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ट्विंकल खन्ना की बुरी टाइमिंग

by ओम लवानिया
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ट्विंकल खन्ना की बुरी टाइमिंग

 

ट्विंकल खन्ना की जितनी बुरी टाइमिंग एक्टिंग में थी। उससे ज्यादा खराब टाइमिंग मुद्दे पकड़ने में है। द कश्मीर फाइल्स लाइफ टाइम बॉक्स ऑफिस के अंतिम पड़ाव पर चल रही है। अब ट्विंकल फाइल्स पर मज़ाक कर रही हैं। थोड़ा पहले करती, तो फ़िल्म को प्रमोशन मिलता।
ट्विंकल ने अपने ब्लॉग में लिखा है ‘प्रोड्यूसर के ऑफिस में एक मीटिंग में, मुझे जानकारी दी गई है कि कश्मीर फाइल्स को श्रद्धांजलि देने के लिए नई मूवी टाइटल्स की बाढ़ सी आ गई है। चूंकि बड़े शहरों का नाम पहले ही बुक कर लिया गया है, इसलिए अब बाकी बचे लोग अंधेरी फाइल्स, खार-डांडा फाइल्स यहां तक कि साउथ बॉम्बे फाइल्स नाम की रजिस्ट्री करवा रहे हैं। मैं सोच रही हूं कि मेरे कलीग्स क्या अभी भी खुद को फिल्ममेकर्स कहेंगे, या फिर इस फ्लिंग के साथ वे भी, सच्चे राष्ट्रवादी मनोज कुमार की तरह, सभी क्लर्क बन गए हैं। मैं भी सोच रही हूं, नेल फाइल्स बनाऊं। मेरी फाइल्स साम्प्रदायिकता के ताबूत में आखिरी कील न होगी।’
ऐसा नहीं है कि ट्विंकल पहली बार विवाद को गले लगाया है। इससे पहले लॉन्च गुरु की कॉफी पर बहुत कुछ विवादित कहा था। शायद उसी एपिसोड की शर्म के बाद से अक्षय कुमार 9 बजे सो व 5 बजे उठने होंगे। मीडिया के जरिये जिप वाला कृत्य भी देख चुका है देश।
अक्षय कुमार द कश्मीर फाइल्स की तारीफ करते नहीं थक रहे है। वही, पत्नी के विचार कुछ अलग ही है। यही दुनिया की रीत है। अक्षय को फ़िल्में चलानी है। ट्विंकल को कॉमरेडगिरी….ख़ैर।
तय है कि बॉलीवुड में कोई संवेदना बची नहीं है। जितने भी फाइल्स के बारे में अच्छी बातें कर रहे है न! ये दिल ने न कर रहे। बल्कि डर से कर रहे है। कि माहौल बदल रहा है। फ़िल्में चलानी है तो ट्रेंड बदल लो। वरना फ्लॉप के हवाले हो जाएंगे।
ऐसी नारियों को देखकर कंगना रनौत सटीक लगती है। जो मुखरता से मुँहतोड़ जबाव देती है। हालांकि कई बार बेवजह इधर-उधर निकल जाती है।
अभिषेक बच्चन ने तो कहा कि नहीं सुना है बुरी फ़िल्म है। जल्द फ़िल्म देखने की इच्छा जताई। जबकि उनके बाबू जी बड़े बच्चन साहब तो इतना भी न बोल पाए। लिखे भी तो अज्ञात शब्दों के सहारे…..’अब हम जानते हैं, जो हम तब कभी नहीं जानते थे’। साफ़ सन्दर्भ न दिया। न जाने सदी के महानायक को कौनसी बंदिशों ने बांध रखा है। जो खुलकर अपनी राय भी जाहिर नहीं कर सकते है।

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