Home अमित सिंघल एक उड़ता हुआ विराट भ्रष्टाचार जिसे अब जमीन पर लाया गया

एक उड़ता हुआ विराट भ्रष्टाचार जिसे अब जमीन पर लाया गया

by अमित सिंघल
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एक उड़ता हुआ विराट भ्रष्टाचार जिसे अब जमीन पर लाया गया

नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 23 मार्च को लोकसभा में कहा:
एयर इंडिया देश का नवरत्न था । निजी क्षेत्र से इसकी शरूुआत हुई, इसका राष्ट्रीयकरण करने के बाद कई साल इसे सफलतापूर्वक चलाया गया था। जो आज एयर इंडिया की स्थिति हुई है, यह स्थिति उत्पन्न क्यों हुई है, यह हमें समझने की जरूरत है।
वर्ष 2005-06 में जिस एयर इंडिया की क्षमता केवल 14 करोड़ रुपये मुनाफे की थी, उस एयर इंडिया के द्वारा 68 एयरक्राफ्ट बोईंग के खरीदवाने के मसौदे पर हस्ताक्षर किया गया और 43 एयरक्राफ्ट एयरबस के।
जिस कंपनी की क्षमता 15 करोड़ रुपये के मुनाफे की हो, उस कंपनी के द्वारा एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के द्वारा 111 एयरक्राफ्ट खरीदे जा रहे हैं। क्या कारण हो सकता है, इस पर विश्लेषण नहीं करना चाहता हूँ।
वर्ष 2005 के पहले, जो एयर इंडिया 15 करोड़ रुपये का प्रॉफिट बनाती है, जो इंडियन एयरलाइन्स 50 करोड़ रुपये का प्रॉफिट बनाती है, 50-55 हज़ार करोड़ रुपये का डेट बर्डन (उधारी) लेती है, 111 एयरक्राफ्ट्स खरीदे जाते हैं, 111 एयरक्राफ्ट्स में से 15-20, 777-300 ईआर (उस समय बोईंग का विशालतम एयरक्राफ्ट), जो जरूरत है, उस से ज्यादा खरीदे जाते हैं।
जिस कंपनी का लेवरेज (वित्तीय क्षमता) आलरेडी 5:1 है, मतलब डेट 5 और इक्विटी 1 (अर्थात पहले से ही एक रूपए की पूँजी पर पांच रुपये का उधार होना) है, उसमें आप 55 हज़ार करोड़ रुपये का ऋण लेते हो और आप दोनों कम्पनीज़ (एयर इंडिया एवं इंडियन एयरलाइन्स) का विलय करते हो। दोनों कंपनियों का कल्चर अलग है, उनकी विचारधारा अलग और उनके एम्प्लॉइज के सेवा की शर्ते अलग है, उन दोनों कम्पनीज को आप विलय कर देते हो।
तो जो दो कम्पनीज़ वर्ष 2005 में लाभ बनाने वाली कम्पनीज़ थीं, जिस साल उनका विलय किया गया, उस साल से 3300 करोड़ रुपये का लॉस बनाने की शरुुआत की गई। वर्ष 2007-08 से 2020-21 तक हर साल 3 हज़ार से साढ़े सात हज़ार करोड़ रुपये का लॉस और 85 हज़ार करोड़ रुपये का एयर इंडिया का टोटल लॉस हुआ।
The result of acquisition of 111 aircraft; sale of five B-300 200EK aircraft; buying of 15 B-777 300ER aircraft; merger of two companies with totally two different cultures, two different visions, two different employees retention programmes is a loss of Rs.20 crore per day.
वर्ष 2004-05 में द्विपक्षीय समझौते के अंतर्गत हमारी एयरलाइन एवं विदेशी एयरलाइन्स को कुल 5.1 करोड़ सीट उपलब्ध थे, अर्थात 5.1 करोड़ यात्रियों को भारत से विदेश एवं भारत की ओर वार्षिक उड़ान की अनुमति थी। एकाएक उसको बढ़ाकर 18 करोड़ सीट कर दिया गया, जबकि भारतीय हवाई कंपनियों के पास इतनी क्षमता नहीं थी। इसके कारण हमारी एयरलाइन्स की क्या स्थिति हुई?
14 साल का कुल नुकसान 85 हज़ार करोड़ रुपये, भारत सरकार द्वारा 54 हज़ार करोड़ रुपये धन उपलब्ध (equity infusion) करवाना; ऊपर से सरकारी अनुदान 50 हज़ार करोड़ रुपये; 190 हज़ार करोड़ तो यह हो गया। और वर्तमान में उधारी (नेट डेट) 66 हज़ार करोड़ रुपये था तो 2 लाख 50 हज़ार करोड़ रुपये की खाई एयर इंडिया में उत्पन्न हो गई थी।
यह पैसा भारत सरकार का नहीं है। यह पैसा भारत की 135 करोड़ जनता का है।
तभी प्रधानमंत्री जी ने यह संकल्प लिया कि इस घाटे को बंद करना ही होगा और इसका विनिवेश करना ही होगा जिससे भारत सरकार और जनता के पैसे का संरक्षण किया जाए। उज्जवला के लिए, राशन के लिए, सड़कों के लिए, जल जीवन मिशन के लिए और आम जन की भलाई के लिए इसका सदपुयोग किया जाए।

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