, बाग में या गाय भैंसों के बीच गुजरता था। लगता था जैसे मानव संसार…
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सुनीता का पति उसे घूरता, तरेरता चला गया। मुनक्का राय तब घर पर ही थे। सुनीता के पति के चले जाने के बाद वह मुनमुन से बोले, ‘बेटी क्या अपनी विपत्ति कम थी जो दूसरों की विपत्ति भी अपने सिर…
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आर ऍम यादव ( राज्याध्यक्ष)सच्ची कहानियां
यह एक पूर्णत: काल्पनिक कहानी है ।
by आर ऍम यादव ( राज्याध्यक्ष) 401 viewsक्या भारत में अभी अस्थिरता और आना है ?? आखिर ये हो क्या रहा है भारत में … . पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका की यात्रा के समय electronics manufacturing वाली टॉप क्लास की कम्पनी के CEO और इन्वेस्टर्स…
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‘मेरी शादी नहीं की आप ने आठ-दस लाख ख़र्च कर के।’ वह बोली, ‘अपना बोझ उतार कर मेरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी।’ ‘क्या बात करती हो?’ ‘ठीक कह रही हूं।’ वह लपक कर एक फ़ोटो अलबम दिखाती हुई बोली, ‘देखिए…
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चेतना की यह बातें सुन कर संजय चुप लगा जाता। चुप-चुप बैठे-बैठे वह उस से लिपटने लगता। चूमने लगता। वह फुंफकारती, ‘‘यह कोई बेडरूम नहीं है।’’ ‘‘बेडरूम में इस तरह लिपटा या चूमा नहीं जाता। सीधे शुरू हो जाया जाता…
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हार मान कर उस ने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस, मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सब को चिट्ठियां लिखनी शुरू कीं। पर वो कहते हैं, न कि, ‘‘कहीं से कोई सदा न आई।’’ बहुत बाद में छपी छपाई औपचारिक चिट्ठी राष्ट्रपति,…
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‘‘कचहरी तो बेवा का तन देखती है, खुलेगा कहां से बटन देखती है।’’ तथ्य से वाकिफ होते हुए भी वह तब अपने को राम की भूमिका में पाता और समूची व्यवस्था को रावण की भूमिका में। वह ‘‘धर्मयुद्ध’’ के नशे…
