इस देश में जब जब चुनाव आता है तब तब कुछ राजनीतिक गिद्ध लाशों की राजनीति करने पहुँच जाते हैं। चुनावी हार के बाद ये भेड़िए फिर जंगल में जा कर छुप जाते हैं। इनको तब सरोकार से कोई मतलब…
राजनीति
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इतिहासजलज कुमार मिश्राराजनीतिसामाजिक
भारत रत्न पं.अटल बिहारी वाजपेयी
by Jalaj Kumar Mishra 416 viewsपं.अटल बिहारी वाजपेयी जब भारत रत्न को मिले तब भारत रत्न भी उनको पाकर धन्य हुआ। एक बार पंडित जी से किसी ने आकर कहा कि आपके पास ओजस्वी भाषण की जो अद्भुत कला है उसका मैं कायल हूँ। इस…
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हमारे यहाँ एक बात हरदम कहा जाता है कि जीवन में गुरुदेव सब कुछ होते हैं। इस देश में गुरुकुल और विद्याश्रम के खत्म होने के बाद रही सही कसर मैकाले ने पुरी कर दी!मैकाले के बाद भी जबतक मैकाले…
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जलज कुमार मिश्राजाति धर्मराजनीति
राम मंदिर व बाबरी मस्जिद और राजनीतिक दाव
by Jalaj Kumar Mishra 410 views“जब अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने से कोई नहीं रोक सका तो मंदिर बनाने से कौन रोकेगा।” यह हिन्दू बहुसंख्यक देश में कहने के लिए समान्य सी बात लगती है लेकिन वामपंथी और कांग्रेसीयों ने मिलकर इस देश कि हिन्दू…
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जाति धर्मप्रांजय कुमारभारत निर्माणमुद्दाराजनीति
भारतीय संस्कृति के शाश्वत सेतु
by Pranjay Kumar 420 viewsमुझे विश्वास है कि पूज्य शंकराचार्य जी में आपकी मुझसे भी गहरी श्रद्धा होगी, आप सनातन संस्कृति के संरक्षण-संवर्द्धन में उनके योगदान को मुझसे भी अधिक अनुभव करते होंगें। मैं नाम या प्रसिद्धि के लिए लेखन की ओर नहीं प्रवृत्त…
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जब कोई अपना, बहुत अपना, समाचार-पत्र में आपका लेख देखकर आपको कॉल या मैसेज करे तो यह लेखन का पारितोषिक मिलने जैसा सुखद होता है, यह दिन बनने जैसा होता है, यह चिहुँक पड़ने जैसा होता है, यह बल्लियों उछल…
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मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि 2014 में सत्ता बदलने के बाद जो सबसे उपेक्षित क्षेत्र रहा, वह शिक्षा है। सत्ता बदलने के बाद भी शिक्षा-मंत्रालय की रीति-नीति, दिशा-दशा पूर्ववत रही। अधिकांश संस्थाओं-समितियों में वे लोग बने रहे…
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भारत को भारत की दृष्टि से देखने-समझने और समझाने वाले अनूठे प्रधानमंत्री थे- भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी। उन्होंने भारत और भारतीयता पर गर्व करना सिखाया। एक ऐसे दौर में जबकि निष्ठा चंद नोटों के बदले बिकती हो,…
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महंत नरेंद्र गिरी जी का शव फंदे से लटकता मिला है, पहली नजर में ये आत्महत्या लग रही है। सबको ‘सामंजस्य’ सिखाने वाले लोग खुद परिस्थितियों से सामंजस्य क्यों नहीं बैठा पाते ! ‘अपनी स्थिति से राजी हो जाओ’ कह…
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संयोग को मानते हैं? नहीं मानते हैं तो आपको अटल बिहारी बाजपेयी और गोपालदास ‘नीरज’ के विषय में बताता हूँ। दोनों का जन्म 10 दिन के अंतराल में हुआ। दोनों के व्यक्तित्व की जाग्रत भूमि कानपुर रही और मजेदार बात…
