Home विषयमुद्दा नेता जी मुलायम सिंह यादव का हिंदी प्रेम और अंग्रेज़ी विरोध | प्रारब्ध

नेता जी मुलायम सिंह यादव का हिंदी प्रेम और अंग्रेज़ी विरोध | प्रारब्ध

Author - Ajit Singh

by Ajit Singh
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किसी पुराने ज़माने में नेआ जी मुआयम सीअ याअव का हिंदी प्रेम और अंग्रेज़ी विरोध जगजाहिर था ।
नेआ जी कहा करते थे कि अंग्रेजी में जब फ़ाइल बनती है और Note लगाते हैं अफसर तो भ्रष्टाचार की बहुत संभावना रहती है । वही note अगर हिंदी में देवनागरी में लिखा हो तो भ्रष्टाचार की गुंजाइश नही रहती ।
इसके लिये एक किस्सा भी सुनाया जाता है कि कैसे भ्रष्ट अफसरों ने Not Approved को Note Approved बना दिया था ।
पर ऐसा ही एक और घोटाला जोगी बाबा की सरकार में भी आया है ।
बताया जाता है कि जोगी बाबा ने पिछली सरकार में बाकायदे एक फ़ाइल पे हिंदी में आदेश जारी किये कि रामपुर वाले नव्वाब साब का बाकायदे समारोह पूर्वक , विधि विधान पूर्वक शास्त्रोक्त gu*दा भंजन कर दिया जाए ।
अब जब ये फ़ाइल एक सीनियर IAS अफसर के पास पहुंची तो उसने बाबा के मार्गदर्शक मंडल को समझाया कि नव्वाब साब की नव्वाबी और रुतबे रोब रुआब status के अनुरूप ये कार्यवाही नही है ।
मार्गदर्शक मंडल के माननीयों ने कहा जरा खोल के समझाइये ।
उन अफसर ने समझाया कि रामपुर के नव्वाब का gu*दाभंजन कर कुछ उपलब्ध न होगा ।
अगला रामपुर का नव्वाब है ।
जवानी बिताई है उसने रामपुर में ।
50 – 60 साल का अनुभव है उसको नव्वाबी का ।
ऐसा कोई आसन नही जिसमे उसने नव्वाबी न की हो ।
यूँ भी 65 – 70 साल के आदमी की क्या मालियत लगेगी रामपुर में ?
बुश्किल 20 रु ?
अलबत्ता कमसिन जवां होते तो फिर भी 2 – 500 रु का माल था ।
सो gu दाभंजन से सरकारी नुकसान की भरपाई / लागत वसूल न होगी । बल्कि तेल चटाई का खर्च भी न निकलेगा ।
अब मार्गदर्शक मंडल पड़ा फेर में ।
अब तो आदेश पारित हो गया ।
अब इसे कैसे बदला जाए ?
इसका हल भी उन्ही सीनियर IAS ने ही बताया ।
बोले sir …… gu*दाभंजन में द के ऊपर र लगा दिया जाये तो गुर्दा भंजन हो जाएगा ।
और किडनी निकाल के बेचने पे मरी गिरी हालत में भी 25 – 50 लाख की बिक जाएगी ।
इससे सरकारी खजाने में कुछ तो भरपाई होगी ।
इस प्रकार रामपुर वाले नव्वाब साब का गुर्दा भंजन का कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ ।

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