Home अमित सिंघल एक कन्या पढ़ाने पर पूरा परिवार शिक्षित हो जाता है।

एक कन्या पढ़ाने पर पूरा परिवार शिक्षित हो जाता है।

by अमित सिंघल
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सभी को पता है कि एक कन्या पढ़ाने पर पूरा परिवार शिक्षित हो जाता है। कारण यह है कि जहाँ पुरुष स्वयं की जीवन-यापिका पर ध्यान देगा, वही स्त्री बच्चो को शिक्षित, सुरक्षित और सुसंस्कृत करने में अपना ध्यान लगाएगी।
लेकिन एक अन्य लाभ भी है। पढ़ी-लिखी महिला देर से विवाह करती है; उसे परिवार नियोजन के बारे में जानकारी है; वह अपना परिवार छोटा रखती है और दो बच्चो के बीच में कुछ वर्ष का गैप।
भारत की जनसँख्या वृद्धि दर रिप्लेसमेंट लेवल के नीचे आ गयी है। अर्थात प्रति महिला दो बच्चे हो रहे है (total fertility rate – TFR); जबकि जनसँख्या स्थिर रखने के लिए 2.2 बच्चे होना चाहिए। मुस्लिम बहुल लक्षद्वीप में TFR केवल 1.4 एवं केरल में 1.8 रह गया है। बिहार (3), मेघालय (2.9), उत्तर प्रदेश (2.4), झारखण्ड (2.3), और मणिपुर (2.2) को छोड़कर, बाकी राज्यों में जनसँख्या तेजी से गिर रही है। इन राज्यों में भी जनसँख्या का वृद्धि दर अगले दो-तीन वर्ष में 2.2 से कम हो जायेगी।
अतः अगर मुस्लिम समाज का आधुनिकीकरण करना है, तो उनकी महिलाओ को पढ़ाइये; उन्हें देर से विवाह के लिए प्रोत्साहित कीजिए। बाकी का कार्य वे स्वयं कर लेंगी।
तभी मोदी सरकार की शादी शगुन योजना के अंतर्गत उन मुस्लिम महिलाओ को विवाह के समय 51000 रुपये की राशि देने की व्यवस्था है जिन लोगो ने स्नातक पास कर लिया है। जोर स्नातक पास करने पर है। अर्थात, लाभार्थी महिलाये उस राशि को लेते समय कम से कम 22-23 वर्ष की हो जायेगी।
आशा है कि यह धन राशि एक बड़े प्रोत्साहन के रूप में कार्य करेगी।
कट्टरपंथी के मन में “काफिरो” से भी अधिक घृणा अपने समाज की पढ़ी-लिखी महिला के प्रति है।
एक बार सोशल मीडिया देखिए कि किस प्रकार से मुस्लिम महिलाये कट्टरपंथियों के विरूद्ध आवाज उठा रही है।
क्या आप हर मुद्दे को लट्ठबाजी, बलप्रयोग, अभद्र भाषा, अराजकता के द्वारा ही सुलझाना चाहते है? क्या कभी इनके परिणामो पर मनन किया है?
अंत में, लोग लिखते है कि सारी नीति, नैतिकता, और सतर्कता भाजपा के लिए ही हैं, लेकिन बंगाल, केरल इत्यादि राज्यो में सत्ता का हिंसक इस्तेमाल से विरोधियों का दमन किया जाता है, भाजपा शासित राज्यो में भाजपा को किसने रोका हैं उसी तरीके को आजमाने के लिए, अभी आप देखिएगा पंजाब में केजरी केवल पुलिस की सहायता से क्या करतें हैं।
आप क्या चाहते है? सभी राज्य सरकारे (गैर-भाजपा एवं भाजपा), एवं केंद्र सरकार आपस में ही लट्ठबाजी, अनैतिक एवं हिंसक तरीको से लड़ जाए?
क्या आप वास्तव में चाहते है कि प्रधानमंत्री मोदी वाह्य सुरक्षा, तेज विकास, पड़ोस में स्थिरता स्थापित करना, कच्चे तेल एवं खाद के आयत का प्रबंध करना, सुशासन देना, इत्यादि छोड़कर इन छुटभैय्ये नेताओ के स्तर पर उतर आए?
आप को इसके उपसंहार का अनुमान है? सभी राज्यों की पुलिस आपस में ही भिड़ जाएगी। और इसका लाभ किसको मिलेगा? उन्हीं कट्टरपंथियों को जिन्हे आप दिन-रात कोसते है।
राष्ट्र को एक परिपक्व नेतृत्व की आवश्यकता है। ना कि अराजक तत्वों की। लेकिन यह भी उतना ही सत्य है कि कुछ राज्यों में जनता ने इन्हे भारी, बहुत भारी, बहुमत से सत्ता दी है।
केंद्र सरकार को चतुरता एवं ठन्डे दिमाग से काम लेना होगा; यही हो भी रहा है।

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