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अखिलेश यादव के बहाने कामरेड गुरु प्रसाद तिवारी की याद

दयानंद पांडेय

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“अखिलेश यादव के बहाने कामरेड गुरु प्रसाद तिवारी की याद”

आज अखिलेश यादव की एक बात ने मुझे चौंका दिया। औरैया की एक चुनावी सभा में अखिलेश यादव ने कहा कि क़ानून व्यवस्था को न मानने वाले लोग मुझे वोट न दें। ऐसे लोग समाजवादी पार्टी को वोट नहीं दें, जिन्हें कानून का सम्मान नहीं करना है या जिन्हें गरीबों पर अन्याय करना है। अखिलेश यादव ने कहा कि हम यह कह कर जा रहे हैं कि जिन्हें कानून-व्यवस्था को हाथ में लेना है, कानून को नहीं मानना है, वह समाजवादी पार्टी को वोट ना दें। जिन्हें गरीब पर अन्याय करना है, वह सपा को वोट ना दें।
असल में क़ानून व्यवस्था और सपा काल की गुंडई पर चौतरफा और निरंतर घिरते जाने पर हताश और उदास हो कर आज यह बात औरैया में कह रहे थे। क़ानून व्यवस्था और सपा सरकार दोनों दो बात मान ली गई है। सपा की गुंडई सब की जुबान पर है। अखिलेश यादव के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है। सरकारी आवास से टाइल और टोटी की बात पर अखिलेश के पास एक बेवकूफी भरा जवाब था कि हम ने अपने खर्च पर टाइल , टोटी लगाई थी , इस लिए उखाड़ ले गए। अलग बात है सरकारी आवास में सारा खर्च सरकार ही करती है। फिर दुनिया में ऐसी कोई टाइल नहीं बनी अभी तक जिसे उखाड़ कर दुबारा कहीं लगाया जा सके।
इसी तरह 2020 में दिल्ली विधान सभा चुनाव में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कांफ्रेंस में अपने तमाम काम स्कूल , सड़क , अस्पताल , बिजली , पानी , वाई फाई आदि की उपलब्धियों का बखान करते हुए कहा था कि अगर आप को लगता है कि मैं ने काम किए हैं और कि इन काम को और आगे बढ़ाया जाना चाहिए तो मुझे ज़रूर वोट दीजिए। अगर आप को लगता है कि मैं ने कोई काम नहीं किया है तो मुझे बिलकुल वोट मत दीजिए। अरविंद केजरीवाल का यह आत्मविश्वास देखने लायक था।
बहरहाल , अखिलेश यादव के आज इस कहे के बहाने गोरखपुर के एक कामरेड दोस्त गुरु प्रसाद तिवारी की बरबस याद आ गई। गोरखपुर के कामरेड गुरु प्रसाद तिवारी सी पी आई एम एल से थे। चुनाव भी लड़े एक बार। अपना प्रचार खुद करते थे। एक रिक्शा ले कर माइक से कहते घूमते-फिरते थे कि अगर आप मेरे विचारों से सहमत हों , तभी मुझे वोट दें। अगर मेरे विचारों से सहमत न हों तो वोट न दें। लोग उन का विचार ही नहीं जान पाए। सहमत-असहमत की बात तो बहुत दूर की बात थी। लेकिन इस एक बार-बार के ऐलान से गुरु प्रसाद तिवारी कुछ लोगों के बीच चर्चा का सबब ज़रूर बन गए।
लोग कहते कि अजब आदमी है जो कहता घूम रहा है कि मेरे विचार से सहमत नहीं हैं तो मुझे वोट न दें। ऐसा भी कहता है कोई चुनाव में। ज़रूर कोई पागल आदमी है। लेकिन गुरु प्रसाद तिवारी तो ऐसे ही थे। जाहिर है कि उन्हें सौ वोट भी नहीं मिले। सो ज़मानत जब्त हो गई।
इस के पहले भी कामरेड गुरु प्रसाद तिवारी अपने गांव में अपने घर और गांव में क्रांति कर चुके थे। कामरेड गुरु प्रसाद तिवारी के पिता जमींदार तो नहीं पर बड़े काश्तकार थे। सो जब वह कामरेड बने तो पहली क्रांति घर , गांव से शुरू की। तब गांव में हल-बैल की खेती होती थी। तो हरवाह और खेत में काम करने वाले मज़दूरों को शोषित और शोषक का फर्क समझाया। बताया कि तुम्हारा खून पिया जा रहा। जितनी ज़मीन इन की , उतनी तुम्हारी। ज़मीन का मालिकाना हक़ बदलने तक सारा कामकाज बंद कर दो। काम बंद हो गया। अंतत: पिता ने मार पीट कर कामरेड गुरु प्रसाद तिवारी को किसी तरह घर से भगाया। पर उस बार फसल नहीं बोई जा सकी। सारा खेत परती रह गया। क्यों कि क्रांति के चक्कर में जुताई-बुआई में पर्याप्त देरी हो चुकी थी।
अलग बात है कि तीन दशक पहले किसी ने बात ही बात में बताया कि कामरेड गुरु प्रसाद तिवारी ने भाजपा ज्वाइन कर ली है। फिर पता चला कि वह गोरखपुर में ही पत्रकार हो गए हैं। अब कामरेड गुरु प्रसाद तिवारी क्या कर रहे हैं , कहां हैं , मुझे कोई जानकारी नहीं है। ठीक वैसे ही जैसे कई कामरेड साथियों के बारे में नहीं है।
पर ऐसे और भी कई किस्से हैं कामरेड गुरु प्रसाद तिवारी के। फिर कामरेड गुरु प्रसाद तिवारी ही के क्यों तमाम और कामरेड दोस्तों के भी हैं । उन की क्रांति , उन के अवसरवाद फिर अवसाद , उन के उलट-पलट , उन के व्यवसाय , उन के एन जी ओ , उन की नफरत , उन का बारंबार फ्लिप करना , उन का झूठ , उन का पाखंड उन का यह , उन का वह। पर यह सब फिर कभी।
अभी तो सवाल मौजू है कि सपा की सरकार बनने पर क्या अखिलेश यादव सचमुच क़ानून व्यवस्था कल्याण सिंह या योगी की तरह या अपनी बुआ मायावती की तरह चाक-चौबस्त कर पाएंगे ? अभी तो वह खुद मंच से ही पुलिस की ऐसी-तैसी करते दिख रहे हैं। अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार बघेल के काफिले पर हमला करवा रहे हैं। जहां-तहां पत्रकारों को अपनी सामने ही पिटवा रहे हैं।
देखना दिलचस्प होगा कि 2020 में अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगर मैं ने काम नहीं किया है तो मुझे वोट मत दीजिए। साथ ही 200 यूनिट फ्री बिजली का वादा भी दे दिया था और दिल्ली फिर से जीत ली थी। भाजपा टुकुर-टुकुर देखती रह गई थी। तो अखिलेश भी अब कह रहे हैं कि क़ानून व्यवस्था को न मानने वाले लोग मुझे वोट न दें। अखिलेश यादव ने भी 300 यूनिट बिजली फ्री देने का वादा किया हुआ है। तो क्या वह भी उत्तर प्रदेश जीत लेंगे। अखिलेश यादव अकेले दम पर मेहनत भी ख़ूब कर रहे हैं। सामने मोदी , योगी समेत समूची भाजपा की टीम है। इधर अकेले अखिलेश यादव हैं। नाम मुलायम , गुंडई क़ायम की विरासत के साथ।

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