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महाराष्ट्र भाजपा और शिवसेना

Nitin Tripathi

by Nitin Tripathi
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महाराष्ट्र में जो हो रहा है, इस पूरे घटना क्रम में भाजपा महाराष्ट्र यूनिट और विशेष कर फड़नवीश एक अच्छे कूट नीतिज्ञ के रूप में सामने आए हैं.
प्रथम तो यह कि राजनीति का प्रथम नियम ही होता है, सत्ता. वो जो कहते हैं, दुबारा चुनाव हो जाने दो, ऐसी भी क्या जल्दी – ऐसे सब लोगों ने कभी राजनीति नहीं की. राजनीति में सत्ता संजीवनी होती है. पैसा ताक़त सब सत्ता से आता है. भाजपा की सरकार आने से न सिर्फ़ भाजपा मज़बूत होगी बल्कि कांग्रेस पूरे देश में और कमजोर होगी. एक मज़बूत फ़ंडिंग स्टेट उनके हाथ से निकल जाएगा. ऐसे ही कांग्रेस कंगाली की कगार पर है.
दूसरा यह कि शिव सेना या किसी अन्य मराठा दल का जीवित रहना भाजपा के लिए बेहद ज़रूरी है वर्तमान महाराष्ट्र में. उद्धव ठाकरे ने सत्ता के लालच में सेक्युलर बीफ़ खा लिया और अपनी राजनीति समाप्त कर ली, फ़िर भी अभी भी महाराष्ट्र की राजनीति में ढेरों मराठा छत्रप हैं. इतिहास रहा है कि महाराष्ट्र में सदैव मराठा प्लस ब्राह्मण जोड़ ने ही लम्बे समय शासन किया है.
भाजपा को अब बस एक और सरकार की ज़रूरत है. देखिएगा इस बार भाजपा सरकार आई तो कांग्रेस, NCP और यहाँ तक कि शिव सेना के ढेरों स्थानीय छत्रप भाजपा join करने के लिए लाइन लगा देंगे – वैसे ही जैसा UP में हुआ. अब तक जब भी भाजपा महाराष्ट्र में सरकार में आई सदैव शिव सेना का कार्य होता था मराठा राजनीति सम्भालना, अन्य सब भाजपा का. अब परिस्थिति बदल गई है. उद्धव चारों खाने चित हैं. उद्धव से टूट कर बनी शिव सेना भाजपा की जूनियर पार्ट्नर होगी. और वर्तमान भाजपा कुख्यात है ही सब अकेले खाने में.
भाजपा के लिए इस क्राइसिस में दोनों हाथों में लड्डू है.

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