आज मैं थोड़ा गुस्से में हूँ । आक्रोशित हूँ । इसलिये पोस्ट में कुछ लोकभाषा के देशज शब्दों का प्रयोग कूट भाषा मे हो जाये तो क्षमा करेंगे । * भैया , पैसे भर की मेरी G नही है पर…
लेखक के विचार
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हमारे इदर मनाली में हमारे Home Stay में एक Couple आया । दिल्ली से मनाली Car चला के आये । 14 घंटे की drive थी। कुल 7 दिन रुके । रोज़ाना सुबह 7 बजे ही निकल जाते दोनों । रात…
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आशीष कुमार अंशुजाति धर्ममुद्दाराजनीतिलेखक के विचार
हिन्दू—मुस्लिम एकता की बात करने वाले….
by Ashish Kumar Anshu 722 viewsआपने कभी गौर किया है, हिन्दू—मुस्लिम एकता की बात करने वाले, हिन्दूओं को बांटने में कोई कोर—कसर नहीं छोड़ते। अब यह हिन्दू—मुस्लिम एकता वाला पूरा गिरोह उत्तर प्रदेश में जाट—मुसलमान एकता की बात कर रहा है। यह गिरोह बिहार और…
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उमराओ विवेक सामाजिक यायावरलेखक के विचारसामाजिक
सफलता व उपलब्धि बनाम हमारी मानसिकता
by Umrao Vivek Samajik Yayavar 753 viewsसफलता व उपलब्धि को हम ठीक से परिभाषित ही नहीं कर पाए हैं। यदि सफलता को हम ठीक से परिभाषित कर लिए होते तो हमारे समाज की दिशा ही भिन्न होती, लोगों की मानसिकता भिन्न होती, जीवन के मानदंड ही…
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उमराओ विवेक सामाजिक यायावरमुद्दालेखक के विचारसामाजिक
विवाह, दाम्पत्य व पालन-पोषण बनाम संस्कृति संस्कार
by Umrao Vivek Samajik Yayavar 396 viewsविवाह के समय लड़की व लड़के को संस्कारों की कसौटी में मूल्यांकन करने का जबरदस्त प्रचलन है, जिसको परिवार व समाज की संस्कृति की रक्षा व समृद्धि के लिए लड़का लड़की को ठोंक बजाकर चुनना कहा जाता है। इस प्रक्रिया…
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उमराओ विवेक सामाजिक यायावरकहानियालेखक के विचारशिक्षा
स्वाध्याय पाश्चात्य समाज के लोग
by Umrao Vivek Samajik Yayavar 623 viewsमेरी शादी में मेरे माता-पिता भाई बहन इत्यादि, मेरी पत्नी के माता-पिता भाई बहन इत्यादि नहीं सम्मिलित हुए थे। हमारी शादी सुबह एक-आध घंटे में ही अग्नि-हवन के फेरे इत्यादि लेकर निपट गई थी। शादी के तुरंत बाद हम लोग…
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उमराओ विवेक सामाजिक यायावरकहानियामुद्दालेखक के विचारविदेश
फ्रांसीसी युवा वैज्ञानिक की दृष्टि, प्रतिबद्धता, सक्रियता, दर्द और भारतीय समाज
by Umrao Vivek Samajik Yayavar 374 viewsफ्रांस का एक युवा, स्नातक का छात्र, बचत करके भारत आकर अत्यधिक पिछड़े बंजर क्षेत्र में पहुंचता है। वहां वह किसी को नहीं जानता, खानपान व भाषा से परिचित नहीं, उसका शरीर वहां के मौसम व वातावरण को झेलने का…
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भीड़ में एक सज्जन एक्टिवा से जा रहे थे। उनके ठीक पीछे मेरी मोटरसाइकिल तथा मेरे दाहिनी तरफ एक टैम्पो। तभी राइट साइड की उप सड़क से एक युवती, मेरे और टैम्पों के बीच, धनुष से निकले बाण की तरह…
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पहले की शादियों में विदाई के वक्त, छोटे-बड़े बक्स, खूब मिला करते थे…. हांलांकि उसमें दुल्हन की रोजमर्रा जरूरतों का कोई सामान न के बराबर होता था। लेकिन उन बक्स में ताले! पूछिए मत!! जनाब अलीगढ़ वाले। दुल्हन अपने साथ…
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हमारे गांवों ने भी खूब प्रगति की। यहां मोबाइल से लेकर मोमो तक सब-कुछ मिलता है लेकिन रियायती दर पर!! आपको हर चौराहे पर चाऊमीन-बर्गर जैसे चाइनीज़ खाद्य पदार्थों की एक श्रृंखला मिलेगी। मेरा अनुमान है कि यदि चाइना वाले…
