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बीस पचीस दिन पूर्व उत्तर प्रदेश मे

by Nitin Tripathi
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आज से बस बीस पचीस दिन पूर्व उत्तर प्रदेश मे बहुत जबरदस्त घमासान चल रहा था – चुनावी।

 

ढेरों कट्टर हिन्दू मित्र चुनाव के समय कोई इस वजह से कि उसके नेता को टिकट न मिला, तो कोई सरकारी नौकरी / पेंशन की वजह से, तो कोई जातीय समीकरण से हिन्दूवादी चोला उतार चुका था।
मैंने चुनाव के समय भी यही कहा था और अब फिर कह रहा हूँ, हिंदुवों का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि वह वोट डालते समय हिन्दू नहीं रहते। यदि योगी जी जैसे व्यक्ति से कोई हिन्दूवादी असन्तुष्ट हो तो उसका कुछ नहीं हो सकता। पर जो है सो है।
इन चुनावों मे जीत दिलाई मोदी जी के राशन और योगी जी के प्रशासन ने। साथ ही जीत दिलाई जातियों का छाता बना उसे हिन्दुत्व की पतली डोरी से बांधे रखने की कला ने।
भाजपा नेत्रत्व ने योगी जी के प्रशासन को सराहा और दूसरी बार वह मुख्य मंत्री बने। साथ ही Keshav Prasad Maurya जी को चुनाव हारने के पश्चात भी दुबारा फिर से उप मुख्य मंत्री बनाया क्योंकि यह उनका कौशल था कि अति पिछड़ी जातियाँ एकजुट रहीं भाजपा के पीछे। यद्यपि सपा ने ताकत लगा राखी थी और ऐन मौके पर भाजपा मे स्वामी प्रसाद के नेत्रत्व मे मची भगदड़ से संदेश भी गलत जा रहा था।
वहीं मीडिया के एक वर्ग ने योगी जी ठाकुर वादी हैं के नाम से ब्राह्मण बनाम ठाकुर की खाई पाँच साल खींचने की कोशिश की। ऊंचाहार हत्या कांड हो या गृह मंत्री अजय मिश्र के बेटे के किसानों के साथ हुई मुठभेड़ में चार भाजपा कार्यकर्ताओं के मरने का मामला। विकास दुबे जैसे कांड हों – इन सबमें जबरदस्त ब्राह्मण बनाम भाजपा खाई खींचने की कोशिश की गई। इन सारे ही मुद्दों पर भाजपा की ओर से Brajesh Pathak पूरे पाँच साल सबसे बड़े ब्राह्मण नेता बन कर खड़े रहे। जहां जरूरत थी वहाँ उन्होंने कार्यकर्ताओं / पीड़ित का साथ दिया और जहां मुकाबला करना था तो विकास दुबे जैसे केस मे जम कर सरकार की ओर से बचाव भी किया। भले ही उप मुख्य मंत्री दिनेश शर्मा जी थे, पर जमीन पर ब्राह्मणों के बीच पाठक जी ही दिखते थे सब जगह। इन्हीं सबका परिणाम रहा कि अंत तक आते आते चुनावों मे ब्राह्मण वोट अधिसंख्य भाजपा मे ही गया।
और इसी के पुरस्कार स्वरूप उन्हें भी उप मुख्यमंत्री बनाया गया। यकीन मानिए यदि नॉन यादव ओबीसी जातियाँ या ब्राह्मण वोट थोड़ा भी उधर खिसक जाता तो आज न योगी जी मुख्य मंत्री बनते न हम आप यह समीक्षा लिख रहे होते।
वर्तमान भाजपा पेरफ़ॉर्मेंस बेस्ड भाजपा है। यह वह भाजपा है जो कांग्रेस से हेमंत बिसवा को लाकर उन्हें आसाम का मुख्य मंत्री और नॉर्थ पूर्वी का सबसे बड़ा भाजपा नेता बनाती है। यूपी मे भी जो मंत्री उपयोगिता / पेरफ़ॉर्मेंस के स्केल पर खरे नहीं उतरे, वह भले ही योगी जी को प्रिय हों या मोदी जी को उन्हें हटाया गया, नए लोगों को मौका दिया गया।
अब फिर से मीडिया/ एक वर्ग शक्रिय हो जाएगा डिवीजन क्रीऐट करने में। पहले ठाकुर / ब्राह्मण, अगड़ा / पिछड़ा डिवीजन था। अब मोदी / योगी मे संघर्ष, मुख्यमंत्री / उप मुख्य मंत्री मे संघर्ष जैसे मुद्दे चलेंगे कुछ दिनों तक।
पर अंततः बात यही है कि यह जीत जिनकी है, उन्हें इसका श्रेय दिया गया। यही एक संतुलित लोकतान्त्रिक दल मे होता है। भाजपा ही एक ऐसा दल है, जहां आप अपनी काबिलियत के आधार पर एक कार्यकर्ता बन कर आते हैं और प्रधान मंत्री बन जाते हैं। लोकतंत्र है, जिसने अच्छे परिणाम दिए, उन्हें उसका पुरस्कार दिया जाना स्वाभाविक है, स्वस्थ लोकतान्त्रिक दल की निशानी है।

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