Home हमारे लेखकनितिन त्रिपाठी पूर्व जब अखिलेश मुख्य मंत्री बने

पूर्व जब अखिलेश मुख्य मंत्री बने

by Nitin Tripathi
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आज से दस वर्ष पूर्व जब अखिलेश मुख्य मंत्री बने थे तो सबमें एक नया जोश था. वह जिन्होंने उन्हें वोट दिया और जिन्होंने नहीं भी दिया सब अखिलेश की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देखते थे. आस्ट्रेलिया से इंजीनियरिंग पढ़ भारत वापस आकर 35 वर्ष में मुख्य मंत्री बने युवा नेता को पूरे प्रदेश के युवा हसरत भरी निगाहों से देखते थे. अखिलेश सभी धर्म सभी जातियों के नेता थे.

कल अंजना ॐ कश्यप के साथ अखिलेश का इंटर्व्यू देखा. एक पराजित खीझे हुवे नेता का प्रतिबिम्ब नज़र आया जिसका चुनावी मुद्दा इतना है कि उसने सूची बनवा रखी है, एक बार सत्ता में आया तो बदला लेगा. इस जाड़े में भी क्रोध वस या किसी दवा वस पसीना आ रहा था. शब्द और उनका अर्थ स्पष्ट न था. वह जैसे एक छोटा ट्रोल इंटर्व्यू दे वैसे बेहेव कर रहे थे. अखिलेश का बार बार फ़ोकस था कि वह यादवों के नेता हैं. फ़र्गेट पूरा समाज यहाँ तक कि अखिलेश अब खुद को उन मुस्लिमों का नेता भी नहीं बोलते जिनके वोट इन्हें मुफ़्त मिलने हैं. मुलायम सिंह OBC नेता थे, कुर्मी, लोधी सब जातियाँ साधी हुई थीं तो जनेश्वर मिश्र जैसे क़द्दावर ब्राह्मण नेता को भी साथ रखते थे. राजनीति के महज़ दस वर्षों में अखिलेश अब यादव नेता मात्र बचे.

इतना ही नहीं यथा नेता तथा प्रजा, आप अखिलेश के साथ वालों को व्यक्तिगत न भी जानते हों, अखिलेश की फ़ेस बुक वाल देख आइए. केवल और केवल जैसा अखिलेश ने बोला कि वह यादव नेता मात्र हैं तो उनके समर्थक भी इसे चरितार्थ करते नज़र आते हैं.

इन चुनावों में अखिलेश द्वितीय आएँगे क्योंकि मुस्लिम वोट नेगेटिव वोट है, उसका केवल मक़सद यह है कि जो भी भाजपा को हराने में थोड़ा भी सक्षम दिखे उसी को जाए. इस वोट की वजह से इन चुनावों में अखिलेश फ़िर भी दो डिजिट में पहुँच जाएँगे. पर जिस दिन इस वोट में इतनी समझ हुई कि ऐसे जूते खा कर वोट देने से अच्छा है ओवेसी को वोट दो, अखिलेश जी सिंगल डिजिट भर के नेता रह जाएँगे.
राहुल गांधी से भी ज़्यादा किसी नेता ने यदि निराश किया तो वह अखिलेश ही हैं.

 

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