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तो आप का कहना है कि आप वैचारिकता को परोस रहीं हैं

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तो आप का कहना है कि आप वैचारिकता को परोस रहीं हैं लेकिन एक वैचारिक अलंकरण से लिखी गयी पोस्ट जिसमे ” एसिड” कीटों को साफ करने उपमा दी जा रही है , और सामाजिक कीट को वैचारिकता से खत्म करने की बात की जा रही है उस पर आप FIR करा रहीं हैं।

 

आपका कहना है हिंसा बर्दाश्त नहीं पर उसमें तो सिर्फ अलंकरण था हिंसा नहीं , और इन अलंकरणों से आप को क्या फर्क पड़ता है आप तो खुद कहती हो खुद को बिगाड़ने में आप ने बड़ी मेहनत की है तो फिर जब सबको बिगाड़ कर अपने जैसा बनाना है तो ये बहाना क्यों…?
यह तो आपकी कमजोरी हुई..?
ऐसे ही कास्टमेटिक नारीवादियां कमजोर होती हैं क्योंकि कृत्रिम और मशहूर होने की इच्छा रखने वाले नारीवादी नारे ऐसे ही खोखले होते हैं।
मुझे इसी पटल पर बहुत बुरा ट्रोल किया गया है , बहुत बुरी बुरी बातें कही गयी हैं पर मैंने हर एक का सिर्फ जवाब दिया है किसी पर भी FIR की बात नहीं लायी।
जबकि ट्रोल करने वालों की इतनी भी औकात नहीं थी कि वो मेरा चप्पल तक उठा सके, वो सभी किसी भी स्टेट किसी भी नेता के समर्थक क्यों न हों लेकिन उन सबको 24 घंटे के अंदर अंडर कस्टडी करवाकर 14 दिन तक लगातार उनकी ठुकाई करवा सकती हूँ,जेल के अंदर हर एक घंटे पर उनका सत्कार करवा सकती हूँ लेकिन नहीं मैंने इसका सहारा नही लिया…?
क्यों..! पता है ..?
ये ताकत के दम पर दबाना , और जल्दी ही give up करके बहाना ढूढ कर FIR करवाकर अपनी बात को मनवाना या प्रभाव जमाना उस मत को और भी कमजोर कर देता है जिसे आप स्थापित करवाना चाहते हो…..
छद्म वामपंथ और नारीवाद कायर तो होता ही है क्योंकि उसके पास अपनी कोई विचारधारा नहीं होती सिवाय मार्केट में खुद को स्थापित करने के…

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