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किसी परीक्षा की विफलता से घबराकर कोई छात्र अपने जीवन से निराश न हों

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ताकि किसी परीक्षा की विफलता से घबराकर कोई छात्र अपने जीवन से निराश न हों। कृपया आप भी पढ़ें और दूसरों को भी पढ़वाएं।

दसवीं या बारहवीं की परीक्षाओं में जिन्होंने खूब नंबर पाए हैं, उन्हें खूब

बधाई

! लेकिन यह पोस्ट मैं उनके लिए लिख रहा हूँ, जिन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली है।

अगर आपको उम्मीद से कम नंबर मिले हैं या इस साल परीक्षा में आप सफल नहीं हो पाए हैं, तो भी निराश मत होइए। ज़िन्दगी की परीक्षा दसवीं या बारहवीं क्लास की परीक्षा से बहुत बड़ी है और स्कूल-कॉलेज की किसी परीक्षा में पास या फेल होने से ज़िन्दगी की परीक्षा के परिणाम तय नहीं होते हैं। इसलिए यह मत सोचिये कि इस परीक्षा में आपके 90-95% नंबर नहीं आए हैं या आप पास नहीं हो सके हैं, तो अब आप जीवन में कभी कुछ नहीं कर सकेंगे।
आपने कितने नंबर पाए और आपने किस कॉलेज से पढ़ाई की, उससे ज्यादा जरूरी यह है कि आपको स्वयं पर कितना भरोसा है और आप अपनी सफलता के लिए कितने संकल्पित हैं। खुद पर भरोसा रखिये और वह विषय पढ़िए जो आपकी इच्छा और क्षमता के लिए सही हो। दूसरों को देखकर अपने भविष्य की राह तय मत कीजिए।
मैं अपने खुद के अनुभव से आपको बता रहा हूँ कि एक परीक्षा में नंबर कम आने या पढ़ाई के एक-दो साल खराब हो जाने से भी ज़िन्दगी में कोई बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है।
लेकिन शर्त बस इतनी है कि आप दो बातों का ध्यान रखें:
१. एक तो ये कि दूसरों से अपनी तुलना कभी मत कीजिए। यह कभी मत सोचिये कि कौन आगे निकल गया और आप कहाँ रह गए। बस ये सोचिये कि आपको पहुँचना कहाँ है और उसके लिए क्या करना पड़ेगा।
२. दूसरी बात ये कि जीवन में कोई भी लक्ष्य इसलिए मत बनाइये क्योंकि हर कोई उसी तरफ जा रहा है। सिर्फ ये सोचिये कि आपका दिल क्या करना चाहता है और फिर पूरी मेहनत से उस लक्ष्य को पाने के लिए बढ़ते रहिये।
एक बार में सफलता न मिले, तो दोबारा प्रयास कीजिए, दूसरी बार में न मिले, तो तीसरी कोशिश कीजिए। एक दरवाजा बंद हो जाए, तो दूसरा खुलेगा, दूसरा बंद मिले, तो तीसरा खुलेगा। कोई राह न दिखे, तो अपनी राह खुद बनाइये। ये सब कुछ संभव है, सिर्फ आपको खुद पर भरोसा होना चाहिए और आपके लक्ष्य अव्यावहारिक नहीं होने चाहिए।
मैं अपने जीवन में हमेशा इन दो बातों पर कायम रहा हूँ। एक तो ये कि मेरा मुकाबला सिर्फ खुद से है, किसी और से नहीं। इसलिए मैंने कभी ध्यान नहीं दिया कि कौन कितनी मेहनत से पढ़ाई कर रहा है और कौन कितने नंबर ला रहा है। दूसरा मैंने इस बात पर भी ध्यान नहीं दिया कि कौन क्या बनना चाहता है और उसके लिए क्या कर रहा है।
दसवीं की परीक्षा में मेरे सिर्फ 65% अंक आए थे और बारहवीं में केवल 58%। उसके बाद दो सालों तक मैं एक से दूसरे कोर्स के बीच भटकता रहा क्योंकि तब तक मैं तय ही नहीं कर पाया था कि मुझे जीवन में करना क्या है।
फिर मैंने अपने छोटे-से गुमनाम शहर बालाघाट के अनजान कॉलेजों में अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की। हम उन्हें कॉलेज कहते थे लेकिन वास्तव में वे तीन-चार कमरों के छोटे-छोटे कोचिंग संस्थानों जैसे थे।
आपमें से ज्यादातर लोग गूगल की मदद के बिना मेरे शहर को किसी नक्शे पर ढूँढ भी नहीं पाएंगे और न इंटरनेट पर उन कॉलेजों के बारे में ही आपको ज्यादा कुछ मिलेगा।
लेकिन मुझे इस बात से कभी निराशा नहीं हुई। न मैंने कभी इस बात की चिंता की कि दूसरे क्या कर रहे हैं और किस कोर्स में एडमिशन ले रहे हैं। मैंने हमेशा सिर्फ इस बात पर ध्यान दिया कि मैं जीवन में क्या करना चाहता हूँ और उसके लिए क्या करना ज़रूरी है। मैंने हमेशा वही किया।
मेरे जीवन में ऐसा भी समय था, जब ज्यादातर लोगों को लगता था कि अब मैं ज़िन्दगी में कुछ नहीं कर पाऊँगा। कुछ लोगों को इससे चिंता होती थी, कुछ लोगों को दुःख होता था, तो कुछ लोगों को बहुत खुशी भी होती थी। लेकिन मैं उन बातों से बहुत ज्यादा परेशान हुए बिना अपनी राह पर बढ़ने की कोशिश करता रहा और आज भी मैं अपनी उन्हीं दो बातों पर कायम हूँ।
लेकिन इतने उतार-चढ़ावों के बावजूद भी मैंने अपने कार्यक्षेत्र में एक सफल करियर बनाया और अब मैं अमरीका की सिलिकॉन वैली में एक बहुत बड़ी कंपनी में एक बड़ी ज़िम्मेदारी निभा रहा हूँ। ऐसा करने वाला मैं अकेला भी नहीं हूँ। ऐसे सैकड़ों लोगों को भी मैं जानता हूँ जिन्होंने कई चुनौतियों के बाद भी जीवन में बहुत सफलता पाई है।
अपने-अपने क्षेत्रों के कई बड़े-बड़े दिग्गजों के साथ मैं रोज काम करता हूँ। उनको देख-देखकर मैं आज भी कुछ न कुछ रोज सीखता हूँ। कोई आईआईटी से पढ़े हैं, कोई केम्ब्रिज, हार्वर्ड, ऑक्सफोर्ड या स्टैनफर्ड विश्वविद्यालय से पढ़कर आए हैं। मैं बालाघाट में चार कमरों के इंस्टीट्यूट में पढ़कर निकला हूँ। दोनों का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन उससे कोई फर्क भी नहीं पड़ता क्योंकि मैं किसी से स्पर्धा करने और जीतने नहीं आया हूँ। मैं बस अपना काम करने आया हूँ। वो काम जो मैं करना चाहता था।
आपसे भी मैं यही कहना चाहता हूँ कि किसी नामी कॉलेज या बड़े संस्थान में अगर आपको एडमिशन नहीं मिला, तो उसे जीवन का अंत मत समझिये। आपमें अगर प्रतिभा है और कुछ करने का इरादा है, तो आपको सफलता जरूर मिलेगी।
यह सब इसलिए बता रहा हूँ ताकि आप यह समझें कि अगर दसवीं या बारहवीं में 95-98% नंबर नहीं मिल पाए या किसी बड़े नामी कॉलेज में एडमिशन नहीं मिल पाया तो ज़िंदगी खत्म नहीं हो जाती। परीक्षा में फेल भी हो जाएं, तो निराश होने की कोई ज़रूरत नहीं है। फिर से कोशिश कीजिए। एक-दो साल ज्यादा भी लग जाएं, तो भी उसका मतलब यह नहीं होता है कि जीवन में आपके लिए सब रास्ते बंद हो गए हैं।
बहुत-से लोग आज समझते हैं कि मैं जीवन में सफल हो गया हूँ। लेकिन मैं ऐसा नहीं मानता। सफलता और विफलता से परे मैं बस इस बात पर ध्यान देता हूँ कि मैं अपना काम ठीक से कर रहा हूँ या नहीं और कल मैंने जो किया था, आज उससे बेहतर किया या नहीं।
मेरे अपने अनुभव के आधार पर, आपको भी मैं यही सलाह देना चाहता हूँ कि आप भी सिर्फ खुद से स्पर्धा कीजिए और किसी भी परिस्थिति में निराशा को अपने ऊपर हावी होने मत दीजिए। प्रयास जब असफल होते हैं, तो दुख होना स्वाभाविक है लेकिन आपमें उस दुख और निराशा से बाहर निकलने का विश्वास होना चाहिए। इस बात को कभी मत भूलिये कि आप अगर अपना आत्मविश्वास कायम रखेंगे, तो आप जीवन में सब-कुछ कर सकते हैं। अगर असफलता भी मिले, तो निराश हुए बिना ये समझने की कोशिश कीजिए कि कमी कहाँ रह गई थी और उसे सुधारकर नए उत्साह के साथ फिर प्रयास में जुट जाइये। आपको सफलता जरूर मिलेगी।
मैंने आपको इतनी बातें अपनी तारीफ सुनाने के इरादे से नहीं बताई हैं। मैं आपको बस यह बताने की कोशिश कर रहा हूँ कि अगर मैं कर सकता हूँ, तो आप भी ज़रूर कर सकते हैं। बस कोशिश करते रहिए और निराशा को दूर रखिये।
यह बात सबसे पहले अभिभावकों को समझनी चाहिए और फिर अपने बच्चों को समझानी चाहिए।
अपने बच्चे को स्वयं के लिए सफलता पाने और अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए प्रेरित कीजिए, दूसरों के बच्चों से आगे निकलने की होड़ के लिए नहीं। उसके नंबर बढ़ाने की बजाय उसका आत्मविश्वास बढ़ाने पर ध्यान दीजिए। उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा, तो नंबर भी अपने आप बढ़ते जाएंगे। बस इस बात का ध्यान रखिये कि कॉन्फिडेंस ओवर-कॉन्फिडेंस में न बदल जाए।
किसी भी परीक्षा का परिणाम जीवन की सफलता का पैमाना नहीं है इसलिए उस भ्रम से आपको बाहर निकल जाना चाहिए। आपको मेरी हार्दिक शुभकामनाएं!
सुमंत विद्वांस #Sumantv #सुमंत

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