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दस कंपनियां मिलकर लगभग 25 लाख भारतीयों को देती हैं रोजगार

रंजना सिंह

by रंजना सिंह
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    1. टाटा समूह में 7,50,000 कर्मचारी हैं।
      एल एंड टी में 3,38,000 लोग कार्यरत हैं।
      इंफोसिस में 2,60,000 कर्मचारी हैं।
      महिंद्रा एंड महिंद्रा के 2,60,000 कर्मचारी हैं।
      रिलायंस इंडस्ट्रीज के 2,36,000 लोग हैं।
      विप्रो में 2,10,000 कर्मचारी हैं।
      एचसीएल में 1,67,000 कर्मचारी हैं।
      एचडीएफसी बैंक में 1,20,000 कर्मचारी हैं।
      आईसीआईसीआई बैंक में 97,000 कर्मचारी हैं।
      टीवीएस समूह में 60,000 कर्मचारी हैं।


    मात्र ये दस कंपनियां मिलकर लगभग 25 लाख भारतीयों को रोजगार देती हैं – सम्मानजनक वेतन के साथ।


    ये केवल वो आँकड़े हैं जो इनके डायरेक्ट पेरोल पर हैं। इनके अलावा ऑफ रोल्स, ऐसोशिएट्स, डीलर्स, एजेंट्स, इनके प्रोडक्ट्स से जुड़े सहायक प्रोडक्ट्स की कंपनियां। इनके सहारे जन्मी पैकेजिंग कंपनियां, ट्रांसपोर्ट सेक्टर। लिस्ट बहुत लंबी है।

    किसी कंपनी के अगर डायरेक्ट 1 लाख कर्मचारी हैं तो मान के चलिए कि कम से कम चार लाख ऐसे हैं जिनका चूल्हा उसी कम्पनी के कारण चलता है।

    और मैं मात्र 10 बड़ी कंपनियों की बात कर रहा हूँ। हजारों ऐसी प्राइवेट कंपनियां हैं देश में जो रोजगार पैदा कर रही हैं।

    ये 25 लाख कॉर्पोरेट नौकरियां भारत में पिछले 70 वर्षों में सृजित कुल केंद्र सरकार की नौकरियों (48.34 लाख) के आधे से अधिक हैं। यह पिछले 70 वर्षों में कर्नाटक जैसे बड़े राज्य में सृजित कुल सरकारी नौकरियों का भी 5 गुना है! निजी क्षेत्र का सम्मान करें, उन्हें गालियों से मत नवाजें। अपने राजनैतिक एजेंडे और पसंद नापसंद के कारण उन लोगों का मजाक ना उड़ायें जो देश के विकास में बहुत बड़े सहभागी हैं।

    नौकरी देने वालों के लिए जयकार जयकार भले ना करें लेकिन उन्हें इज़्ज़त देना तो सीखिए।


    वे लाखों भारतीयों के लिए आजीविका पैदा कर रहे हैं।

    भारत में 3 पीढ़ियों की आर्थिक क्षमता को बर्बाद करने वाले असफल समाजवादी राजनेताओं की बात न सुनें। यदि आप आने वाली पीढ़ियों के लिए उज्ज्वल भविष्य चाहते हैं, तो भारत को ऐसे हजारों नए निगमों की आवश्यकता है जो उच्च वेतन वाली नौकरियों का सृजन करते हैं।

    अपने दो कौड़ी के राजनैतिक एजेंडे के चलते अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बर्बाद ना करें। खुद कभी आईना जरूर देखें कि क्या आपकी राजनैतिक नफ़रतें आपकी पीढ़ियों के भविष्य से ज्यादा जरूरी है।

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