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तीन कृषि कानूनों की वापसी

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शुरुआत हो गयी है, बहुत जल्दी हो गयी है…
तीन दिन पूर्व 29 नवंबर को तीन कृषि कानूनों की वापसी पर मैंने एक पोस्ट लिखी थी। पोस्ट का शीर्षक था “राजनीतिक मसखरों के राजनीतिक डेथ वारंट पर आज हस्ताक्षर हो गए हैं।”
अपनी उस पोस्ट में मैंने जिस तथ्य की ओर इंगित किया था। उसकी शुरुआत इतनी जल्दी हो जाएगी, यह उम्मीद तो मुझे भी नहीं थी। लेकिन वह शुरुआत हो गई है और पंजाब से ही हुई है। अभी धान खरीद का सीजन शुरू होने दीजिए, यह शुरुआत उस ज्वालामुखी के रूप में नजर आएगी जिसके लावे में वो राजनीतिक मसखरे भस्म होते दिखाई देंगे जिन्होंने तीनों कृषि कानूनों की वापसी के लिए नीचता और नंगई की सारी हदें पार करने वाले खालिस्तानी गुंडों और लफ़ंगों के समर्थन और सहयोग में जमकर नंगा नाच किया था।
विस्तार से यहां लिखने के बजाए, एक दिसंबर को छपी पंजाब के छोटे से कस्बे मानसा की खबर की कटिंग पोस्ट के साथ प्रस्तुत कर रहा हूं। जूम कर के पढ़ लीजिए, वो सारा सच सामने आ जाएगा जिसका उल्लेख मैंने अपनी पोस्ट में किया था। उस पोस्ट का लिंक भी अपने पहले कमेंट में दे रहा हूं।

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