गांधी पर सवाल नहीं, नेहरू पर सवाल नहीं, अंबेडकर पर सवाल नहीं, पेरियार पर सवाल नहीं। ऐसे एकाध नाम और, जिन पर सवाल नहीं, प्रश्न नहीं। गाली-गोफ्ता का तो खैर, साले सवाल ही गुम जाएंगे फिर। सावरकर को गाली जायज,…
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इतिहासदयानंद पांडेयमीडियामुद्दाराजनीतिलेखक के विचारसामाजिक
यशवंत सिंह भड़ास4मीडिया
by दयानंद पांडेय 748 viewsतब प्रिंट का समय था। पर जल्दी ही नेट का समय आ गया। उस में भी यशवंत सिंह भड़ास4मीडिया ले कर उपस्थित हुए। 2001 में अपने-अपने युद्ध छपा था। 9 साल बाद 2010 में भड़ास पर अपने-अपने युद्ध का धारावाहिक…
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दयानन्द पांडेमुद्दाराजनीतिलेखक के विचारसामाजिक
हुसैनीवाला बार्डर के बहाने…
by दयानंद पांडेय 407 viewsहुसैनीवाला बार्डर के बहाने कांग्रेस ने अपने ताबूत में एक और कील ठोंक ली कोई माने न माने पर मेरा स्पष्ट आकलन है कि हुसैनीवाला बार्डर पर जल्दी ही भाजपा एक रैली फिर से आयोजित करेगी और नरेंद्र मोदी…
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ऐतिहासिकजलज कुमार मिश्राजाति धर्मलेखक के विचारसामाजिक
बदलता साल, गुजरता वक्त काफी कुछ सिखाता
by Jalaj Kumar Mishra 394 viewsबदलता साल, गुजरता वक्त काफी कुछ सिखाता हैं। कभी कभी लगता हैं कि जीवन के सुनापन को भरने में यादों का बहुत बड़ा हाथ हैं।हर साल हम प्रयास करते हैं कि कुछ नया करेंगे,कुछ बदलाव अपने में लाएंगे और गुजरते…
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प्रांजय कुमारमुद्दाराजनीतिलेखक के विचारसामाजिक
श्री गुलाब कोठारी जी के नाम खुला #पत्र_02
by Pranjay Kumar 584 viewsआदरणीय गुलाब कोठारी जी! सादर नमस्कार। आपकी पत्रिका में “हिन्दू कौन?” शीर्षक से आपका सम्पादकीय लेख पढ़कर सहसा विश्वास नहीं हुआ कि एक विद्वान् और भारतीय शास्त्रों के ज्ञाता के रूप में प्रसिद्ध हुआ कोई सम्पादक–पत्रकार ऐसा तथ्यहीन और अतार्किक…
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कहानियानयाप्रांजय कुमारसामाजिक
जीवन एक यात्रा है : रोहित सरदाना की प्यारी सी बेटी नंदिका की कलम से
by Pranjay Kumar 831 viewsस्वर्गीय रोहित सरदाना की प्यारी सी बेटी नंदिका ने अपने 8 महीने के अनुभवों को एक कविता के माध्यम से बताने की कोशिश की है। सुनिये और महसूस कीजिये… क्योंकि “जीवन एक यात्रा है”। नंदिका ने जो कहा है, उसका…
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प्रांजय कुमारराजनीतिसामाजिक
महात्मा गाँधी पर लगातार चोट : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
by Pranjay Kumar 447 viewsयह विमर्श देश को मथ रहा है। मैं किसी भी अतिवादी टिप्पणी से बचता हूँ। समाज का सौहार्द्र बना रहे, यह प्रयास हर सजग और संवेदनशील व्यक्ति के सदृश मेरा भी रहता है। पर सामाजिक सौहार्द्रता किस कीमत पर, प्राणों…
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स्वयं को सर्वज्ञ मानने वाला व्यक्ति यदि दुर्भाग्य से किसी समाचार-पत्र का मालिक भी हो तो वह मनमानेपन की छूट पा जाता है। जीवन के सभी क्षेत्र में सरस्वती पर लक्ष्मी के हावी होने के प्रमाण मिलते हैं। लक्ष्मी की…
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1920 में भारत के तमाम महजिदों में 2 पुस्तक वितरित की जाने लगीं एक का नाम था “कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी” और दूसरी का नाम था “उन्नीस्वी सदी का लम्पट महर्षि ” … दोनों पुस्तकें अनाम थीं, किसी प्रकाशक…
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जो मानव है वो हर युग में evaluate होगा .. उसके निर्णयों से क्या असर पड़ा इस पर बात करना हर युग में ज़रूरी होगा …. अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो फिर इतिहास विषय को समाप्त कर देना…
