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फेक_नैरेटिव

देवेन्द्र सिकरवार

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जब हनुमान जी मूर्च्छित लक्ष्मण के लिये संजीवनी लाने के अभियान पर थे तब उनका युद्ध रावण नहीं समय से था।
यह बात रावण भी जानता था और यह भी जान चुका था कि बल से महारुद्र के सबसे उग्र भयंकर रूप एकादश रुद्र कपाली के अवतार हनुमान को रोकना दुरूह ही नहीं असंभव हैं अतः उसने उस प्रतीक का प्रयोग किया जिसके प्रति हनुमान ‘वलनरेबल’ थे और वह था ‘भगवा’।
उसने कालनेमि को भेजा जो भगवा पहनकर आया और उसने हनुमान को बातों में उलझाकर समय निकालना शुरू किया।
हनुमान जी उसके नैरेटिव में फंस भी गये और बाकायदा स्नान करके दीक्षा लेने के कर्मकांड में व्यस्त हो गए और भूल गए कि उनका मूल उद्देश्य क्या था।
वह तो भला हो उस शापित माकरी का जिसके कारण उन्हें ‘कपटी संन्यासी’ की वास्तविकता और वस्तुस्थिति का भान हुआ और वे समय रहते अपने अभियान में सफल हुए।
जैसे-जैसे संघर्ष तीव्र होता जाएगा वैसे-वैसे भ्रमोत्पादक नैरेटिव्स सामने आयेंगे।
कोई भी तथाकथित हिंदू योद्धा, कोई भी मठाधीश, कोई भी शंकराचार्य, कोई भी भगवाधारी, कोई यति आपको यदि हिंदुत्व के नाम पर श्रीराम के पक्षधरों, श्रीराम के सेनापतियों के विरुद्ध भड़काता है तो समझ जाइये कि यह राम का नहीं बल्कि अखिलेश, राहुल और केजरीवाल जैसे रावणों का प्रच्छन्न दूत है जो आपको रामभक्तों के पाले से खींचकर इन म्लेच्छ समर्थकों के साथ खड़ा करना चाहता है।
रणभूमि सजी हुई है और कालनेमि भी मैदान में उतरे हुये हैं और अब आपका दायित्व है कि आप ‘कालनेमियों’ को पहचान पाते हो कि नहीं।
म्लेच्छों के विरुद्ध हिंदुत्व के अस्तित्व के लिये निरंतर चल रहे इस महासंग्राम में आप ही ‘हनुमान’ हैं जो महारुद्र के सबसे उग्र रूप में आते जा रहे हैं। लेकिन अगर भटक गए, लक्ष्य भूल गये तो आपको राह दिखाने कोई माकरी नहीं आएगी

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