Home राजनीति भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मनोज मिश्रा का निधन

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मनोज मिश्रा का निधन

by Nitin Tripathi
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पिछले वर्ष महामारी में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता Manoj Mishra दादा की तबियत ख़राब थी और वह अस्पताल में थे.
३ मई 2021 रात्रि लगभग चार बजे के आस पास अकस्मात् सपना आया. सपने में उनका चेहरा सुर्ख़ काला, इतना काला कि चेहरा दिख न रहा था. केवल एक तहमत जैसा कुछ पहन रखा था. मुझे सपने में डर लगा और मैं चीखने लगा. पत्नी ने जगाया, उठ कर पानी पिया. लगा कि कुछ गड़बड़ है. इतनी सुबह फ़ोन करना भी अनुचित लगा. मनोज जी के भाई Kunal Mishra से बात हुई पता चला कुछ मिनट पूर्व ही मनोज जी का देहांत हो गया.
राजनीति में और वह भी विशेष कर भाजपा में अपवादों को छोड़ दिया जाए तो अगर कोई विधायक सांसद छोड़िए ज़िलाध्यक्ष भी बन जाता है तो वह अपनी ओर से फ़ोन करना हाल चाल लेना बंद कर देता है. मनोज जी पंद्रह साल भाजपा के प्रवक्ता रहे, समय था जब उत्तर प्रदेश भाजपा के सबसे ताकतवर नेताओं में थे, लेकिन उनका एक बहुत बड़ा प्लस point रहा वह सदैव सुलभ रहे. पंद्रह दिन मुलाक़ात न हो तो खुद फ़ोन करने लगते थे. और मेरे जैसा फ़ोन से दूर रहने वाला व्यक्ति हो तो फ़ेस बुक पर ही कॉमेंट / मेसेज करते कि फ़ोन करो.
यहाँ तक कि कार्य वह भी प्रवक्ता के कार्य को लेकर इतना समर्पित थे कि अस्पताल में थे, ऑक्सिजन कम थी ब्रीथिंग नहीं थी प्रॉपर, फ़ोन कर हाँफते हुवे एक सामयिक मुद्दे पर राय माँगी, एक मुद्दे पर मीडिया को उन्हें भाजपा का पक्ष लिख कर देना था, बोल वह पा नहीं रहे थे. मुझे कहना पड़ा कि यह सब भूल स्वस्थ लाभ लीजिए पहले.
अंतिम समय भी उनका यह स्नेह और यह स्वयं से काल कर बात करने की आदत मेंटेन रही. देखिए मृत्यु पश्चात भी सपने में आए और सूचित किया अनहोनी के बारे में.
सिद्धांत वादी थे और सिद्धांत के साथ ही मृत्यु हुई. भाजपा का जब गोल्डन समय आया तब भी भाजपा ने उन्हें प्रवक्ता मात्र ही रखा. समाजवादी पार्टी लम्बे समय से उन्हें अपने पक्ष में चाहती थी क्योंकि सपा में प्रवक्ताओं वह भी प्रबुद्ध प्रवक्ताओं की कमी है. सपा से लूक्रटिव ऑफ़र भी रहते, लाल बत्ती, विधायक से लेकर राज्य सभा सदस्य तक. बात करते फ़िर कहते हमें अब कहाँ जाना, जब बुरे दिनों में पार्टी न छोड़ी तो अब क्यों जाएँगे.
2007 के चुनावों के समय राम मंदिर सीडी रिलीज़ कांड में उन्हें भाजपा ने बलि का बकरा बना दिया. सारा दोष उन्ही पर डाल दिया कि वह सीडी उन्होंने व्यक्तिगत रिलीज़ की. सीडी रिलीज़ के समय जो बड़े नेता थे भी वह अनभिज्ञ थे. जिस समय उन्हें पार्टी की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी पार्टी ने उन्हें छोड़ दिया. चुनाव आयोग पीछे पड़ गया. केंद्र में कांग्रेस सरकार, CBI. प्रदेश में मुलायम सिंह तो प्रदेश पुलिस पीछे. तहलका ने स्ट्रिंग अलग किया. उनका दोष क्या – राम मंदिर समबंधित एक सीडी रिलीज़ की थी पार्टी ने जिसमें प्रवक्ता होने के नाते वह फ़्रंट पर थे. पार्टी ने खुद को बचाते हुवे उन्हें कुछ समय के लिए किनारे भी कर दिया. उन्हें आघात भी लगा, हृदय की सर्जरी हुई. कोई और होता तो तुरंत भाजपा छोड़ सपा में चला जाता, सत्ता की मलाई खाता. लेकिन मनोज जी थे, केस निपटे. फ़िर से भाजपा में और फ़िर से वरिष्ठ प्रवक्ता.
हम मज़ाक़ में बोलते थे कि भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रवक्ता कक्ष की आपके नाम रेजिस्ट्री लिख दी गई है. आजीवन यह आपका ही रहेगा. क्या पता था मज़ाक़ में कहे यह वाक्य सत्य साबित होंगे.
व्यक्ति चला जाता है, कष्ट उसके परिवारी जनों को स्थाई रहता है. हम जैसे परिचितों के पास यादें रह जाती हैं. और जीवन चलता रहता है.
मनोज जी को हृदय से विनम्र श्रधांजलि. हम सब आपको गुरु जी कहते थे, आपका यूँ असमय जाना हम सबको जाते जाते भी बहुत बड़ी सीख दे गया.

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