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चावल हमारे भारत का मुख्य भोजन

Kumar Satish

by Praarabdh Desk
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चावल हमारे भारत का मुख्य भोजन है और चावल भारत के लगभग प्रदेश में खाया जाता है.
अब चावल भोजन है… का मतलब ये नहीं है कि… थाली में चावल लेकर बैठ गए और खाने लगे.
बल्कि… चावल का भात, पुलाव आदि बनाकर खाया जाता है.
हालाँकि… आजकल कुछ फैशनेबल लोग प्रेशर कुकर और माइक्रोवेब ओवन में भी भात बनाने लगे हैं..
लेकिन, जब मैं बच्चा था तो हमारे यहाँ भात हांडी में ही बनता था.. (आज भी हमारे यहाँ हांडी में ही बनता है).
और, भात बनाने का तरीका भी बेहद आसान था कि…. इसके लिए मम्मी पहले हांडी में पानी को उबलने लायक गर्म कर लेती थी फिर उसमें कच्चा चावल डाल देती थी.
और, चावल के पक जाने के बाद उसके स्टार्च मिले पानी को फिल्टर कर निकाल दिया जाता था..
बस बन गया… भात.
लेकिन, भात बनाने के क्रम में मैंने एक बात गौर की थी कि चावल को थोड़ी देर पकाने के बाद मम्मी हांडी से चावल के दो-चार दाने निकाल कर देख लेती थी कि वो पक गया है या नहीं.
अगर नहीं पका है तो… थोड़ी देर और, पकाती थी.
और, अगर पक चुका है तो उसे चूल्हे से उतार लेती थी.
तो, मैंने बालपन में एक बार उत्सुकता से पूछा था कि… तुम दो-चार चावल से ही कैसे जान जाती हो कि हांडी के सारे चावल पक गए होंगे ??
तो, मम्मी ने हंसते हुए कहा कि… अरे, पकेगा तो सब पकेगा..
और, नहीं पका होगा तो कोई नहीं पकेगा.
अब हर एक चावल के दाने को निकाल के थोड़े न पीस के देखेंगे कि पका या नहीं..
अगर ऐसा करने लगे तो फिर खाओगे क्या ???
क्योंकि, ऐसे में तो सारे चावल तो टेस्टिंग में ही बर्बाद हो जाएंगे…!
और, मम्मी की ये बात मुझे आजतक याद रह गई कि हांडी के सारे चावल को टेस्ट नहीं किया जाता है..
बल्कि, रेन्डेमली 2-4 चावल टेस्ट कर लिए तो हो गया.
चावल पकाने और उसे टेस्ट करने का ये तरीका… चावल से लेकर दाल,सब्जी, केक आदि सब पर समान रूप से लागू होता है.
और, भोजन में ही क्यों…
ये फॉर्मूला तो समाज में भी समान रूप से लागू होता है.
फिर भी… अगर कोई जबरदस्ती और ढिठाई से हांडी के सारे चावल को पीस पीस कर देखने पर उतारू है कि पिछला चावल तो खैर पक गया था… अब इसको पीस के दिखाओ कि ये पका है या नहीं ??
तो, ऐसे लोगों को होशियार/बुद्धिमान अथवा ज्ञानी नहीं…
बल्कि… मानसिक रोगी, साइको अथवा ढीठ ही कहा जाएगा.
उदाहरण के तौर पर चावल के पहले दाने के तौर पर जब हमने देख लिया कि… कश्मीर में PDP के साथ सरकार बनाने का क्या मकसद था और नहीं हट सकने वाले 370 को भी सफलता पूर्वक हटा दिया.
दूसरे दाने के टेस्टिंग के तौर पर… 500 सालों से विवादास्पद राममंदिर का मामला सुलझा लिया गया.
तीसरे दाने के टेस्टिंग के तौर पर… असंभव सा लगने वाला हज सब्सिडी खत्म कर दिया गया.
चौथे दाने के टेस्टिंग के तौर पर… काशी में भव्य काशी कॉरिडोर बना दिया गया.
पांचवें दाने के टेस्टिंग के तौर पर… हिन्दूओं को वैदिक ज्ञान देने का रास्ता प्रशस्त कर दिया गया.
छठे दाने के टेस्टिंग के तौर पर… सारे मधरसे को रिकॉर्ड में ले लिया गया और उस पर लगाम लगाना जारी है.
और… सिर्फ धार्मिक एवं सांस्कृतिक ही नहीं…
बल्कि, सामाजिक एवं राजनीतिक तौर पर भी…
इन 8 सालों में देश में एक पटाखा तक नहीं फूटने दिया गया.
हमारे अभिनंदन को उस भेड़िए पाकिस्तान के मुँह से सही सलामत छुड़वा लिया गया.
जिसने अर्णव को पकड़ा और कंगना के घर तोड़ कर खुलेआम दुश्मनी मोल ली..
सब हाजत में पहुंचा दिए गए.
बंगाल से… पार्थो भी महीनों से चक्की पीसिंग एंड पीसिंग है.
ऐसे दर्जनों उदाहरण हैं जिन्हें गिनवाया जा सकता है.
तो ऐसे दर्जनों चावल के सफल टेस्टिंग के बाद भी आखिर ऐसे कौन से मानसिक रोगी, साइको अथवा ढीठ हैं….
जो हांडी चावल के हरेक दाने को निकाल कर टेस्ट करने पर उतारू हैं कि वो पका है या नहीं ???
भाई… बात ऐसी है कि…. दिक्कत न तो चूल्हे में हैं, न हांडी में, न चावल में और न ही चावल पकाने वाले महाराज में.
बल्कि… दिक्कत है तुम्हारे दिमाग में.. क्योंकि, तुम हो… साइको.
इसीलिए… जबरदस्ती तुम हांडी में मौजूद चावल के हरेक दाने को निकाल कर टेस्ट करने पर उतारू हो कि इसे दिखाओ कि ये पका है या नहीं…!
अतः… भाई मेरे…
चावल के दाने की टेस्टिंग बाद में कर लेना..
पहले जाकर किसी न्यूरो डॉक्टर से अपना इलाज करवाओ.
क्योंकि, जिसे अंग्रेजी में साइको और सम्मानित भाषा में… मानसिक रोगी कहते हैं न..
उसे अपने देशी भाषा में पागल या भोंदा (मंदबुद्धि) कहते हैं…!
और, हाँ…
एक बार कहीं पढ़ा था कि…. नपुसंक को हमेशा डर लगता है कि उसकी बीबी दूसरे के साथ भाग जाएगी…!
इसीलिए, वो अपना सब कामधाम छोड़कर… अपनी बीबी के हर क्रिया कलाप पर गिद्ध सी नजरें गड़ाए बैठे रहता है कि…
ये लिपिस्टिक क्यों लगाई ??
किसको दिखाने के लिए लगाई ?
ये साड़ी क्यों पहनी ?
किसको दिखाने के लिए पहनी ?
ये फोन पर किससे बात कर रही थी ?
तुम्हें अपने लवर का भरोसा जीतने के लिए ऐसा कर रही थी ना ??
यहाँ तक कि… अगर उसको प्यार से खीर पूरी भी बनाकर खिलाओ तो उस नपुंसक पति को यही लगता है कि ये हमको खीर पूरी इसीलिए खिला रही है ताकि मेरा ध्यान इधर-उधर भटके और ये अपने लवर के साथ भाग जाए.
इसीलिए… मेरी सलाह है कि… जब न्यूरो डॉक्टर से अपनी दिमाग का इलाज करवाने जाओ तो..
लगे हाथ वहीं स्किन डिपार्टमेंट में किसी अच्छे गुप्त रोग विशेषज्ञ से अपनी नपुसंकता का भी इलाज करवा लेना..
फिर, तुम्हारे मन से ये वहम मिट जाएगा कि…
तुम्हारी बीबी पड़ोसियों के साथ भागने के चक्कर में है..
और, इसीलिए… उसका भरोसा जीतने हेतु वो लिपिस्टिक लगाती है अथवा ढंग की साड़ी पहनती है..
शायद प्रॉपर इलाज के बाद तुम्हारा ये सब वहम मिट जाएगा..!
और, तुम भी एक खुशहाल जिंदगी जी पाओगे ??
काहे को अपनी जिंदगी झंड किए बैठे हो यार ???
मुझे सच में कभी कभी ऐसे लोगों से बेहद सहानुभूति होती है कि बेचारों की बीमारी इतनी बढ़ गई है फिर भी ये कुछ लेते क्यों नहीं ???
जय महाकाल…!!!

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