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भाजपा सरकार में ब्राह्मणों के एक वर्ग

by Nitin Tripathi
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भाजपा सरकार में ब्राह्मणों के एक वर्ग की नाराज़गी की वजह दो कांड रहे. एक था ऊँचाहर कांड और दूसरा ख़ुशी दुबे को जेल में रखना. जिसमें ऊँचाहार कांड ने तो लगभग सभी ब्राह्मणों को उद्वेलित किया. सरकार आने के कुछ महीनों के अंदर ही ऊँचाहार, राय बरेली में पाँच ब्राह्मणों की हत्या कर दी गई. जातीय रंजिश में यह हत्या स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थकों द्वारा की गई.
चूँकि स्वामी प्रसाद सरकार में मंत्री थे, विशेष कार्यवाही भी नहीं हुई. साथ ही उन्होंने खूब ऊल जलूल बयान भी दिए, जिससे ब्राह्मणों के एक वर्ग में भाजपा के प्रति नाराज़गी बढ़ी. सपा ने चार साल इस नाराज़गी को सफलता पूर्वक कैश भी किया.
पर ऐन चुनाव के मौक़े पर सपा ने उन्ही स्वामी प्रसाद को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया. भाजपा चाह कर भी यह ब्रह्म हत्या का दाग छुटा ना पा रही थी, सपा ने स्वयं ही इसे ले लिया.
लिया तो लिया ऊपर से अकस्मात् वह सपा जो कल तक ब्राह्मण कार्ड खेल रही थी, अकस्मात् बोलने लगी कि भाजपा सरकार सवर्णों की सरकार थी, इसमें पिछड़ों पर अत्याचार हुवे. सपा का चुनावी नारा बना कि सौ में पचासी हमारा है, पंद्रह (सवर्णों) में बँटवारा है. ऐसे जातिवादी नारों से ब्राह्मण और सशंकित है कि यह अभी से ऐसा बोल रहे हैं, आगे क्या करेंगे.
स्वामी प्रसाद मौर्य मौर्य समाज के कितने वोट पाएँगे, सबको पता है. खुद अपने बेटे को प्रचंड भाजपा लहर में जिता न पाए थे. दूसरे मौर्यों के असल नेता उप मुख्य मंत्री केशव प्रसाद मौर्य हैं, मौर्यों को भी पता है सपा में कुछ भी हो जाए इससे ऊँची गद्दी उन्हें न मिलेगी. पर स्वामी प्रसाद प्रकरण ने ब्राह्मणों को एक बार फ़िर से भाजपा के साथ पोलराइज़ कर दिया है. वह जो पंद्रह प्रतिशत ब्राह्मण छिटक रहे थे वह फ़िर से भाजपा के साथ आ रहे हैं.
अखिलेश के लिए नशीहत होनी चाहिए आधी तजि पूरी को धावे आधी रहे न पूरी पावे.

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