Home विषयमुद्दा मोदी जी आपने कहा था देश नहीं झुकने दूंगा… खुद तो सीधे खड़े नजर आइए.

मोदी जी आपने कहा था देश नहीं झुकने दूंगा… खुद तो सीधे खड़े नजर आइए.

Rajeev Mishra

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किसी भी निर्णय की सफलता के लिए यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है कि निर्णय कितना सही है. यह आवश्यक है कि उस निर्णय की फीडबैक मैकेनिज्म क्या है?
सेना ने युवाओं को चार साल के लिए नियुक्त करने का फैसला लिया है. अगर आवश्यकता समझेंगे तो इसमें सुधार करेंगे…चार को आठ या बारह साल कंटिन्यू करने का ऑप्शन दिया जा सकता है. उन्हें रेगुलर पूर्णकालिक सेवा के लिए चयन के एक से अधिक अवसर दिए जा सकते हैं. सेवा काल चार से बढ़ा कर पांच, छह, सात कुछ भी किया जा सकता है. इसे बंद करके पुराने सिस्टम पर आया जा सकता है. कुछ भी हो सकता है, पर जब निर्णय लिया है तो इसपर आगे बढ़ने और फीडबैक के लिए माइंड खुला रखने की अवश्यकता है.
पर किसी भी निर्णय का सबसे महत्वपूर्ण भाग यह होता है कि निर्णय कौन ले रहा है.
सेना किसे कितने दिनों के लिए, किन शर्तों पर रखेगी, सेना अपने संसाधन कहां खर्च करेगी यह निर्णय सिर्फ सेना ले सकती है. उन संसाधनों की आपूर्ति सरकार का काम है तो सरकार उसमें इन्वॉल्व होती है. जो कुछ हजार लोग सरकार के हर निर्णय पर बवाल करते हैं और हिंसा पर उतारू हैं उन्हें यह करने का कोई अधिकार नहीं है. सेना कोई रोजगार गारंटी स्कीम की संस्था नहीं है. उसे जरूरत होगी रखेगी, नहीं जरूरत होगी तो नहीं रखेगी. बहुत बड़ा देश है, बहुत से लोग हैं जो सेना में उसकी शर्तों पर काम करने को तैयार हैं. उन्हें रोकने और बाधा पहुंचाने वाले आप कोई नहीं होते.
और सरकार को एक बात समझनी चाहिए, जनता ने उसे चुना है देश में प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए. देश की जनता की जान, स्वतंत्रता और संपत्ति की रक्षा करना सरकार की प्राइमरी ड्यूटी है. इससे बचने का कोई उपाय नहीं है. जो भी हिंसक तत्व हैं उनके विरुद्ध प्रभावी प्रतिहिंसा करने के लिए ही सरकार होती है.
कहा था आपने, देश नहीं झुकने दूंगा… खुद तो सीधे खड़े नजर आइए….

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