Home विषयचिकित्सा जगत बिकाऊ पत्रकारिता का इससे बड़ा और बेशर्म उदाहरण और क्या दूं..

बिकाऊ पत्रकारिता का इससे बड़ा और बेशर्म उदाहरण और क्या दूं..

सतीश चंद्र मिश्रा

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2 करोड़ की आबादी वाली दिल्ली में एक दिन में 9197 नए कोरोना मरीज सामने आते हैं और 34 कोरोना संक्रमितों की मौत हो जाती है तो लुटियन दिल्ली का सबसे बड़ा हिंदी अखबार नवभारत टाइम्स 23 जनवरी को खबर छापता है कि दिल्ली में कोरोना की रफ्तार अब धीमी होने लगी है। देश की राजधानी में रविवार को कोविड-19 के 9,197 नए मामले सामने आए और 34 लोगों की मौत हुई।
लेकिन दिल्ली से 12 गुना बड़े, 24 करोड़ जनसंख्या वाले उत्तरप्रदेश में 22 जनवरी को जब 16 हजार से ज्यादा नए कोरोना मरीज सामने आते हैं तथा दिल्ली की तुलना में आधे से भी कम, 16 कोरोना संक्रमितों की मौत होती है तो एक दिन पहले 22 जनवरी को वही नवभारत टाइम्स खबर को इस तरह प्रकाशित करता है… Corona Virus: यूपी में 16 हजार से ज्यादा नए कोरोना मरीज मिले, 96 हजार पहुंचे एक्टिव केस।
उत्तर प्रदेश में कोरोना का कहर लगातार जारी है। शनिवार को भी राज्य में 16 हजार से ज्यादा कोरोना केस सामने आए हैं। वहीं, प्रदेश में एक्टिव केस का आंकड़ा 96 हजार से ज्यादा पहुंच गया है।
खबरों के प्रकाशन की इस चरित्रहीन रणनीति का कारण भी समझिए। कोरोना के कहर से कराहती दिल्ली को लावारिस छोड़कर पंजाब गोआ उत्तराखंड में चुनावी मटरगश्ती कर रहे केजरीवाल के इस जानलेवा राजनीतिक कुकर्म पर लोगों का ध्यान नहीं जाए, केजरीवाल के इस कुकर्म पर कोई उंगली ना उठे इसलिए जनसंख्या अनुपात के आधार पर दिल्ली में उत्तरप्रदेश से 25 गुना अधिक हुई कोरोना मौतों, 13 गुना अधिक सामने आए नए कोरोना मरीजों की संख्या के बावजूद नवभारत टाइम्स बेशर्मी से लिखता है कि “दिल्ली में कोरोना की रफ्तार अब धीमी होने लगी है”। लेकिन यही नवभारत टाइम्स उत्तरप्रदेश में चुनावी जंग में जूझ रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर दबाव डालने, उन्हें कठघरे में खड़ा करने के लिए लिखता है कि… उत्तर प्रदेश में कोरोना का कहर लगातार जारी है।
बिकाऊ पत्रकारिता का इससे बड़ा और बेशर्म उदाहरण कुछ और हो सकता है क्या.?
नवभारत टाइम्स की बेशर्म बिकाऊ पत्रकारिता के उपरोक्त दोनों तथ्यों की पुष्टि के लिए पहले दोनों कमेंट देखें।

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