TV पर शाहरुख़ खान आते हैं अजय देवगन के साथ दो रुपए वाला पान मसाला बेंचते हुवे. मुझे मालूम है शाहरुख़ खान ऐसे दस मसाला वालों को ख़रीद लें. मैं ब्रांड शाहरुख़ का कोई फ़ैन भी नहीं. पर मुझे और…
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मोबाइल, इन्टरनेट के युग में मनोरंजन के तमाम प्लेटफार्म उपलब्ध है। इसलिए आज के युवा दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले फिल्मी संगीत कार्यक्रम ‘चित्रहार’ तथा ‘रंगोली’ की कीमत क्या समझेंगे भला!! रविवार की सुबह रंगोली तथा बुधवार-शुक्रवार की रात में…
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टेलीविज़न आज भी खरीदे जा रहें हैं लेकिन वो दौर दूसरा था जब बहुत से घरों में टेलीविजन का आगमन ‘धार्मिक धारावाहिक’ की धारा में डूबने, तैरने एवं गोते लगाने की उत्सुकता एवं ललक में हुआ। टेलिविज़न से पूर्व रामायण…
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चिकित्सा जगतनयानितिन त्रिपाठीमुद्दा
भारत में आमिक्रान कोरोना का एक और वेरियंट
by Nitin Tripathi 504 viewsआमिक्रान ने धीमे धीमे अपने पैंर भारत में बढ़ाना आरम्भ कर दिया है. विदेशों में बसे रिश्तेदारों से जो समझ आ रहा है वह यह है कि आमिक्रान के प्रकोप से बचना मुश्किल है. अच्छी बात यह है कि सिंप्टमस…
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अमेरिका में 9/11 हमला हुआ था, उस वक्त मैं अमेरिका में ही था. अमेरिकन मीडिया की चौबीस घंटा लाइव रिपोर्टिंग थी लेकिन कोई इस बात का ज़िक्र तक न कर रहा था कि कितने लोगों की मृत्यु हुई. पूरा फ़ोकस…
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चूंकि भारत से गया था तो अमेरिका मे मुझे ड्राइविंग मे विशेष दिक्कत हुई। ढेरों टिकट मिलीं, साथ ही साथ अमेरिकन सरकार ने यह पक्का कर लिया कि मुझे मनुष्यों के समाज वाली ड्राइविंग आ जाए। प्रथम तो लाइसेंस ठोंक…
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अखिलेश भैय्या की जेब में बोतल क्या दिखी, लोग मज़े लेने लग गए. वैसे यह कोई भी बोतल हो सकती है. बड़े लोग बड़ी बातें. एक बार एक वरिष्ठ पूजनीय गुरु जी के स्वागत में मुझे लगाया गया. उनके साथ…
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ऐतिहासिकनयानितिन त्रिपाठीसच्ची कहानियांसामाजिक
पराग अग्रवाल ट्विटर के सीईओ
by Nitin Tripathi 607 viewsभारतीय मूल के पराग अग्रवाल ट्विटर के सीईओ घोषित किए गए हैं। बिल्कुल सही समय है ब्रेन ड्रेन को डिस्कस करने का। बड़ा टॉपिक है तो केवल टेक्नॉलजी ब्रैन ड्रेन डिस्कस है इस पोस्ट पर। नब्बे के दसकों मे सरकारों…
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अर्थव्यवस्थाऐतिहासिकनितिन त्रिपाठीभारत निर्माणसच्ची कहानियां
भारत की अद्भुत खोज यू .पी .आई.
by Nitin Tripathi 1,970 viewsप्रायः जब आप विदेश जाते हैं तो आपको समझ आता है थोड़ी गुस्सा भी आती है कि आधुनिक विश्व मे भारतीयों का इनोवेशन शून्य के बराबर हैं। भारत में खोजी एक भी चीज ऐसी नहीं दिखती जो विश्व से बेहतर…
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एक कड़वा सच यह है कि किसान बिल वापस ही होना था, बस मौके का इंतजार था कि ऐसा न लगे सरकार डर कर / धमकी से वापस ले रही है। जैसे ही थोड़ी शांति आई, कोई भारत बंद आदि…
