मेरे एक जानने वाले, जिनका छोटा सा अस्पताल चलता था। मरीजों की तादाद इतनी कम थी कि डाक्टर साहब मरीज देखने के बाद उसके साथ बैठकर घंटों बात कर लेते। साथ में मूंगफली चटका लेते। मरीज का मर्ज जानने के…
लेखक के विचार
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अमेरिका मे एक परिचित के मुहल्ले वाले फेसबुक ग्रुप मे किसी ने पोस्ट डाली कि उनके एक परिचित का उनकी बीबी से झगड़ा हो गया है। बीबी ने उन्हें और बच्चों को घर से निकाल दिया है। उनके पास रहने…
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लखनऊ में अभी शहीद पथ पर एक ट्रक जा रहा था किसी का सामान लेकर. ट्रक से एक कपड़े की जूता रखने वाली यूज्ड अलमारी गिरी. ऐसी नई अलमारी 300 रुपए की मिलती है. आनन फ़ानन में लगा जैसे अमृत…
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चलचित्रनितिन त्रिपाठीमुद्दालेखक के विचार
ब्रांड और ब्रांड अंबेसडर की ताक़त
by Nitin Tripathi 311 viewsTV पर शाहरुख़ खान आते हैं अजय देवगन के साथ दो रुपए वाला पान मसाला बेंचते हुवे. मुझे मालूम है शाहरुख़ खान ऐसे दस मसाला वालों को ख़रीद लें. मैं ब्रांड शाहरुख़ का कोई फ़ैन भी नहीं. पर मुझे और…
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मोबाइल, इन्टरनेट के युग में मनोरंजन के तमाम प्लेटफार्म उपलब्ध है। इसलिए आज के युवा दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले फिल्मी संगीत कार्यक्रम ‘चित्रहार’ तथा ‘रंगोली’ की कीमत क्या समझेंगे भला!! रविवार की सुबह रंगोली तथा बुधवार-शुक्रवार की रात में…
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टेलीविज़न आज भी खरीदे जा रहें हैं लेकिन वो दौर दूसरा था जब बहुत से घरों में टेलीविजन का आगमन ‘धार्मिक धारावाहिक’ की धारा में डूबने, तैरने एवं गोते लगाने की उत्सुकता एवं ललक में हुआ। टेलिविज़न से पूर्व रामायण…
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अमेरिका में 9/11 हमला हुआ था, उस वक्त मैं अमेरिका में ही था. अमेरिकन मीडिया की चौबीस घंटा लाइव रिपोर्टिंग थी लेकिन कोई इस बात का ज़िक्र तक न कर रहा था कि कितने लोगों की मृत्यु हुई. पूरा फ़ोकस…
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चूंकि भारत से गया था तो अमेरिका मे मुझे ड्राइविंग मे विशेष दिक्कत हुई। ढेरों टिकट मिलीं, साथ ही साथ अमेरिकन सरकार ने यह पक्का कर लिया कि मुझे मनुष्यों के समाज वाली ड्राइविंग आ जाए। प्रथम तो लाइसेंस ठोंक…
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आज दो अलग अलग विचारधारा के महत्वपूर्ण लोग इस दुनिया को छोड़ कर गये। एक थे छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को लोक तक पहुंचाने में अपना जीवन खपाने वाले,पद्मविभूषण और महाराष्ट्रभूषण पुरस्कार से सम्मानित माता सरस्वती के वरद पुत्र…
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जलज कुमार मिश्रामुद्दालेखक के विचार
मोबाइल वाली जनरेशन और पुरानी मान्यताये
by Jalaj Kumar Mishra 384 viewsमोबाइल वाली जनरेशन ना तो कौवे का उचरना जानती है और नाही वह चिट्ठी में लिपटी हुई चिंता और वेदना को समझ सकती है। इसके साथ ही अभी तक वह, यह समझने में असमर्थ है कि पुरानी पीढ़ी जब नयी…
