Home राजनीति कश्मीर फ़ाइल्स में जो दिखाया गया है वह आइसबर्ग की एक टिप है

कश्मीर फ़ाइल्स में जो दिखाया गया है वह आइसबर्ग की एक टिप है

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कश्मीर फाइल्स पर लोगों की प्रतिक्रिया अचरज में डालने वाली है । ऐसा लगता है जैसे कोई बहुत बड़ा रहस्य था जो पर्दे पर उद्घाटित कर दिया गया हो । भाई आप भारत के नागरिक हैं , सत्तर साल से कश्मीर सुलग रहा है तो आपको जानकारी क्यों नहीं है ? क्यों आप क्रिकेट की अफीम के नशे में डूबे हुए हैं ? आप को कौन बतायेगा कश्मीर के बारे में ?
आप कहेंगे कि हमें सरकारों ने नहीं बताया , यह रहस्य हमसे छुपा कर रखा गया !
आपने फिल्म देखी होगी तो यह भी देखा होगा कि फिल्म का हीरो कृष्णा पंडित जेएनयू में पढ़ता था । उसकी माँ शारदा देवी को आरी से चीर दिया गया था और भाई शिवा को माथे पर गोली मार दी गई ।कृष्णा बच्चे से जवान हो गया लेकिन उसे यही बताया गया कि उसके माँ बाप स्कूटर एक्सीडेंट में मारे गये । आपको क्या लगता है कि उससे माँ बाप की हत्या का रहस्य क्यों छुपाया गया होगा ? सिर्फ इसलिये कि अगर बचपन में ही बता दिया जायेगा तो उसका भविष्य चौपट हो जायेगा । बड़ा होगा तो ख़ुद जान जायेगा ।
और अंत में भी किसी ने बताया नहीं उसे केवल कश्मीर फाइल्स उसके सामने रख दी गईं जिनमें मिथुन चक्रवर्ती ने केवल अख़बारों की महत्वपूर्ण कटिंग सहेज कर चिपका रखी थीं । पिछले बत्तीस साल के अख़बारों में सब कुछ छपा है । जिन्हें जानने की जिज्ञासा रही है उन्हें सब कुछ पता है । जिन्हें नहीं पता है उनकी दिलचस्पी नहीं है जानने में कि कश्मीर में क्या हो रहा है ।
स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना की पत्नी कोर्ट में चली गई हैं फिल्म के ख़िलाफ़ कि उनके पति को सड़क पर गोली से मारते हुए दर्शाया गया है जबकि उनकी मौत बहुत दर्दनाक तरह से 27 गोलियाँ मार कर हुई थी ।उनके माता पिता को भी आतंकियों ने मार डाला ।
ज़ाहिर है कि फिल्म में जो दिखाया गया है वह आइसबर्ग की एक टिप है । वास्तविकता इससे कहीं वीभत्स रही है जो दिखाई भी नहीं जा सकती । कश्मीर पर ढेरों किताबें छपी हैं , गिरिजा देवी के पोस्टमार्टम पर वीभत्स रस की कविता भी है , अख़बार भरे पड़े हैं १९ जनवरी की घटनाओं पर और भागे हुए पंडितों के संस्मरण भी हैं पर पंडित हिंदू समाज की निरंतर उपेक्षा के शिकार रहे हैं । ये अपने देश में शरणार्थी हैं अगर ये यज़ीदियों और सीरियाई शरणार्थियों की तरह यूरोप गये होते तो इन्हें कुछ एक्सपोज़र मिलता , इनकी बात कोई सुनता । कश्मीर फाइल्स फिल्म हिट हो जाने के बाद भी यह देखने वाली बात होगी कि हिंदू समाज कितना इनकी मदद में आगे आते हैं ।
यह सिर्फ बकवास है कि इतिहास छुपाया गया । स्कूल के बच्चों को क्यों पढ़वाना चाहते हैं यह सारा हत्याकांड जब कृष्णा पंडित तक से उसके परिवार का इतिहास छुपाया जाता है ।
असल में पढ़ना इस देश में एक बोझ है वरना इस देश में पढ़ने वालों को सब कुछ उपलब्ध है । पीएन ओक को पढ़िये, औरंगज़ेब के बारे में जानना है तो जदुनाथ सरकार को पढ़िये , ईश्वरी प्रसाद, आशीर्वादी लाल ने कुछ नहीं छुपाया है । दक्षिण भारत का इतिहास जानना है तो नीलकंठ शास्त्री को पढ़ें । बाशम की अद्भुत भारत या incredible India पढ़िये अपने इतिहास पर गर्व होगा । मगर इतना सब किशोरावस्था में नहीं पढ़ाया जा सकता । उप्र के स्कूलों मे दसों गुरुओं का इतिहास नहीं पढ़ाया जा सकता और पंजाब में आपको सिख हिस्ट्री पढ़नी ही पड़ेगी ।
शिक्षा पहले राज्य सूची में थी अब समवर्ती सूची में है ।
अब यह आप पर है कि आप क्या पढ़ना चाहते हैं ? पढ़ना चाहते भी हैं या नहीं । सोनाक्षी सिन्हा के घर का नाम रामायण है , पिता चार भाई हैं राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न मगर उन्हें नहीं पता कि हनुमान जी लक्ष्मण जी के लिये संजीवनी लाने गये थे तो क्या इसके लिये सरकार दोषी है ?
शिया लोग घर घर मजलिस बुला कर हज़रत हुसैन की शहादत के मातम को हज़ार साल बाद भी ज़िंदा रखते हैं । उनका बच्चा बच्चा जानता है कि हज़रत फ़ातिमा का हक़ मारा गया । आप अपने पड़ोसी को भी नहीं जानते तो फ़िल्म देखने के बाद मातम क्यों है ?
पढ़ने की आदत डालिये और सत्साहित्य पढ़िये। कम से कम रामधारी सिंह दिनकर की संस्कृति के चार अध्याय तो पढ़ ही डालिये । छोटी किताब पढ़नी है तो Abhijeet Singh की इनसाइड द हिंदू मॉल ही पढ़ डालिये ।
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